What is Ras in Hindi | रस किसे कहते हैं

Hindi Vyakaran की इस सीरीज में What is Ras in Hindiरस किसे कहते हैं तथा रस के कितने भेद होते हैं को उदाहरण सहित बिलकुल ही आसान तरीके से सीखेंगे।

what is ras in hindi

रस किसे कहते हैं | What is Ras in Hindi

काव्यपाठ या नाटक देखने से पाठक या दर्शक के मन में जो आनंद उत्पन होता है, उसे ही रस कहते हैं।

  • भरत मुनि ने सबसे पहले अपनी कृति नाट्यशास्त्र में रस का इस्तेमाल किया था।

रस की परिभाषा

What is Ras in Hindi : काव्य को पढ़ने या सुनने से जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे रस कहते हैं।

रस के कितने भेद होते हैं

रस के 9 भेद के होते हैं –

लेकिन वात्सल्य रस को दसवां और भक्ति रस को ग्यारहवां रस माना गया है।

ras ke kitne bhed hote hain

रस एवं उसके स्थायी भाव निम्न प्रकार हैं –

रस

स्थायी भाव

पहचान

(1) शृंगार रस

रति/प्रेम

स्त्री पुरुष का प्रेम

(2) हास्य रस

हास

गों या वाणी के विकार से उत्पन्न उल्लास या हँसी

(3) करुण रस

शोक

प्रिय के वियोग या हानि के कारण व्याकुलता

(4) वीर रस

उत्साह

दया, दान और वीरता आदि को प्रकट करने में प्रसन्नता का भाव

(5) रौद्र रस

क्रोध

काम बिगाड़ने वाले को दंड देने वाली मनोवृति

(6) भयानकरस

भय

बड़ा अनिष्ट कर सकने में समर्थ जीव या वस्तु को देखकर उत्पन्न व्याकुलता

(7) बीभत्सरस

जुगुप्सा/घृणा

घिनौने पदार्थ को देखकर होने वाली ग्लानि

(8) अदभुतरस

विस्मय/आश्चर्य

अनोखी वस्तु को देखकर या सुनकर आश्चर्य का भाव

(9) शांत रस

निर्वेद, उदासीनता

संसार के प्रति उदासीनता का भाव

(10) वात्सल्य रस

वात्सल्य रति

अनुराग संतान के प्रति माता-पिता का प्रेम भाव

(11) भक्तिरस

रति/अनुराग

ईश्वर के प्रति प्रेम

श्रंगार रस | What is Sringar Ras in Hindi

नायक और नायिका के मन में स्थित रति या प्रेम जब रस कि अवस्था में पहुँच जाता है तो वह श्रंगार रस कहलाता है।

इसके अंतर्गत सौन्दर्य, प्रकृति, सुन्दर वन, वसंत ऋतु, पक्षियों का चहचहाना आदि के बारे में वर्णन किया जाता है।

श्रंगार रस का उदाहरण

दरद कि मारी वन-वन डोलू वैध मिला नाहि कोई

मीरा के प्रभु पीर मिटै, जब वैध संवलिया होई

हास्य रस

इसके अंतर्गत वेशभूषा, वाणी आदि की विकृति को देखकर मन में जो विनोद का भाव उत्पन्न होता है उससे हास की उत्पत्ति होती है इसे ही हास्य रस कहते हैं।

हास्य रस का उदाहरण

सीरा पर गंगा हसै, भुजानि में भुजंगा हसै

हास ही को दंगा भयो, नंगा के विवाह में

करुण रस

किसी प्रिय व्यक्ति के चिर विरह या मरण से जो शोक उत्पन्न होता है उसे करुण रस कहते हैं।

करुण रस का उदाहरण

दुःख ही जीवन की कथा रही

क्या कहूँ, आज जो नहीं कहीं

वीर रस

युद्ध या कठिन काम करने के लिए मन में जो उत्साह की भावना विकसित होती है उसे ही वीर रस कहते हैं। इसमें शत्रु पर विजय प्राप्त करने, यश प्राप्त करने आदि प्रकट होती है।

वीर रस का उदाहरण

बुंदेले हर बोलो के मुख हमने सुनी कहानी थी

खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी

रौद्र रस

जब किसी एक व्यक्ति द्वारा दुसरे व्यक्ति का अपमान करने आदि कि निन्दा से जो क्रोध उत्पन्न होता है उसे रौद्र रस कहते हैं।

इसमें क्रोध के कारण मुख लाल हो जाना, दाँत पिसना, शास्त्र चलाना, भौहे चढ़ाना आदि के भाव उत्पन्न होते हैं।

रौद्र रस का उदाहरण

उस काल मरे क्रोध के तन काँपने उसका लगा

मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा

भयानक रस

जब किसी भयानक व्यक्ति या वस्तु को देखने से मन में जो व्याकुलता उत्पन्न होती है उसे भय कहते हैं और उस भय के उत्पन्न रस को भयानक रस कहते हैं।

इसके अंतर्गत कम्पन, पसीना छूटना, मुँह सूखना, चिन्ता आदि के भाव उत्पन्न होते हैं।

भयानक रस का उदाहरण

अखिल यौवन के रंग उभार, हड्डियों के हिलाते कंकाल

कचो के चिकने काले, व्याल, केंचुली, काँस, सिबार

वीभत्स रस

घृणित चीजो या घृणित व्यक्ति को देखकर मन में उत्पन्न होने वाली घृणा ही वीभत्स रस कहलाती है।

वीभत्स रस का उदाहरण

आँखे निकाल उड़ जाते, क्षण भर उड़ कर आ जाते

शव जीभ खींचकर कौवे, चुभला-चभला कर खाते

अदभुत रस

जब ब्यक्ति के मन में आश्चर्यजनक वस्तुओं को देखकर जो विस्मय आदि के भाव उत्पन्न होते हैं उसे ही अदभुत रस कहा जाता है।

इसके अन्दर औंसू आना, काँपना, आँखे फाड़कर देखना आदि के भाव व्यक्त होते हैं।

अदभुत रस का उदाहरण

देख यशोदा शिशु के मुख में, सकल विश्व की माया

क्षणभर को वह बनी अचेतन, हिल न सकी कोमल काया

शान्त रस

जब कोई ऐसे काव्यों को पढ़कर मन में शान्ति का और दुनिया से मोह खत्म होने का भाव उत्पन्न हो तो, उसे शांत रस कहते हैं।

शांत रस का उदाहरण

जब मै था तब हरि नाहिं अब हरि है मै नाहिं

सब अँधियारा मिट गया जब दीपक देख्या माहिं

वात्सल्य रस

माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम, गुरुओं का शिष्य के प्रति प्रेम, बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम आदि का भाव स्नेह कहलाता है यही स्नेह का भाव वात्सल्य रस कहलाता है।

वात्सल्य रस का उदहारण

बाल दसा सुख निरखि जसोदा, पुनि पुनि नन्द बुलवाति

अंचरा-तर लै ढ़ाकी सूर, प्रभु कौ दूध पियावति

भक्ति रस

इस रस में ईश्वर के प्रति प्रेम का वर्णन किया जाता है।

भक्ति रस के उदाहरण

एक भरोसो एक बल, एक आस विश्वास

एक राम घनश्याम हित, चातक तुलसीदास

रस के कितने अंग होते हैं

रस के 4 अंग होते हैं –

1. स्थायी भाव

मानव ह्रदय मे स्थायी रूप से रहने वाले भाव को स्थायी भाव कहते हैं।

2. विभा

स्थायी भाव को जगाने वाले कारण ही विभाव कहलाते हैं।

विभाव 2 प्रकार के होते है

 (क) आलम्बन (ख) उद्दीपन

3. अनुभाव

स्थायी भाव के जाग्रत होने तथा उद्दीप्त होने पर आश्रय की शारीरिक चेष्टाएँ अनुभाव कहलाती है।

अनुभाव 5 प्रकार के होते हैं—

  1. कायिक
  2. वाचिक
  3. मानसिक
  4. सात्विक
  5. आहार्य

4. संचारी भाव
जाग्रत स्थायी भाव को पुष्ट करने के लिए कुछ समय के लिए जगकर गायब हो जाने वाले भाव संचारी भाव कहलाते है।

अगर आपको यह post What is Ras in Hindi तथा Ras Kise Kahate Hain  पसंद आयी तो इसे जरूर शेयर करें धन्यवाद् ।

यह भी पढ़ें :

Check Also

Sandhi Kise Kahate Hain

Sandhi Kise Kahate Hain | Sandhi Viched in Hindi

Hindi Vyakaran की इस सीरीज में Sandhi Kise Kahate Hain , Sandhi Viched in Hindi को उदाहरण सहित बिलकुल …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *