Short Motivational Story in Hindi | 14 प्रेरणादायक कहानियां

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Short Motivational Story in Hindi

Short Motivational Story in Hindi

चार सवाल

एक बार एक राजा ने अपने मंत्री से कहा, “मुझे इन चार सवालों के जवाब दो।

  1. जो यहां हो वहां नहीं।
  2. वहां हो यहां नहीं।
  3. जो यहां भी नहीं हो और वहां भी न हो।
  4. जो यहां भी हो और वहाँ भी।

मंत्री ने जवाब देने के लिए 2 दिन का समय मांगा। दो दिनों के बाद वह चार व्यक्तियों को लेकर राज दरबार में हाजिर हुआ और बोला,

हमारे धर्मग्रंथों में अच्छे-बुरे कामों और उनके फलों के अनुसार स्वर्ग और नरक की अवधारणा प्रस्तुत की गई है।

यह पहला व्यक्ति भ्रष्टाचारी है, यह गलत कार्य करके यहां तो सुखी दिखाई देता है, पर इसकी जगह स्वर्ग में नहीं होगी।

दूसरा व्यक्ति सद्गृहस्थ है। यह यहाँ ईमानदारी से रहते हुए कष्ट जरूर झेल रहा है, पर इसकी जगह वहां जरूर होगी।

तीसरा व्यक्ति भिखारी है। यह न तो यहां सुखी है और न वहां सुखी रहेगा।

चौथा व्यक्ति एक दानवीर सेठ है, जो अपने धन का सदुपयोग करते हुए दूसरों की भलाई भी कर रहा है और सुखी भी है।

अपने अच्छे व्यवहार के कारण वह यहां भी सुखी है और वहां भी सुरक्षित है।

सफलता का रहस्य

Motivational Story in Hindi : एक बार एक लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है ?

सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नहीं के किनारे मिलो वो मिले.

फिर सुकरात ने लड़के से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा।

और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ कर पानी में डुबो दिया।

वह बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा, लेकिन सुकरात उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा।

फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हाँफते- हाँफते तेजी से सांस लेना।

सुकरात ने पूछा, जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे ?

लड़के ने उत्तर दिया, “सांस लेना”। सुकरात ने कहा, यही सफलता का रहस्य है।

जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना चाहते थे तो वो तुमको जरूर मिलेगी।

बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

Short Motivational Story in Hindi : एक किसान ने अपने पड़ोसी को भला बुरा कह दिया,

लेकिन जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया और अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा।

संत ने किसान से कहा, “तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो, और उन्हें शहर के बीचो-बीच जाकर रख दो”

किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया।

संत ने कहा, जाओ और पंखों को इकठ्ठा कर के ले आओ।

किसान वापस गया पर तब तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे और किसान खाली हाथ पहुंचा

तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसे ही तुम शब्दों को आसानी से इन्हें अपने मुंह से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते।

आप इंसान हैं हाथी नहीं

Short Motivational Story in Hindi : एक आदमी कहीं से गुजर रहा था, तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा और रुक गया।

उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है, उसने सोचा कि हाथी लोहे की जंजीरों की जगह एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए है! हाथी चाहते,

अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे।

उसने महावत से पूछा कि ये हाथी किस तरह इतनी शांति से खड़े हैं और भागने की कोशिश नही कर रहे हैं ?

तब महावत ने कहा, ” इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है,

उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें।

हर बार कोशिश करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे यकीन हो जाता है कि वो रस्सियों को नहीं तोड़ सकते,

और बड़े होने पर उनका ये यकीन बना रहता है,

इसलिए वो कभी इसे तोड़ने की कोशिश ही नहीं करते। आदमी हैरानी में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते।

इन हाथियों की तरह ही हम पहले मिली असफलता के कारण हार मान लेते हैं कि अब हमसे ये हो ही नहीं सकता और अपनी ही बनायीं हुई दिमागी जंजीरों में पूरी ज़िन्दगी गुजार देते हैं।

अंधा घोड़ा

Short Motivational Story in Hindi : शहर के बने एक Farm house में दो घोड़े रहते थे।

दूर से देखने पर वो दोनों एक जैसे दिखते थे, पर पास जाने पर पता चला कि उनमें से एक घोड़ा अँधा भी है।

पर अंधे होने के बावजूद farm के मालिक ने उसे वहां से निकाला नहीं बल्कि उसे और भी सुरक्षा और आराम के साथ रखा था।

Farm के मालिक ने दूसरे घोड़े के गले में एक घंटी बाँध रखी थी,

जिसकी आवाज़ सुनकर अँधा घोड़ा उसके पास पहुंच जाता और उसके पीछे-पीछे बाड़े में घूमता।

घंटी वाला घोड़ा भी अपने अंधे दोस्त की परेशानी समझता,

वह बीच-बीच में पीछे मुड़कर देखता कि कहीं वो रास्ते से भटक ना जाए।

वह ये भी देखता कि उसका दोस्त सुरक्षित वापस अपनी जगह पर पहुच जाए,

और उसके बाद ही वो अपनी जगह की ओर बढ़ता था।

बाड़े के मालिक की तरह भगवान हमें इसलिए नहीं छोड़ देते कि हमारे अन्दर कोई दोष या कमियां हैं।

वो हमारा ख्याल रखते हैं और हमें जब ज़रुरत होती है तो किसी को हमारी मदद के लिए भेज देते हैं।

आम का पेड़

Motivational Story in Hindi : कुंतालपुर का राजा बड़ा ही न्याय प्रिय था।

वह अपनी प्रजा के दुख-दर्द में बराबर काम आता था। प्रजा भी उसका बहुत आदर करती थी।

एक दिन राजा अपने राज्य में घूमने निकला तब रास्ते में देखता है कि एक वृद्ध एक छोटा सा पौधा रोप रहा है।

राजा उसके पास गया और बोला, यह आप किस चीज का पौधा लगा रहे हैं ?

वृद्ध ने कहा, ” आम का।

राजा ने हिसाब लगाया कि उसके बड़े होने और उस पर फल आने में कितना समय लगेगा।

हिसाब लगाकर उसने वृद्ध की ओर देखा और कहा, सुनो दादा इस पौधे के बड़े होने और उस पर फल आने में कई साल लग जाएंगे,

तब तक आप क्या जिंदा रहेंगे ?

वृद्ध ने कहा, कि इस बूढ़े ने दूसरों के लगाए पेड़ों के कितने फल अपनी जिंदगी में खाए हैं ?

क्या उस कर्ज को उतारने के लिए मुझे कुछ नहीं करना चाहिए ?

क्या मुझे इस भावना से पेड़ नहीं लगाने चाहिए। कि इनके फल दूसरे लोग खा सकें ?

जो सिर्फ अपने फायदे के लिए ही काम करता है, वह तो स्वार्थी मनुष्य होता है।

वृद्ध की यह दलील सुनकर राजा खुश हो गया, और कहा आज मुझे भी कुछ बड़ा सीखने को मिला।

किसान की घड़ी

Hindi Motivational Story : एक बार एक किसान की घड़ी कहीं खो गयी।

वैसे तो घड़ी कीमती नहीं थी पर किसान उससे जुड़ा हुआ था और किसी भी तरह उसे वापस पाना चाहता था।

उसने खुद भी घडी खोजने का बहुत प्रयास किया, पर तामाम कोशिशों के बाद भी घड़ी नहीं मिली।

उसने  इस काम में बच्चों की मदद ली और आवाज लगाई, सुनो बच्चों,

तुममें से जो कोई भी मेरी खोई घडी खोज देगा उसे मैं 50 रुपये इनाम में दूंगा।

सभी बच्चे जोर-शोर दें इस काम में लगा गए पर घंटो बीत जाने पर भी घडी नहीं मिली।

अब लगभग सभी बच्चे हार मान चुके थे और किसान को भी लगा की घड़ी नहीं मिलेगी,

तभी एक लड़का उसके पास आया और बोला,

काका मुझे एक मौका और दीजिये, पर इस बार मैं ये काम अकेले ही करना चाहूँगा। किसान ने तुरंत हाँ कर दी।

लड़का एक-एक कर के घर के कमरों में जाने लगा और जब वह किसान के कमरे से निकला तो घड़ी उसके हाथ में थी।

किसान घड़ी देख खुश हो गया और  पूछा बेटा,

कहाँ थी ये घड़ी, तुमने इसे कैसे ढूंढ निकाला ?

लड़का बोला,  मैंने कुछ नहीं किया बस में कमरे में गया और चुप-चाप बैठ गया, 

घड़ी की आवाज़ पर ध्यान देने लगा,

कमरे में सन्नाटा होने के कारण मुझे घड़ी की टिक-टिक की आवाज़ सुनाई दी ,

जिससे मैंने घड़ी का अंदाजा लगा लिया और आलमारी के पीछे गिरी ये घड़ी खोज निकाली।

अच्छे लोग बुरे लोग

Motivational Story in Hindi : बहुत समय पहले की बात है। एक बार एक गुरु जी गंगा किनारे अपने शिष्यों के साथ स्नान कर रहे थे।

तभी एक राहगीर (राह चलने वाला) आया और उनसे पूछा,

इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं, दरअसल मैं कहीं और जाना चाहता हूँ ?

गुरु जी बोले, जहाँ तुम अभी रहते हो वहां कैसे लोग रहते हैं ?

मत पूछिए, वहां तो एक से एक कपटी, दुष्ट

और बुरे लोग बसे हुए हैं। राहगीर बोला- गुरु जी बोले,

इस गाँव में भी बिलकुल उसी तरह के लोग रहते हैं।

कपटी, दुए, बुरे इतना सुनकर राहगीर आगे बढ़ गया।

कुछ समय बाद एक दूसरा राहगीर वहां से गुजरा, उसने

भी गुरु जी से वही सवाल पूछा, किसी नयी जगह जाना है,

क्या आप बता सकते हैं। कि इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं ?

जहाँ तुम अभी रहते हो वहां कैसे लोग रहते हैं ?

गुरु जी ने इस राहगीर से भी वही सवाल पूछा।

वहां तो बड़े सभ्य, सुलझे और अच्छे लोग रहते हैं। राहगीर बोला।

तुम्हे बिलकुल उसी तरह के लोग यहाँ भी मिलेंगे।

पर उनके शिष्य ये सब देख रहे थे और राहगीर के जाते ही उन्होंने पूछा,

गुरु जी आपने दोनों राहगीरों को एक ही जगह के बारे में अलग-अलग बातें क्यों बतायी।

गुरु जी बोले, शिष्यों आमतौर पर हम चीजों को वैसे नहीं देखते जैसी वे हैं,

बल्कि उन्हें हम ऐसे देखते हैं जैसे कि हम खुद हैं।

हर जगह हर तरह के लोग होते हैं यह हम पर निर्भर करता है कि हम किस तरह के लोगों को देखना चाहते हैं।

शिष्य उनकी बात समझ चुके थे और आगे से उन्होंने जीवन में सिर्फ अच्छाइयों पर ही ध्यान देने का वादा किया।

बुरी आदत

Short Motivational Story in Hindi : एक आदमी अपने बेटे की बुरी आदत से बहुत परेशान था।

वह जब बेटे से उस आदत को छोड़ने को कहते तो एक ही जवाब मिलता, अभी मैं छोटा हूँ।

धीरे-धीरे ये आदत छोड़ दूंगा! पर वह कभी भी आदत छोड़ने की कोशिश नहीं करता।

उन्हीं दिनों एक महात्मा गाँव में आये हुए थे,

जब आदमी तुरंत उनके पास पहुंचा और अपनी समस्या बताने लगा,

महात्मा जी ने उसकी बात सुनी और कहा ठीक है,

आप अपने बेटे को कल सुबह बागीचे में लेकर आइगे, वहीं में आपको उपाय बताऊंगा।

अगले दिन सुबह पिता-पुत्र बागीचे में पहुंचे।

महात्मा जी बेटे से बोले, चलो हम दोनों बागीचे की सैर करते हैं और वो धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे।

चलते चलते वो अचानक रुके और बेटे से कहा,

क्या तुम इस छोटे से पौधे को उखाड़ सकते हो ?

जी हाँ, इसमें कौन सी बड़ी बात है,

और ऐसा कहते हुए बेटे ने आसानी से पौधे को उखाड़ दिया।

बुरी आदत

फिर वे आगे बढ़ गए और थोड़ी देर बाद उन्होने थोड़े बड़े पौधे की तरफ इशारा करते कहा, क्या तुम इसे उखाड़ सकते हो ?

वह तुरंत पीधा उखाड़ने में लग गया।

इस बार उसे थोड़ी मेहनत लगी पर काफी कोशिशों के बाद उसने इसे भी उखाड़ दिया।

वे फिर आगे बढ़ गए और कुछ देर बाद महात्मा जी ने एक गुडइल के पेड़ की तरफ इशारा करते हुए बेटे से इसे उखाड़ने के लिए कहा।

बेटे ने पेड़ का ताना पकड़ा और उसे जोर-जोर से खींचने लगा पर पेड़ तो हिलने का भी नाम नहीं ले रहा था।

जब बहुत कोशिश करने के बाद भी पेड़ टस से मस नहीं हुआ तो बेटा बोला।

अरे ये तो बहुत मजबूत है। इसको उखाड़ना नामुमकिन है।

महात्मा जी ने उसे समझाते हुए कहा,

बेटा, ठीक ऐसा ही बुरी आदतों के साथ होता है,

जब वे नई नई होती हैं तो उन्हें छोड़ना आसान होता है,

पर वे जैसे जैसे पुरानी हजात हैं इन्हें छोड़ना मुश्किल होता है।

बेटा उनकी बात समझ गया और उसने मन ही मन आज से ही आदत छोड़ने का निश्चय किया।

आखिरी काम

एक बूढ़ा कारपेंटर अपने काम के लिए काफी जाना जाता था।

उसके बनाये लकड़ी के घर दूर दूर तक मशहूर थे।

पर अब बूढ़ा हो जाने के कारण उसने सोचा कि बाकी की ज़िन्दगी आराम से गुजारी जाए और वह अगले दिन सुबह-सुबह अपने मालिक के पास पहुंचा और बोला, ठेकेदार साहब,

मैंने बरसों आपकी सेवा की है पर अब में बाकी का समय आराम से बिताना चाहता हूँ कृपया मुझे काम छोड़ने की अनुमति दें।

ठेकेदार कारपेंटर को बहुत मानता था, इसलिए उसे ये सुनकर दुःख हुआ पर वह कारपेंटर को निराश नहीं करना चाहता था,

उसने कहा, आप यहाँ के सबसे अनुभवी व्यक्ति हैं,

आपकी कमी कोई नहीं पूरी कर सकता लेकिन मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि जाने से पहले एक आखिरी काम करते जाइये।

जी, क्या काम करना है ? कारपेंटर ने पूछा,

आखिरी काम

मैं चाहता हूँ कि आप जाते जाते हमारे लिए एक और लकड़ी का घर तैयार कर दीजिये ठेकेदार घर बनाने के लिए पैसे देने को भी बोला।

वह इस काम के लिए तैयार हो गया। अगले दिन से ही वह घर बनाना शुरू कर दिया,

ये जान कर कि ये उसका आखिरी काम है और इसके बाद उसे और कुछ नहीं करना होगा वो थोड़ा ढीला पड़ गया।

पहले जहाँ यह बड़ी सावधानी से लकड़ियाँ चुनता और काटता था अब बस काम चालाऊ तरीके से ये सब करने लगा।

कुछ एक हफ्तों में घर तैयार हो गया और वो ठेकेदार के पास पहुंचा,

ठेकेदार साहब, मैंने घर तैयार कर लिया है, अब तो मैं काम छोड़ कर जा सकता हूँ ?

ठेकेदार बोला – हाँ, आप बिलकुल जा सकते हैं लेकिन अब आपको अपने पुराने घर में जाने की ज़रूरत नहीं है,

क्योंकि इस बार जो घर आपने बनाया है वो आपकी बरसों की मेहनत का इनाम है;

जाइये अपने परिवार के साथ उसमे खुशहाली से रहिये।

कारपेंटर यह सुनकर हैरान रह गया, वह मन ही मन सोचने लगा,

कहाँ मैंने दूसरों के लिए एक से बढ़ कर एक घर बनाये और अपने घर को ही इतने घटिया तरीके से बना बैठा।

काश ! मैंने ये घर भी बाकी घरों की तरह ही बनाया होता।

साधू की झोपड़ी

Short Motivational Story in Hindi : एक गाँव में दो साधू रहते थे। वे दिन भर भीख मांगते और मंदिर में पूजा करते थे।

एक दिन गाँव में आंधी आ गयी और बहुत जोरों की बारिश होने लगी।

दोनों साधू गाँव की सीमा से लगी एक झोपड़ी में रहते थे,

शाम को जब दोनों वापस पहुंचे तो देखा कि आंधी-तूफ़ान के कारण उनकी आधी झोपडी टूट गई है।

यह देखकर पहला साधू गुस्सा हो उठता है और कहता है,

भगवान तू मेरे साथ हमेशा ही गलत करता ह। मैं दिन भर तेरा नाम लेता हूँ,

मंदिर में तेरी पूजा करता हूँ फिर भी तूने मेरी झोपडी तोड़ दी।

गाँव में चोर लुटेरे झूठे लोगो के तो मकानों को कुछ नहीं हुआ,

हम साधुओं की झोपडी ही तूने तोड़ दी ये तेरा ही काम है।

तभी दूसरा साधू आता है और झोपडी को देखकर खुश हो जाता है और कहता है भगवान् आज विश्वास हो गया तू हमसे कितना प्रेम करता है

ये हमारी आधी झोपडी तूने ही बचाई होगी वरना इतनी तेज आंधी में तो पूरी झोपडी ही उड़ जाती ये तेरी ही कृपा है कि अभी भी हमारे पास सर ढंकने को जगह है निश्चित ही ये मेरी पूजा का फल है।

काबिलियत की पहचान

Short Motivational Story in Hindi : किसी जंगल में एक बहुत बड़ा तालाब था तालाब के पास एक बागीचा था,

जिसमें पेड़ पौधे लगे थे दूर दूर से लोग वहाँ आते और बागीचे की तारीफ करते।

गुलाब के पेड़ पे लगा पत्ता हर रोज लोगों को आते-जाते और फूलों की तारीफ करते देखता,

उसे लगता एक दिन कोई उसकी भी तारीफ करे, पर जब काफी दिन बीत जाने के बाद भी किसी ने उसकी तारीफ नहीं की तो दो काफी हीन महसूस करने लगा।

उसके अन्दर तरह-तरह के विचार आने लगे सभी लोग गुलाब और बाकी फूलों की तारीफ करते नहीं थकते पर मुझे कोई देखता तक नहीं शायद मेरा जीवन किसी काम का नहीं।

कहाँ ये खूबसूरत फूल और कहाँ मैं और ऐसे विचार सोच कर वो पत्ता काफी उदास रहने लगा।

दिन यूँही बीत रहे थे कि एक दिन जंगल में बड़ी जोर-जोर से हवा चलने लगी और देखते-देखते उसने आंधी का रूप ले लिया बागीचे के पेड़-पौधे तहस-नहस होने लगे,

काबिलियत की पहचान

देखते-देखते सभी फूल ज़मीन पर गिर गए, पत्ता भी अपनी शाख से अलग हो गया और उड़ते-उड़ते तालाब में जा गिरा।

पत्ते ने देखा कि कुछ ही दूर पर एक चींटी हवा के झोंको से तालाब में गिरी थी और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी।

चींटी प्रयास करते-करते काफी थक चुकी थी और उसे अपनी मृत्यु तय लग रही थी कि तभी पत्ते ने उसे आवाज़ दी, घबराओ नहीं,

आओ में तुम्हारी मदद कर देता हूँ और ऐसा कहते हुए अपने उपर बैठा लिया,

आंधी रुकते रुकते पत्ता तालाब के एक छोर पर पहुँच गया। चींटी किनारे पर पहुँच कर बहुत खुश हो गयीं और बोली आपने मेरी जान बचा कर बहुत बड़ा उपकार किया है,

आप महान हैं, आपका बहुत धन्यवाद !

यह सुनकर वह भावुक हो गया और बोला,” धन्यवाद तो मुझे करना चाहिए,

क्योंकि तुम्हारी वजह से पहली बार मेरा सामना मेरी काबिलियत से हुआ, जिससे मैं अनजान था।

भागो धरती फट रही है

किसी जंगल में एक गधा बरगद के नीचे लेट कर आराम कर रहा था।

लेटे-लेटे उसके मन में बुरे ख़याल आने लगे , उसने सोचा ,अगर धरती फट गयी तो मेरा क्या होगा ?

अभी उसने सोचा ही था कि उसे धमाके की आवाज़ आयी। वह चीखने लगा भागो-भागो धरती फट रही है।

अपनी जान बचाओ…..”  और ऐसा कहते हुए वह पागलों की तरह भागने लगा।

उसे भागता देख दूसरे गधे ने उससे पूछा , अरे क्या हुआ भाई , तुम इस तरह भागे क्यों जा रहे हो ?

अरे तुम भी भागो…अपनी जान बचाओ, धरती फट रही है…, ऐसा चीखते हुए वह भागता रहा।

यह सुन कर दूसरा गधा  भी डर गया और उसके साथ भागने लगा।

अब तो वह दोनों एक साथ चिल्ला रहे थे- भागो-भागो धरती फट रही है।

देखते-देखते सैकड़ों गधे इस बात को दोहराते हुए उसी दिशा में भागने लगे।

गधों को इस तरह भागता देख , दूसरे जानवर भी डर गए।

धरती फटने की खबर जंगल में लगी आग की तरह फैलने लगी ,

और जल्द ही सबको पता चल गया की धरती फट रही है।

चारो तरफ जानवरों की चीख-पुकार मच गयी सभी उस झुण्ड में भागने लगे।

जंगल में फैले इस हल्ले को सुनकर शेर बाहर निकला ,

उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ  कि सारे जानवर एक ही दिशा में भागे जा रहे हैं।

वह सबके सामने आया और बोला , ये क्या पागलपन है ? कहाँ भागे जा रहे हो तुम सब ?

भागो धरती फट रही है

धरती फट रही है ! , आप भी अपनी जान बचाइए – बन्दर बोला।

किसने कहा ये सब ? शेर ने पूछा।

सब  एक दूसरे का मुंह देखने लगे, बन्दर बोला, मुझे ये बात चीते ने बतायी थी।

 चीते ने कहा , मैंने तो पक्षियों से सुना था। ऐसे करते करते पता चला कि ये बात सबसे पहले गधे ने बताई थी।

गधे को बुलाया गया।

शेर ने पूछा – तुम्हे कैसे पता चला कि धरती फट रही है ?

मैंने अपने कानो से धरती के फटने की आवाज़ सुनी, गधे ने डरते हुए उत्तर दिया।

ठीक है मुझे उस जगह ले चलो और दिखाओ कि धरती फट रही बरगद के पास पहुच कर गधा बोला ,

मैं यहीं सो रहा था कि तभी जोर से धरती फटने की आवाज़ आई, मैंने उड़ती हुई धूल देखी और भागने लगा।

शेर ने आस पास जा कर देखा और सारा मामला समझ गया। उसने बोला , येधा महामूर्ख है ,

दरअसल पास ही में नारियल का एक ऊँचा पेड़ है , और तेज हवा चलने से उस पर लगा नारियल नीचे पत्थर पर गिर पड़ा ,

पत्थर सरकने से आस-पास धूल उड़ने लगी और ये गधा ना जाने कैसे इसे धरती फटने की बात समझ बैठा।

शेर ने बोलना जारी रखा , पर भाइयों ये तो गधा है , पर क्या आपके पास भी अपना दिमाग नहीं है ,

अपने घर जाइये और आइन्दा से किसी अफवाह पर यकीन करने से पहले दस बार सोचना।

बड़ा सोचो

एक  बेरोजगार युवक  नौकरी की तलाश में दूसरे शहर जाने के लिए  रेलगाड़ी से  सफ़र कर रहा था।

घर में कभी-कभार ही सब्जी बनती थी, इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटीयां ही रखी थी।

आधा रास्ता गुजर जाने के बाद उसे भूख लगने लगी, और वह टिफिन से रोटीयां निकाल कर खाने लगा।

उसके खाने का तरीका कुछ अजीब था , वह रोटी का  एक टुकड़ा लेता और उसे टिफिन के अन्दर कुछ ऐसे डालता मानो रोटी के साथ कुछ और भी खा रहा हो,

जबकि उसके पास तो सिर्फ रोटीयां थीं! उसकी इस हरकत को आस पास के और दूसरे यात्री देख कर हैरान थे।

वह युवक हर बार रोटी का एक टुकड़ा लेता और झूठमूठ का टिफिन में डालता और खाता।

बड़ा सोचो

सभी सोच रहे थे कि आखिर वह युवक ऐसा क्यों कर रहा था?

आखिरकार  एक व्यक्ति से रहा नहीं गया और उसने उससे पूछ ही लिया की भैया तुम ऐसा क्यों कर रहे हो?

तुम्हारे पास सब्जी तो है ही नहीं फिर रोटी के टुकड़े को हर बार खाली टिफिन में डालकर ऐसे खा रहे हो मानो उसमे सब्जी हो।

तब युवक  ने जवाब दिया, “भैया , इस खाली ढक्कन में सब्जी नहीं है लेकिन मै अपने मन में यह सोच कर खा रहा हू की इसमें बहुत सारा आचार है,  मै आचार के साथ रोटी खा रहा हूं।

फिर व्यक्ति ने पूछा , खाली ढक्कन में आचार सोच कर सूखी रोटी को खा रहे हो तो क्या तुम्हे आचार का स्वाद आ रहा है ?

हाँ, बिलकुल आ रहा है।

उसकी इस बात को आसपास के यात्रियों ने भी सुना, और उन्ही में से एक व्यक्ति बोला ,

“जब सोचना ही था तो तुम आचार की जगह पर मटर-पनीर सोचते तुम्हे इनका स्वाद मिल जाता।

तुम्हारे कहने के मुताबिक तुमने आचार सोचा तो आचार का स्वाद आया तो और स्वादिष्ट चीजों के बारे में सोचते तो उनका स्वाद आता।

सोचना ही था तो भला  छोटा क्यों सोचे तुम्हे तो बड़ा सोचना चाहिए था।

 

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