70+ Short Moral Stories in Hindi for Class 1 to 5

Hindi Stories की इस सीरीज में Short Moral Story in Hindi कहानियों की एक सूची तैयार की गयी है इन कहानियों को पढ़कर बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

Short Moral Story Hindi

Table of Contents

Short Moral Stories in Hindi for Kids


1. स्वार्थी जमींदार – Hindi Short Moral Story

किसी किसान के बाग में शरीफे का एक पेड़ था। उस पेड़ पर बहुत ही स्वादिष्ट फल लगते थे।

एक दिन वह एक जमींदार के पास उसे खुश करने के लिए कुछ शरीफे ले गया। जमींदार ने शरीफे खाए तो बहुत खुश हुआ।

फल उसे इतने पसन्द आए कि उसने इरादा कर लिया कि वह उस पेड़ को हथिया लेगा।

उसने अपने आदमी भेज कर वह पेड़ किसान के खेत से उखड़वाया और अपने खेतों में लगवा लिया।

चूंकि बेचारा किसान गरीब था, इसलिए कुछ बोल नहीं सका, लेकिन पेड़ उखाड़ने के दौरान उसकी जड़ों को बहुत नुकसान पहुंचा।

इसलिए जब नई जगह पर उस पेड़ को लगाया गया तो वह जड़ नहीं पकड़ सका।

पेड़ धीरे-धीरे सूख बरबाद हो गया। जब किसान को इस बात का पता चला तो वह उदास हो गया और धीमी आवाज में बोला- स्वार्थ का यही फल होता है।

अगर वह पेड़ को उखड़वाता नहीं तो आज भी उसमें स्वादिष्ट फल लगते और हम दोनों को मिलते रहते।

Moral – स्वार्थी लोग हमेशा दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं।

2. शिकारी शिकार बन गया – Hindi Short Stories With Moral

एक बार एक शिकारी किसी घने जंगल से होकर गुजर रहा था। उसके पास बंदूक भी थी। जब वह जंगल के अंदर गया तो उसने पेड़ की एक डाल पर एक कबूतर बैठा देखा।

उसने अपनी बंदूक से कबूतर का निशाना लिया और बंदूक चलने ही वाला था कि पीछे से एक सांप आया और उसे डस लिया। शिकारी अपने शिकार पर गोली नहीं चला सका और नीचे गिर पड़ा।

सांप का जहर तेज था कि उसका शरीर नीला पड़ने लगा। वह जमीन पर लोटने लगा। उसके मुंह से झाग निकलने लगे।

मरते समय शिकारी ने सोचा- सांप ने मेरे साथ वही किया जो मैं उस मासूम कबूतर के साथ करना चाहता था।

Moral – दूसरों का बुरा करने वाला खुद ही मुसीबत में फंसता है।

3. बुद्धिमान किसान – Hindi Short Moral Story

एक दिन एक किसान मेले से अपने घर लौट रहा था। उसने मेले से एक भैंस ने खरीदी थी। जब वह जंगल से होकर जा रहा था तभी एक डाकू उसका रास्ता रोक लिया।

उसके हाथ में एक मोटा-सा डंडा था। वह बोला – तुम्हारे पास जो कुछ भी है, वह सब मुझे दे दो। किसान डर गया उसने अपने सारे पैसे डाकू को दे दिए।

तब डाकू बोला – अब मुझे तुम्हारी भैंस भी चाहिए। यह सुनकर किसान ने भैंस की रस्सी भी भी डाकू के हाथ में दे दी।

फिर किसान बोला – मेरे पास जो कुछ भी था, मैंने तुम्हें दे दिया। अब आप मुझे अपना डंडा दे दीजिए।

डाकू ने पूछा – लेकिन तुम्हें इसकी क्या जरूरत है ? वह बोला – मैं यह डंडा अपनी बीवी को दूंगा ।

यह डंडा देखकर वह बड़ी खुश होगी कि मैं मेले से उसके लिए कुछ तो लाया हूँ। डाकू ने डंडा किसान को दे दिया। किसान ने जल्दी से डाकू को जोर-जोर से मारना शुरू कर दिया।

डाकू पैसे और भैंस छोड़कर वहाँ से भाग गया। इस तरह से बुद्धिमान किसान ने अपना सामान डाकू से बचा लिया। 

4. बुद्धिमान यात्री – Hindi Short Moral Story

एक यात्री घोड़े पर बैठे हुए कहीं जा रहा था। जंगल को पार करते समय उसे थकान महसूस होने लगी। इसलिए वह घोड़े से नीचे उतरा और एक पेड़ के नीचे लेट गया।

जल्दी ही उसे नींद आ गई। उसका घोड़ा वहीं पास में चरने लगा। कुछ घंटों बाद जब वह उठा तो उसने देखा कि उसका घोड़ा गायब है।

उसने उसे वहाँ चारों ओर ढूँढा, लेकिन उसे घोड़ा नहीं मिला।

तब उसने अपना मोटा डंडा उठाया और घोड़ा चुराने वाले को ढूँढने लगा। घोड़े को ढूँढते-ढूँढते वह पास के गाँव में पहुँच गया।

वहाँ पर उसने अपना डंडा घुमाते हुए चिल्लाकर कहा, मेरा घोड़ा किसने चुराया है ?

जिसने भी ये किया है वह मेरा घोड़ा लौटा दे, वरना मैं वही करूँगा, जो मैंने पिछली बार किया था। चोर उसी गाँव का था।

उसकी बात सुनकर चोर डर गया और वह तुरंत घोडे को ले आया।

फिर वह यात्री के सामने हाथ जोड़कर बोला, मुझे माफ कर दो। ये रहा तुम्हारा घोड़ा। लेकिन ये तो बताओ कि जब पिछली बार तुम्हारा घोड़ा चोरी हुआ था,

तब तुमने क्या किया था?  यात्री बोला, कुछ भी नहीं! मैंने नया घोड़ा खरीद लिया था। ये कहकर वह जोर जोर से हँसने लगा। 

5. घमंडी गधा – Hindi Short Moral Story

एक दिन एक जौहरी और एक लौह व्यापारी अपने-अपने गधों पर सवा होकर कहीं जा रहे थे।

जौहरी के गधे की पीठ पर रेशम का कपड़ा था और वह सोने की मुद्राओं और कीमती जवाहरातों से भरे हुए थैले ढो रहा था।

वहीं लौह व्यापारी का गधा कुछ लोहे की छड़ें ढो रहा था। जौहरी के गधे को अपनी पीठ पर कीमती सामान होने की वजह से घमंड हो गया। उसकी घमंडपूर्ण बातें दूसरा गधा सुन रहा था।

जब वे जंगल से गुजर रहे थे, डाकुओं के एक गिरोह ने उन्हें रोक लिया। डाकुओं को देखकर जौहरी एवं व्यापारी अपने-अपने गधों को छोड़कर भाग गए। डाकू सामान को देखने लगे।

उन्हें लौह व्यापारी के गधे की पीठ पर रखे सामान में कुछ भी कीमती सामान नहीं मिला। इसलिए उन्होंने उसे छोड़ दिया।

जौहरी के गधे की पीठ पर कीमती सामान देखकर वे उस पर लदे थैलों से सामान निकालने लगे।

जब गधा थोड़ा सा भी विरोध करता, वे उसे खूब जोर-जोर से मारते। इस तरह उस घमंडी गधे को सबक मिल गया कि घमंड करना ठीक नहीं है। घमंडी लोगों को हमेशा नीचा दिखना पड़ता है।

6. कड़वा सच – Short Moral Stories in Hindi for Class 1,2,3

शेर के जन्मदिन के मौके पर दावत की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। सभी पशु-पक्षी सज-धजकर ठीक समय पर समारोह में पहुँचे।

समारोह में गधे को छोड़कर सभी आए थे। शेर ने केक काटा और सभी ने जन्मदिन का गीत गाया।

उसके बाद सभी ने दावत का मज़ा लिया। शेर को गधे के आने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन वह नहीं आया। तब शेर ने सोचा।

कहीं  वह जरूरी काम की वजह से नहीं आया होगा। अगले दिन जब शेर गधे से मिला तो उसने गधे से इस बारे में पूछा। गधा बोला, मुझे समारोह आदि में जाना अच्छा नहीं लगता है।

मुझे घर पर रहकर आराम करना ज्यादा पंसद है। गधे ने शेर से सच ही कहा था, जो कि कड़वा था। गधे की बात सुनकर शेर को बहुत गुस्सा आया और उसने गधे को जंगल से बाहर निकाल दिया।

उसकी यह दशा कड़वा सच कहने के कारण हुई। किसी ने ठीक ही कहा है कि सच हमेशा कड़वा होता है। 

7. अपनी मदद खुद ही करते हैं – Short Moral Story in Hindi

एक बार एक अमीर व्यापारी व्यापार के उद्देश्य से पानी के जहाज से अपने शहर से दूसरे शहर जा रहा था। वह अपने साथ कीमती सोने के सिक्कों से भरा एक संदूक भी ले जा रहा था।

रास्ते में तूफान आ गया। जहाज इधर-उधर हिलोरें लेने लगा। कुछ घंटों के बाद तूफान तो थम गया, लेकिन जहाज में एक छेद हो गया। अब जहाज में पानी भरने लगा।

यह देखकर कुछ लोग जहाज में ही डूब गए और कुछ तैरकर किनारे पहुँच गए। यह देखकर व्यापारी ने प्रार्थना की, हे भगवान मेरा जीवन बचा लो।

एक आदमी व्यापारी के पास गया और बोला, कूदो और तैरकर समुद्र के किनारे पहुँचो। भगवान उसकी मदद करता है जो अपनी मदद खुद करते है,  लेकिन व्यापारी ने उसकी एक न सुनी।

वह जहाज में ही रहा। थोड़ी देर में जहाज डूब गया और वह व्यापारी भी।

8. मुर्गी और बिल्ली – Moral Hindi Short Story

एक समय की बात है एक बहुत चालाक मुर्गी थी। एक दिन वह बीमार पड़ गई। तभी एक बिल्ली उसे देखने आई।

उसके घर में घुसकर बिल्ली बोली, मेरी दोस्त, क्या हुआ तुम्हें ? क्या मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकती हूँ ?

तुम्हें कुछ चाहिए हो तो बताओ, मैं ला दूँगी। मुर्गी ने बिल्ली की प्यार भरी बातें सुनीं। उसे खतरे का आभास हुआ। वह बोली, हाँ, बिलकुल।

मेरे लिए एक काम कर दो। यहाँ से चली जाओ। मैं बीमार हूँ और किसी अनचाहे मेहमान को बुलाकर कोई खतरा नहीं उठाना चाहती।

9. कमी ने बचाई जान – Moral Hindi Short Story

एक बहुत बड़ा जंगल था। वहाँ पर अलग – अलग तरह के पेड़ थे, उन्हीं पेड़ों में एक ऐसा पेड़ भी था, जो देखने में भद्दा लगता था।

दूसरे पेड़ उसे छेड़ते हुए कहते, तुम बड़े भद्दे लगते हो। तुम्हें तो देखने का भी मन नहीं करता। हमको देखो हम कितने सुंदर दिखते हैं।

बेचारा पेड़ सोचने लगा, न जाने क्यों, भगवान ने मुझे इतना भद्दा बनाया है ?

एक दिन एक लकड़हारा वहाँ आया। उसने भद्दे पेड़ को देखकर सोचा, यह पेड़ मेरे किसी काम का नहीं है। इसका तना तो फूला हुआ है। मुझे सीधे तने वाले पेड़ चाहिए।

यह सोचकर लकड़हारे ने भद्दे पेड़ को छोड़कर आप-पास के बाकी सभी पेड़ काट डाले। अब वह पेड़ सोचने लगा, ईश्वर जो करता है अच्छे के लिए करता है। मेरे भद्देपन ने आज मुझे बचा लिया।

10. बेवकूफ दोस्त – Short Moral Story in Hindi

Short Moral Story in Hindi : चूहा और मेंढक बड़े अच्छे दोस्त थे। वे अपना समय एक दूसरे के साथ बिताते थे।

जब चूहा खाने की तलाश में जाता तो मेंढक उदास हो जाता और उसे उसकी कमी महसूस होती।

इसी तरह जब मेंढक तालाब में जाता तो चूहे को उसकी बहुत याद आती। इसलिए उन्होंने एक योजना बनाई।

उन्होंने एक रस्सी ली और उसका एक किनारा मेंढक के पैर से बाँध दिया और दूसरा किनारा चूहे के पैर से बाँधा। 

अब जब भी उन्हें एक-दूसरे की कमी महसूस होती, वे रस्सी खींच लेते। इससे दूसरा दोस्त इशारा समझकर तुरंत आ जाता। 

एक दिन मेंढक खाने की तलाश में पानी के अन्दर गया।

वह भूल गया था कि उसका पैर चूहे के पैर के साथ बँधा हुआ है। वह पानी में बहुत अंदर तक चला गया, बेचारा चूहा भी पानी के अन्दर खिंचा चला गया और डूबकर मर गया।

तभी एक बाज ने मरे हुए चूहे को देखा। उसको खाने के लिए नीचे आया और अपनी चोंच में चूहे को दबाकर उड़ गया।

बाज ने देखा कि चूहे के साथ मेंढक भी है। फिर उसने दोनों को खा लिया।  इस तरह अपनी बेवकूफी के कारण दोनों दोस्त मारे गए।

11. बेईमान लकड़हारा – Hindi Short Story for Kids

Short Moral Story in Hindi : एक बार कुछ शिकारी एक लोमड़ी का पीछा कर रहे थे। लोमड़ी बहुत तेज़ दौड़ी और शिकारियों की नज़रों से दूर हो गई।

तभी लोमड़ी ने एक घर देखा। उसने जल्दी से उस घर का दरवाज़ा खटखटाया।

वह एक लक्कड़हारे का घर था। लक्कड़हारे से लोमड़ी ने अपनी जान बचाने की मदद मांगी। वह मान गया और उसे अपने घर में छुपा लिया। जल्दी ही शिकारी वहाँ आ गए और लोमड़ी के बारे में पूछने लगे।

हालांकि लक्कड़हारे ने उन्हें मुँह से कुछ नहीं कहा, लेकिन उसने इशारे से उन्हें लोमड़ी के बारे में बताने की कोशिश की, शिकारी उसका इशारा नहीं समझ पाये और वहाँ से चले गए।

जब लोमड़ी वहाँ से जाने लगी तो लक्कड़हारा बोला – मुझे धन्यवाद नहीं बोलोगी ? लोमड़ी ने जवाब दिया –  किस लिए तुम्हारा धन्यवाद करू ? उन शब्दों के लिए जो तुमने नहीं कहे या उन शब्दों के लिए जो वो लोग समझ नहीं पाए?

12. चालाक बुढ़िया

Short Moral Story in Hindi : एक गाँव में एक बुढ़िया रहती थी। एक दुर्घटना में उसकी आँखें सूज गईं।

उसने गाँव के एक डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने, उसकी आँखें जाँचने के बाद कहा-तुम्हारी आँखें बिल्कुल ठीक हो जाएगी।

लेकिन, जब तक मैं तुम्हारा इलाज – करूँगा, तब तक तुम्हारी आँखें बंद रहनी चाहिए। इसके अलावा पैसे भी ज्यादा लूंगा।

बुढ़िया मान गई। इलाज के दौरान उसने अपनी आँखें बंद रखी।

इसी बीच उस डॉक्टर ने बुढ़िया के घर का सारा सामान चुरा लिया। इलाज के बाद बुढ़िया ने आँखें खोलीं, तो अपने घर का सारा सामान गायब पाया। उसने डॉक्टर को फीस देने से मना कर दिया।

तब वे दोनों कोर्ट गए और सारी कहानी जज को सुनाई। बुढ़िया ने जज से कहा – मैं इसे फीस क्यों दूं ?  इलाज से पहले मैं अपने घर का सारा सामान देख सकती थी, पर अब मुझे कोई सामान नहीं दिखाई देता।

जज ने बुढ़िया के पक्ष में ही फैसला किया।  डॉक्टर ने चुपचाप इस फेसले को मान लिया, क्योंकि उसने बुढ़िया के साथ धोखा किया था।

व्यापारी का पतन और उदय

13. स्वार्थी बकरी – Moral Hindi Short Story

Short Moral Story in Hindi : एक दिन एक बैल के पीछे एक शेर पड़ गया। काफी देर तक बैल भागता रहा और आखिर उसे एक गुफा दिखाई दी वह गुफा में घुस गया। गुफा में एक बकरी रहती थी।

उसने बैल को गुफा से बाहर निकलने को कही और सींगों से उसे बाहर की ओर धकेलने लगी। बैल बोला, एक शेर मेरा पीछा कर रहा है और मैंने उससे बचने के लिए यहाँ छुप गया हूँ।

जैसे ही वह निकल जाएगा, मैं भी यहाँ से चला जाऊंगा। बकरी ने उसकी एक नहीं सुनी और उसे सींग मारते हुए बोली, मैं कुछ नहीं जानती, बस तुम यहाँ से निकल जाओ।

बैल जब बकरी को समझाते – समझाते थक गया तो बोला, मैं तुम्हारी बदतमीजी बर्दास्त कर रहा हूँ तो यह मत समझना कि मैं तुमसे डरता हूँ। इस शेर को यहाँ से निकल जाने दो, उसके बाद तुम्हें बताऊंगा कि मैं कितना बड़ा और ताकतवर हूँ।

शिक्षा: मुसीबत के समय दूसरों की मदद करनी चाहिए, न कि उन्हें परेशान करना चाहिए।

14. बंदर राजा – Hindi Short Story for Kids

Short Moral Story in Hindi : एक बार जंगल में राजा चुने जाने का चुनाव हुआ। चुनाव के लिए सभी जानवरों ने अपनी – अपनी प्रतिभा (Talent) दिखाई और आखिर में बंदर का नाच सब जानवरों को पसंद आया।

अब सबने एकमत से फैसला करके बंदर को ही अपना राजा बना लिया लेकिन लोमड़ी को बंदर का राजा बनना अच्छा नहीं लगा, इसलिए वह उसे नीचा दिखाने के लिए मौका ढूढ़ने लगी।

एक दिन उसे मौका मिल ही गया। उसने जंगल में किसी शिकारी द्वारा छोड़ा गया फंदा देखा। उसमें थोड़ी – सी खाने की वस्तुएँ रखी थीं।

लोमड़ी बंदर से बोली, राजा मैंने आपको भेंट करने के लिए कुछ खाने की चीजें रखी हैं। आप इन्हें खाएंगे तो मुझे खुशी होगी।

बंदर ने जैसे ही खाने की चीजें देखीं, वह तुरंत उनकी ओर झपटा और फंदे में फँस गया।

लोमड़ी ने सभी जानवरों को बुलाकर फंदे में फँसा बंदर दिखाते हुए कहा, यह बंदर जब अपनी रक्षा नहीं कर सकता तो हमारी रक्षा कैसे करेगा ? यह राजा बनने के काबिल नहीं है।

शिक्षा : हमें हर काम अपनी समझ से करना चाहिए।

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15. शेर और तीन बैल 

Short Moral Story in Hindi : एक समय की बात है। तीन बैल आपस में बहुत अच्छे दोस्त थे। वे साथ मिलकर घास चरने जाते और हर चीज आपस में बाँटते थे।

एक शेर काफी दिनों से उन तीनों के पीछे पड़ा था, लेकिन वह जानता था कि जब तक ये तीनों एक साथ हैं, तब तक वह उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

शेर ने उन तीनों को एक-दूसरे से अलग करने की चाल चली। उसने बैलों के बारे में अफवाहें उड़ानी शुरू कर दीं। अफवाहें सुन सुनकर उन तीनों के बीच गलतफहमी पैदा हो गई।

धीरे-धीरे वे एक-दूसरे से जलने लगे। आखिरकार एक दिन उनमें झगड़ा हो गया और वे अलग-अलग रहने लगे।

शेर के लिए यह बहुत अच्छा मौका था। उसने इसका पूरा फायदा उठाया और एक-एक करके तीनों को उसने मार डाला और खा गया।

शिक्षा: एकता में ही शक्ति है।

16. केकड़ा और उसकी माँ – Short Moral Story in Hindi

Short Moral Story in Hindi : एक दिन केकड़े की माँ उसे लेकर समुद्र के किनारे पर घुमाने ले गई। जब वे दोनों चल रहे थे, तो माँ ने कहा, अरे बेटा – तुम चलते समय अपने पैर अंदर की ओर क्यों मोड़ लेते हो ?

केकड़े का बच्चा बोला, माँ, तुम चलकर दिखाओ ना। केकड़े की माँ यह जानकर बड़ी खुश हुई कि उसका बेटा सीखना चाहता है। मैं दिखाती हूँ, मेरे बेटे।

अब पीछे रहो और ध्यान से देखो, केकड़े की माँ बोली। इतना कहकर केकड़े की माँ ने अपनी एक टाँग खींची, उसका निचला हिस्सा बाहर की ओर मोड़ा और आगे बढ़ने का प्रयास किया।

जब उसने ऐसा किया तो उसका पैर उलझ गया और वह नाक के बल गिर पड़ी।

शिक्षा: जो काम आप खुद कर सकते, उसे दूसरों से करने को नहीं कहना चाहिए।

17. क्या अच्छा क्या बुरा

एक के गांव में एक किसान था। उसका कहना था कि भगवान जो भी करते हैं, हमारे भले के लिए करते हैं।

एक दिन उसका घोड़ा रस्सी तोड़कर जंगल की ओर भाग गया। इस पर उसके पड़ोसियों ने आकर दुख जताया लेकिन किसान शांत रहा।

दो दिन बाद किसान का घोड़ा वापस आ गया और अपने साथ तीन जंगली घोड़े और लाया।

लोगों ने आकर ख़ुशी प्रकट की लेकिन किसान शांत रहा। दो दिन बाद उन्हीं में से एक जंगली घोड़े की सवारी करते समय उसका लड़का गिर गया।

उसकी एक टांग टूट गयी। पड़ोसियों ने फिर आकर अफसोस प्रगट किया लेकिन किसान फिर भी शांत ही रहा।

अगले दिन राजा की सेना के लोग गांव आये और गांव के नौजवानों को जबरदस्ती सेना में भर्ती करने लगे। किसान का लड़का पैर टूटने की वजह से बच गया।

हममें से कोई नहीं जानता कि हमारे लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा ? इसलिए भगवान जो करते हैं, हमें उसे अपने लिए अच्छा ही मानना चाहिए।

सीख : हमेशा भगवान के फैसले को स्वीकार करना चाहिए। वे कभी किसी का बुरा नहीं करते।

18. भगवान का दोस्त – Hindi Short Stories for Kids

Short Moral Story in Hindi : बहुत तेज़ धुप थी। आसमान ही नहीं जमीन भी तप रही थी।

ऐसे में एक छोटा सा लड़का नंगे पांव फूल बेच रहा था। पैरों की जलन उसके चेहरे पर दिख रही थी। वहां से गुजर रहे एक सज्जन को लड़के पर दया आ गयी।

वे पास की जूतों की दुकान पर गए और वहां से एक जोड़ी जूते ले आए। लड़के को देकर उन्होंने कहा, लो इन्हें पहन लो।

जूते देखकर लड़का बहुत खुश हो गया। उसने झटपट जूते पहन लिए।

खुश होकर उसने उन सज्जन का हाथ पकड़ कर पूछा, क्या आप भगवान हो ? सज्जन चौककर बोले,  नहीं बेटा, में भगवान नहीं हूँ।

तो लड़का बोला, तो आप आप जरूर भगवान के दोस्त होंगे क्योंकि मैंने कल रात भगवान से प्रार्थना की थी।

धूप में मेरे पैर बहुत जलते हैं। मुझे जूते ले दीजिये और उन्होंने आपसे जूते भिजवा दिए।

लड़के की बात सुनकर सज्जन की आंखों में आंसू आ गए। वे भगवान को धन्यवाद देते हुए चल दिये।

सीख : हमें दूसरों की मदद करने का प्रयास करना चाहिए। न जाने हम कब ईश्वर के दोस्त बन जाएं।

19. बुद्धि मानी का फल

Short Moral Story in Hindi : एक  तालाब  में  बहुत से मेंढ़क रहा करते थे। मछली केकड़े आदि जीव एक साथ मिल-जुल कर रहा करते थे।  किसी को  कोई नुकसान नहीं पहुँचाता था।

एक दिन  समुदाय में बदलाव के लिए उनमें से कुछ मेढ़क एक राजा चाहते थे।

पर उनके जीवन में शान्ति ही शान्ति थी,  फिर भी वह सभी अपने लिए एक राजा नियुक्त करना चाहते थे, जो हर मेंढको के ऊपर नजर रखें और  समुदाय में  अनुशासन बना बनाये रखे।

मेंढकों ने प्रार्थना की  हे देवदूत ! हमें  एक राजा दीजिए। मेंढकों को इस प्रकार टर्राते देख देवदूत हँसने लगे और एक लकड़ी का बड़ा टुकड़ा तालाब में गिरा दिया।

सारे मेढ़क लकड़ी के नीचे दब गये। फिर भी  मेढक शान्त नहीं हुए और टर्र टर्र करने लगे  राजा की माँग  पर देवदूत ने एक सारस  को राजा नियुक्त कर दिया।

सारस  सभी मेंढकों पर नजर रखता जैसे ही कोई मेंढक ज्यादा उछल कूद करता , उसे खा जाता।

इस प्रकार एक- एक करके सारस  सारे  मेढ़क खा गया।

सीख :  जितना मिले उसी में खुश रहना चाहिए। बेकार की चीजों पर हमें अपने ज्यादा बुद्धिमानी नहीं दिखाना चाहिए नहीं तो मेंढकों जैसे हो जाएगा।

20. दादी की पेन्सिल – Hindi Short Story with Moral

Short Moral Story in Hindi : मोहन अपने कमरे में उदास बैठा था। उसका इंग्लिश का Exam बहुत खराब हुआ था। वह दुःखी था कि उसको बहुत कम नंबर मिलेंगे।

मोहन की दादी कमरे में आती हैं और मोहन को एक सुन्दर सी पेन्सिल गिफ्ट में देती हैं।

वह कहता है कि दादी मां मुझे ये पेन्सिल मत दो, मेरा Exam तो खराब हुआ है इसलिए मुझे ये गिफ्ट नहीं चाहिए।

दादी मां कहती हैं – बेटा, ये पेन्सिल भी एकदम तुम्हारी तरह है तुमको बहुत कुछ सिखाएगी।

देखो जब इस पेन्सिल को छीला जाता है तो इसे भी ऐसे ही दर्द होता है जैसे अभी तुमको हो रहा है।

लेकिन पेन्सिल छिलने के बाद पहले से अच्छी हो जाती है और इससे अच्छी लिखाई होती है। अब तुम भी आगे से बहुत मेहनत करोगे तो तुम भी पहले से ज्यादा होशियार और अच्छे बनोगे।

मोहन खुश होकर दादी की पेन्सिल रख लेता है।

सीख : पेन्सिल जब तक छिलती नहीं है तब तक उससे अच्छी लिखाई नहीं की जा सकती, वैसे ही इंसान को भी अच्छा बनने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है|

21. दर्जी और हाथी

Short Moral Story in Hindi : एक समय की बात है, एक गाँव के मंदिर में एक हाथी रहता था। वह हर रोज़ नदी में नहाया करता था। नदी में पानी से थोड़ी देर खेलता और फिर नहा कर मंदिर वापस आ जाता था।

लौटते समय वह एक दर्जी की दुकान पर रुकता था। दर्जी उसे प्यार से केला खिलाया करता था।

एक दिन दर्जी किसी काम से शहर गया हुआ था। दुकान पर दर्जी का बेटा बैठा था। हाथी आया और उसने केले के लिए अपनी सूँढ़ उसकी ओर बढ़ाई।

बेटे को शरारत सूझी। उसने हाथी की सूंड में सूई चुभो दी। हाथी दर्द से तिलमिलाकर चुपचाप वापस चला गया।

अगले दिन हाथी फिर नदी पर नहाने गया। लौटते समय दर्जी की दुकान पर रुका और केले के लिए सूँढ़ बढ़ाया। इस बार भी लड़के ने उसे सूई चुभो दी।

गुस्से में हाथी ने अपनी सूँढ़ में भरा हुआ कीचड़ का फव्वारा दर्जी के बेटे पर डाल दिया। उसी समय दर्जी वापस आ गया । सच्चाई जानकर दर्जी ने अपने लड़के को डाँटा।

यह हाथी हमारा मित्र है, उससे माफ़ी माँगो और फिर दर्जी ने हाथी को प्यार से अपने हाथों से केले खिलाए। हाथी वापस चला गया।

शिक्षा : दया अपने आप में ही एक गुण है।

22. खरगोश और उसके दोस्त

Short Moral Story in Hindi : एक जंगल में एक खरगोश रहता था। उसके बहुत सारे दोस्त थे। एक दिन खरगोश ने कुछ शिकारी कुत्तों की आवाज सुनी। वे जंगल की ओर आ रहे थे।

खरगोश बहुत डर गया। अपनी जान बचाने के लिए वह अपने दोस्तों के पास मदद मांगने गया।

घोड़े के पास पहुँचकर उसने सारी बात बताई और कहा, क्या आप मेरी मदद करेंगे ? कृपया मुझे अपनी पीठ पर बिठाकर यहाँ से ले चलिए।

घोड़े ने कहा, माफ़ करना भाई मुझे अभी बहुत काम है। खरगोश बैल के पास गया और बोला, क्या आप मेरी मदद करेंगे ?

आप अपने नुकीले सींघों से शिकारी कुत्तों को डरा देंगे ? बैल ने कहा कि उसे किसान की पत्नी के पास जाना है।

खरगोश भालू के पास गया। उसने भी बहाना बनाया। खरगोश ने बकरी के पास जाकर कहा, बहन, शिकारी कुत्तों से मुझे बचा लो।

बकरी बोली, मुझे उनसे बहुत डर लगता है । माफ़ करो, मैं जरा जल्दी में हूँ। तुम किसी और से मदद ले लो।

शिकारी कुत्ते बहुत पास आ चुके थे खरगोश ने अब भागना शुरु किया। सामने ही उसे एक बिल दिखाई दिया। उसमें छिपकर खरगोश ने अपनी जान बचाई।

शिक्षा : दूसरों पर निर्भर रहने की जगह खुद पर भरोसा करना चाहिए।

23. हिरण और शिकारी – Moral Hindi Short Story

Short Moral Story in Hindi : एक हिरण था। तालाब में पानी पीने गया। पानी पीते समय उसने पानी में अपनी परछाई देखी।

हिरण खुश होते हुए सोचने लगा, भगवान ने मुझे इतने सुंदर सींघ दिए हैं

काश! मेरे पैर भी इतने ही खूबसूरत होते। ये इतने पतले हैं कि मैं इन्हें देखकर दुखी हो जाता हूँ।

तभी एक शिकारी ने निशाना साध कर हिरण पर तीर छोड़ दिया।

हिरण ने अपने फुर्तीले पैरों से छलांग लगाई और दूर निकल गया। पर उसके सींग एक पेड़ में उलझ गयी।

हिरण ने बहुत जोर लगाया पर भागने में सफल नहीं हुआ। शिकारी ने उसे पकड़ लिया।

सीख : अपनी ताकत को पहचानें।

वेरी शॉर्ट स्टोरी इन हिंदी


24. कंजूस व्यक्ति

Short Moral Story in Hindi : एक दिन एक कंजूस व्यक्ति के दोस्त ने अपने दोस्त की कंजूसी की आदत छुड़ाने की सोची। 

वह उसे बाजार ले गया और बोला, प्यारे दोस्त, तुम क्या खाना पसंद करोगे ?

कंजूस बोला, भूख लगी है, चलो भोजन किया जाए। वे दोनों होटल में गए। कंजूस के दोस्त ने होटल के मालिक से पूछा, भोजन कैसा है ? होटल मालिक ने कहा,

मिठाई की तरह स्वादिष्ट कंजूस का दोस्त बोला, क्यों न भोजन की जगह पर कुछ मीठा खाया जाए। फिर वे एक शहद बेचने वाले की दुकान पर गए और पूछा

शहद कैसा है ? शहद बेचने वाला बोला, एकदम शुद्ध बिल्कुल पानी की तरह। कंजूस का दोस्त बोला, अरे, फिर यूँ ही पैसे क्यों व्यर्थ करें।

चलो, घर चलते हैं। मैं तुम्हें घर पर शुद्ध शहद के रूप में पानी दूंगा। फिर घर पहुँचकर कंजूस के दोस्त ने उसे पानी से भरा एक बर्तन थमा दिया। 

कंजूस समझ गया कि उसके दोस्त ने उसे सबक सिखाने के लिए ही ऐसा किया है। इसलिए उसने उस दिन से कंजूसी छोड़ दी।

25. घमंडी पेड़ – Short Moral Story in Hindi

Short Moral Story in Hindi : सड़क के किनारे एक बरगद और एक आम का पेड़ था। आम के पेड़ पर रसीले व मीठे आम लगते थे।

सभी लोग उसकी छाँव में आराम करने के साथ-साथ उसके मीठे फलों का भी आनंद लेते थे।

बूढ़े बरगद की तरफ कोई भी ध्यान नहीं देता था। धीरे-धीरे उस आम के पेड़ को अपने ऊपर बड़ा घमंड हो गया। वह बरगद के पेड़ से बोला,

हर व्यक्ति मेरे स्वादिष्ट फलों को ही पसंद करता है, तुम्हें तो कोई पूछता भी नहीं। बरगद का पेड़ बोला इतना घमंड अच्छा नहीं,

हर चीज़ का अपना एक विशेष महत्व और उपयोग होता है। इसके अगले ही दिन कुछ बच्चों ने उस घमंडी पेड़ के सारे आम तोड़ डाले और टहनियों एवं पत्तों को भी नुकसान पहुंचाया।

अब आम का पेड़ बड़ा ही भद्दा लग रहा था। आम के पेड़ की ऐसी स्थिति देखकर बरगद का पेड़ बोला, घमंड हमेशा मुसीबत में डालता है। तुम्हारी खूबसुरती ही तुम्हारे लिए मुसीबत बन गई, जबकि मैं अब भी यहाँ पर वैसे ही सुरक्षित खड़ा हूँ।

26. जैसे को तैसा

एक आम बेचने वाला घूम-घूम कर आम बेच रहा था। कुछ देर बाद वह एक पान की दुकान के पास पान खाने के लिए रुका।

उधर पान बेचने वाले ने आम देखे तो वह आम बेचने वाले से चिल्लाकर बोला, आम वाले ! अगर तुम्हें बुरा न लगे तो पान के बदले आम दोगे ?

आम बेचने वाला खुशी – खुशी तैयार हो गया। लेकिन पान बेचने वाला उसे धोखा देना चाहता था।

उसने एक छोटा-सा पान का पत्ता लिया और एक छोटा पान बनाकर आम बेचने वाले को दे दिया। आम बेचने वाले ने उससे चूना डालने को कहा लेकिन पान वाला बोला,

जाओ और पान को दीवार से रगड़ो। चूना अपने आप मिल जाएगा। वह समझ गया कि पान वाला उसे धोखा दे रहा है।

इसलिए उसने पान वाले को हरा आम दिया। 

हरा आम देखकर पान वाला बोला, मुझे पीला पका हुआ आम दो। उसकी बात सुनकर आम  बेचने वाला हँसते हुए बोला,

जाओ और पीले रंग की दीवार से आम को रगड़ो तो वह पीला हो जाएगा।

इस प्रकार आम बेचने वाले ने पान वाले के साथ वैसा ही व्यवहार किया, जैसा कि उसने किया था। इसे ही कहा जाता है- जैसे को तैसा।

27. चतुर मेमना – Hindi Short Story for Kids

एक भेड़िया भूखा था। वह भोजन की तलाश में जंगल में इधर से उधर भटक रहा था।

तभी उसे तालाब के किनारे से आती एक मेमने की आवाज सुनाई पड़ी। 

यह आवाज सुनकर उसका दिल खुशी से झूम उठा। उसने मन ही मन सोचा, चलो, अब ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।

क्यों न मैं इस मेमने को खाकर अपनी भूख शांत कर लू।

उसने जल्दी से तालाब के पास जाकर देखा कि एक पहाड़ी पर वह मेमना खड़ा है। उनके बीच काफी दूरी थी।

भेड़िये के वहाँ पहुँचने से पहले मेमना भाग भी नहीं सकता था।

इसलिए भेड़िये ने एक योजना बनाई और बोला, छोटे मेमने ! यहाँ नीचे चरागाह में आ जाओ। यहाँ पर चरने के लिए हरी-हरी घास है।

तुम यहाँ पर तालाब का ठंडा पानी भी पी सकते हो। चालाक मेमना भेड़िए की चालाकी भाँपकर बोला, सुझाव के लिए धन्यवाद भेड़िया भाई। 

लेकिन मैं यहीं पर ठीक हूँ। यहाँ मेरे लिए काफी घास है। इस तरह भेड़िए की योजना असफल हो गई।

28. जादुई हंस

एक बार एक गाँव में एक किसान रहता था। उसके पास जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा था।

इसलिए किसान अपनी जमीन से बहुत कम कमा सकता था। हालांकि, किसान के पास एक हंस था।

यह बहुत सुंदर हंस था और किसान के लिए कीमती था। क्योंकि भोर में हंस एक सुनहरा अंडा देता था।

किसान फिर सोने के अंडे को जौहरी के पास ले जाता और कुछ पैसे कमाता।

उसके लिए यह काफी था कि वह आराम से रह सके लेकिन किसान लालची था। यह हंस हर दिन सिर्फ एक अंडा देता है।

इससे मैं कभी अमीर नहीं बन पाऊंगा, उन्होंने सोचा क्या होगा अगर मैं हंस को मार दूं और उसके पेट से सारे सुनहरे अंडे निकाल लूं।

इस तरह मैं रातों-रात अमीर बन जाऊंगा।  वह एक बड़े घर और नौकरों के बारे में सपने देखने लगा। उसने सारी रात सपने देखे।

सुबह वह चाकू लेकर हंस के पास गया। उसने हंस को गर्दन से पकड़ लिया और उसका गला काट दिया।

जब हंस मर गया तो उसने अपना पेट खोल दिया और उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ। हंस के पेट के अंदर कोई अंडा नहीं था।

एक भी अंडा नहीं ! किसान फूट-फूट कर रोया। अपने लालच में, उसने सिर्फ अपना अंत किया था।

सीख : लालची लोगों को हमेशा वही मिलेगा जिसके वे हकदार हैं।

29. लकड़हरा और उसका मूर्ख लड़का – Moral Hindi Short Story

एक गाँव में एक लकड़हरा अपने बीवी और बेटे के साथ रहता था |

लकड़हरा बहुत ही मेहनती था रोज सुबह वह जंगल में लकड़ी काटने जाता था और जब तक अँधेरा ना हो जाये वापस नहीं आता था उसी लकड़ी को बेच के अपनी ज़िन्दगी गुजारता था |

लकड़हरा का बेटा मंद बुद्धि था लकड़हरा को पता था की उसके लड़के के पास कोई और धंधा करने के लिए पर्याप्त बुद्धि नहीं है इसलिए वह अपने लड़के को हर दिन अपने साथ ले जा के लकड़ी काटना सिखाता था |

एक दिन लकड़हरा की बीवी ने अपने बेटे से जंगल में अपने पिता के लिए कुछ खाना ले जाने को बोली|

दोपहर का समय हो गया था लकहरा पेड़ के छाओ में बैठ के भोजन करने लगा, उसने अपने लड़के से बोला की घर में ले जाने को कुछ लकड़ियाँ काट लो |

लड़के ने कुल्हाड़ी उठाया और निचे चला गया, तभी अचानक एक मधुमखी आकर पीठ पे बैठ गयी और काट लिया लकड़हारे ने जलन के मारे अपना हाथ लहराया फिर अपने गमछे से पीठ पे झटका लेकिन मधुमक्खी नहीं उड़ी |

फिर उसने अपने लड़के को बोला क्या तुम मेरी मदद करोगे इसे भगाने में लड़के ने पास में पड़ी एक पत्तेदार लकड़ी ले के मधुमखी को भागने लगा मगर वह नहीं भागा,

फिर उसने जो लकड़ी काटा था घर ले जाने को उसी से लकड़हरा के पीठ पे दे मारा जिससे मधुमखी तो मर गई मगर लकड़हरा बुरी तरह से जख्मी हो गया फिर बहुत दिनों बाद वो ठीक हुआ |

सीख : मूर्ख व्यक्ति पर कभी भरोसा न करें

30. बंदर और टोपी बेचने वाला

एक समय की बात है, एक टोपी बेचने वाला जंगल के रास्ते से एक गाँव में जा रहा था।

गर्मी का दिन था और दोपहर हो चली थी इसलिए उसने एक पेड़ के नीचे लेटना और कुछ समय के लिए आराम करने को सोचा जब तक कि सूरज डूब न जाए।

जब वह बेहद थका हुआ था तभी वह जल्दी सो गया।

जब वह सो रहा था तो कई बंदर पेड़ के नीचे आ गए और टोपी बेचने वाला का बैग खींच लिया।

उन्होंने बैग खोला और टोपियां अंदर पाईं। बंदरों ने टोपियां उठाईं और पेड़ों पर चढ़ गए।

टोपी  बेचने वाला कुछ समय बाद उठा और अपने खोले बैग और बंदरों को अपनी टोपी को पहने हुए पाया।

टोपी  बेचने वाला बहुत परेशान हो गया, वह पेड़ पर बंदरों पर चिल्लाया। बंदरों ने उस पर चिल्लाया।

इससे टोपी  बेचने वाला बहुत ज्यादा चिढ़ गया।

उसने जमीन से कुछ पत्थर उठाए और उन्हें बंदरों को मारने के लिए फेंक दिया। इस बार बंदरों ने अपने हाथों  में लिए फल  निचे फेंकने लगे।

बंदरों की इस हरकत पर टोपी  बेचने वाला हैरान रह गया। उसने सोचा। इस बार, उसने टोपी पहनकर जमीन पर फेंक दिया।

जो बंदर उसे देख रहे थे उन्होंने भी ठीक वैसा ही किया। उन्होंने सभी टोपियों को जमीन पर फेंक दिया।

टोपी बेचने वाले ने सभी टोपियों को इकठ्ठा किया, उन्हें अपने बैग में वापस भरा और वहां से चला गया।

सीख : बुद्धिमान बनो और तुम अपना रास्ता पाओगे।

शार्ट मोरल स्टोरी इन हिंदी


31. चिड़िया की परेशानी – Hindi Short Story for Kids

एक चिड़िया थी वह इधर उधर चहचहाती रहती | पर उस चिड़िया की एक आदत थी जो भी दिन में उसके साथ होता अच्छा या बुरा उतने पत्थर अपने पास पोटली में रख लेती और अकसर उन पत्थरो को पोटली से निकाल कर देखती,

अच्छे  पत्थरो को देखकर बीते दिनों में हुई अच्छी बातो को याद करके खुश होती | और खराब पत्थरो को देखकर दुखी होती |

ऐसा रोज़ करती | रोज़ पत्थर इकठा करने से उसकी पोटली दिन प्रतिदिन भारी होती जा रही थी |

थोड़े दिन बाद उसे भरी पोटली के साथ उड़ने में दिक्कत होने लगी । पर उसे समझ नहीं आ रहा था की वह उड़ क्यों नहीं पा रही |

कुछ समय और बीता, पोटली और भारी होती जा रही थी।अब तो उसका जमीन पर चलना भी मुश्किल हो रहा था |

और एक दिन ऐसा आया की वह खाने पीने का इंतज़ाम भी नहीं कर पाती अपने लिए और अपने पत्थरो के बोझ तले मर गयी।

सीख : दोस्तों ऐसा ही हमारे साथ होता है जब हम पुरानी बातो की पोटली अपने साथ रखते है ।अपने वर्तमान का मज़ा लेने की जगह पुरानी बातो को ही सोचने में लगे रहते हैं।

32. हाथी क्यों हारा

एक बार एक व्यक्ति, हाथी को रस्सी से बांध कर ले जा रहा था | एक दूसरा व्यक्ति इसे देख रहा था।

उसे बड़ा आश्चर्य हुआ की इतना बड़ा जानवर इस हलकी से रस्सी से बंधा जा रहा है दूसरे व्यक्ति ने हाथी के मालिक से पूछा – यह कैसे संभव है की इतना बड़ा जानवर एक हलकी सी रस्सी को नहीं तोड़ पा रहा और तुम्हारे पीछे – पीछे चल रहा है|

हाथी के मालिक ने बताया जब ये हाथी छोटे होते हैं तो इन्हें रस्सी से बांध दिया जाता है उस समय यह कोशिश करते है रस्सी तोड़ने की पर उसे तोड़ नहीं पाते |

बार बार कोशिश करने पर भी यह उस रस्सी को नहीं तोड़ पाते तो हाथी सोच लेते है की वह इस रस्सी को नही तोड़ सकते और बड़े होने पर कोशिश करना ही छोड़ देते है।

सीख : हम भी ऐसी बहुत सी गलत बातें अपने दिमाग में बैठा लेते हैं की हम नहीं कर सकते | और एक ऐसी ही रस्सी से अपने को बांध लेते हैं जो सच में होती ही नहीं है।

33. लालची बच्चा – Hindi Short Story for Kids

मोहन एक बहुत ही प्यारा बच्चा था। उसे सब बहुत ही प्यार करते थे। मोहन को टॉफियां बेहद पसंद थीं ।

जो कोई भी उससे मिलने उसके घर जाता उसके लिए टॉफियां जरूर ले जाता।

एक बार मोहन माँ के साथ अपनी मासी के घर गया। उसकी मासी को भी मालूम था कि मोहन को टॉफियां बहुत पसंद हैं तो उसकी मासी ने पहले से ही टॉफी का पूरा डिब्बा लाकर घर में रख दिया।

जैसे ही मोहन उसकी मासी के घर पहुंचा तो उसकी मासी ने वो टॉफ़ी का डिब्बा खोलकर उसके सामने रख दिया और कहा,

जितनी मर्जी खा ले। मोहन टॉफियां देखकर फूला नहीं समाया,

और झटपट उसने अपना हाथ डिब्बे में डाल दिया और मुट्ठी में जितनी भी टॉफियां समा सकती थी उसने पूरी लेनी चाही।

लेकिन डिब्बे का मुँह मुट्ठी के आकार से थोड़ा छोटा था तो उसकी मुट्ठी वहीं फँस गयी। तब उसकी मां ने उसे सलाह दी कि अगर वो मुठ्ठी से कुछ टॉफियां कम कर दे तो बात बन सकती है।

उसने माँ की बात सुनी और वैसा ही किया जैसा कि माँ ने बताया।

उसका टॉफियों से भरा हाथ आराम से डिब्बे के बाहर आ गया और उसने तब से लालच करना छोड़ दिया।

सीख : लालच बुरी बला है।

34. शेर का हिस्सा

एक जंगल था, जिसमे बहुत से जानवर रहते थे। जंगल में सभी जानवर अपना पेट भरने के लिए शिकार करते थे,

तो एक बार भेड़िया, लोमड़ी और शेर साथ साथ शिकार करने निकले। शेर इन सब का मुखिया था।

शिकार के लिए उन्हें ज्यादा भटकना नहीं पड़ा। जल्द ही उन्हें एक भैंस मिल गई।

तीनों ने हमला करके उस भैंस को मार डाला। फिर लोमड़ी ने भैंस के तीन टुकड़े कर डाले।

लेकिन तभी शेर ने दहाड़ते हुए कहा, सब शिकार से दूर हट जाओ ! यह मेरा भोजन है।

लोमड़ी और भेड़िया कुछ समझ नहीं पा रहे थे उन्होंने शेर से बहस शुरू कर दी। तभी शेर ने कहा कि शिकार करने में , मैं तुम्हारा मुखिया था तभी पहला हिस्सा मेरा है।

दूसरा हिस्सा भी मेरा ही है क्योंकि मुझे मेरे घर पर अपने परिवार का पेट भी भरना है।

और अगर तुम दोनों को तीसरा हिस्सा चाहिए तो मुझसे लड़ाई में जीत कर ये हिस्सा तुम ले जा सकते हो।

बस फिर क्या था लोमड़ी और भेड़िये ने बिना कुछ कहे सारे हिस्से शेर के हवाले कर दिए  और वहाँ से चले गए।

और इस तरह सारे हिस्से शेर के हो गए।

सीख : ताकत और दिमाग का इस्तेमाल करके किसी भी परिस्थिति में जीता जा सकता है।

35. सबक – Short Moral Story in Hindi

एक बार एक गांव में हरि नाम का व्यक्ति रहता था। उसके पास एक घोड़ा और एक गधा था।

हरि को किसी काम से कुछ सामान लेने बाजार जाना था। वह गधा और घोड़ा दोनो को ही लेकर बाजार गया।

हरि ने बाजार से सामान लिया और सारा समान गधे पर लाद दिया। सामान थोड़ा भारी था।

गधा थोड़ी दूर तक चला और वो थक गया उसने घोड़े से कहा, ये समान बहुत भारी है क्या आप थोड़ा बोझ अपनी पीठ पर रख लोगे ?

घोड़े ने जवाब दिया, ये मेरा काम नहीं है चुपचाप चलते रहो।

गधा चुप हो गया और कुछ दूर तक चलने के बाद उसके पैर लडखडाने लगे। फिर गधा वहीं पर गिर गया, उसके मुँह से गांज आने लगा।

हरि ने ये देख कर सारा सामान घोड़े की पीठ पर लाद दिया। तब घोड़े को लगा कि सच में बोझ तो बहुत भारी है।

अगर मैं उस समय ही इसका आधा समान ले लेता तो मुझे भी इतना भारी सामान नहीं उठाना पड़ता।

सीख : दूसरों के दुःख में हाथ बंटाने से हमारा दुःख भी कम हो जाता है।

36. बुरी संगत

गांव के एक किसान के खेत में रोजाना एक कौओ का झुंड आता था और फसल बर्बाद कर देता था।

एक दिन किसान की नजर उन कौओं के झुंड में पड़ गयी। किसान को बहुत गुस्सा आया और उसने कौओं को सबक सिखाने की सोचा।

अगले दिन किसान ने सुबह ही खेत में जाल बिछा दिया और उसके ऊपर कुछ अनाज के दाने डाल दिये।

कौए आए उन्होंन अनाज के दाने देखे और उसमें टूट पड़े। ज्योंही कौए दाना चुगने नीचे आए वैसे ही वो सब जाल में फंस गए।

कौओं के पंखों की फड़फड़ाने की आवाज सुनकर किसान आया और फँसे हुए कौओं को देख बहुत खुश हुआ।

पर जब उस किसान ने कौओ को गौर से देखा तो उसमें से एक मीठी आवाज आ रही थी वो आवाज एक कबूतर की थी जो कि कौओं की साथ में पड़ा हुआ था।

किसान के मन में बिल्कुल दया नहीं आयी और अपने कुत्तों को सभी के ऊपर छोड़ दिया। कुत्तों ने थोड़ी ही देर में सभी पक्षियों को मार दिया!

सीख : बुरी संगत का असर हमेशा बुरा ही होता है।

स्टोरी इन हिंदी फॉर चाइल्ड


37. डायनासौर – Moral Hindi Short Story

एक समय की बात है एक आदमी जिसका नाम बाला था, वह एक दिन नकली पंख लगाकर उड़ता हुआ दूर एक टापू पर गिरता है, जहां वह बहुत सारे डायनासोर देखता है।

वहां से बाला एक डायनासोर के अंडे को चुरा लेता है और उसको अपने पुराने घर में छुपा कर रख देता है।

कुछ दिनों बाद जब वह डायनासोर अंडे से बाहर आता है तो बाला उसके खाने के लिए गांव के लोगों के घरों से बकरी, मुर्गे, खरगोश आदि चुरा कर उसको चुप चाप खिलाता रहता है।

कुछ समय बाद लोगों को उस डायनासौर का पता लग जाता है और वह डायनासोर को बाहर निकाल देते हैं बाहर निकलते ही डायनासोर तबाही मचा देता है।

वह काफी सामान तोड़ देता है और फिर बाला गांव वालों के साथ मिलकर उसे वापस उसी टापू में छोड़ आते हैं।

38. कछुआ और चिड़िया

एक बार एक पेड़ के नीचे कछुआ आराम कर रहा था।

उसी पेड़ के ऊपर चिड़िया अपने बच्चों के साथ एक घोंसले में रहती थी कछुआ चिड़िया के घोंसले को देखकर उसकी बहुत बुराई करता है।

वो चिड़िया को कहता है कि तुमने ये कैसा घोंसला बनाया हुआ है जो इतने टूटे हुए तिनकों से बना है ना बारिश में बच पाता है और ना ही धूप में। और मुझे देखो मेरे पास मेरा कवच है जो मेरा घर है।

तो चिड़िया कहती है मानती हूं कि मेरा घर टूटे तिनकों से बना है लेकिन मेरे घर में मेरे साथ मेरा पूरा परिवार रहता है लेकिन तुम्हारे घर में तुम्हारे अलावा कोई नहीं रह सकता।

39. किसान और सांप – Short Moral Story in Hindi

एक बार एक किसान सर्दियों के दिनों में अपने खेतों में से गुज़र रहा था। तभी उसकी नज़र एक सांप पर पड़ी।

किसान को पता था की सांप बहुत ही खतरनाक है लेकिन फिर भी उसने उसे उठाया और अपनी टोकरी में रख लिया।

फिर उसके ऊपर उसने घास और पत्ते दाल दिए ताकि उसे कुछ गर्मी मिल जाए और वो ठण्ड की वजह से मरने से बच जाये।

जल्द ही सांप ठीक हो गया और उसने टोकरी से निकल कर उस किसान को काट लिया जिसने उसकी मदद की थी।

उसके जहर से तुरंत ही उसकी मौत हो गयी और मरते मरते उसने अपनी आखिरी साँस में यही कहा मुझसे ये सीख लो, की कभी किसी बुरे पर दया न करो।

सीख : कुछ लोग ऐसे होते हैं की जो अपने स्वभाव को कभी नहीं बदलते हैं, फिर चाहे हम उनके साथ कितना भी अच्छा व्यवहार करें। हमेशा उन लोगों से सावधान रहें और उनसे दूरी बनाए रखें जो सिर्फ अपने फायदे के बारे में सोचते हैं।

40. गर्म पानी में मेंढक

एक बार एक मेंढक गर्म पानी के बर्तन में गिर जाता है। वह वर्तन आग पर रखे होने की वजह से और गरम होने लगता है।

मेंढक बाहर निकलने की जगह अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करके उसमें बैठा रहता है की वो बाद में निकल जायेगा।

पर बर्तन का पानी उबलने लगता है और मेंढ़क से अब तापमान सहन नहीं होता है और वो बाहर निकलने की कोशिश में अंदर ही मर जाता है।

सीख : हम सबको परिस्थियों के अनुसार ढलना पड़ता है लेकिन कई बार जिन परिस्थियों में ज्यादा उलझने लगें तो उसमे सही समय पर बाहर निकलने में ही भलाई होती है।

41. शेर और चूहा – Hindi Short Story for Kids

एक बार एक शेर सो रहा होता है और एक चूहा उसके ऊपर चढ़ के उसकी नींद को ख़राब देता है।

शेर उसे गुस्से में पकड़ लेता है और उसे खाने लगता है पर चूहा उसे कहता है की, आप अगर मुझे छोड़ दोगे तो मैं आपकी किसी दिन मदद जरूर करूँगा।

यह सुन कर शेर हँसता है और उसे छोड़ देता है।

कुछ दिन बाद कुछ शिकारी शेर को जाल में कैद कर लेते हैं और शेर ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगता है उसकी आवाज़ चूहा पहचान लेता है और भागता हुआ उसके पास आता है और शेर के जाल को काट के शेर को आज़ाद कर देता है।

सीख : दया अपना इनाम ज़रूर लाती है, कोई इतना छोटा नहीं है कि वह किसी की मदद नहीं कर सकता।

42. बूढ़ा आदमी और बिल्ली

एक दिन एक बूढ़ा आदमी पार्क में घूम रहा था की तभी उसकी नज़र एक बिल्ली पर पड़ी जोकि कही फंस हुई थी।

तब उस बूढ़े आदमी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और बिल्ली को निकलने की कोशिश करने लगा, लेकिन बिल्ली ने उसे पंजा मारा और उसे पास नहीं आने दिया।

आदमी ने फिर से वैसा ही किया और बिल्ली ने फिर उसे पास नहीं आने दिया। अब आदमी बार बार ये करने करने लगा और बिल्ली भी उसे बार बार हटा रही थी।

पास खड़ा एक लड़का काफी देर से देख रहा था और वो चिल्ला पड़ा की आप बिल्ली को वहीँ रहने दो ये खुद ही निकल आएगी।

पर उस आदमी ने कोई ध्यान नहीं दिया और वो कोशिश करता रहा और आखिरकार बिल्ली बहार आ ही गयी।

अब बूढ़ा आदमी उस आदमी को बोला, ये इस बिल्ली की फितरत है की ये काटेगी, पंजा मारेगी, जैसा की इसे भगवान ने बनाया है।

पर ये हमारा फ़र्ज़ है कि इनको प्यार देना और इनकी देखभाल करना।

सीख : अपने आसपास सभी के साथ नैतिकता के साथ व्यवहार करें। आप सबसे ऐसा व्यवहार करें जैसा की आप दूसरों से खुद के लिए चाहते हो।

शार्ट मोरल स्टोरी इन हिंदी

43. यात्री और पेड़ – Short Moral Story in Hindi

गर्मियों की दोपहर को दो यात्री चले जा रहे थे, तभी उन्हें एक बहुत बड़ा और घना पेड़ दिखाई दिया।

वो दोनों उस पेड़ की छांव लेने के लिए बैठ गए।

आराम करते हुए उनमें से एक यात्री बोला ये पेड़ बहुत ही बेकार है। इसमें कोई भी फल नहीं लगा हुआ है, बहुत ही बेकार पेड़ है ये।

तभी पेड़ से एक आवाज़ आयी, इतना एहसान फरामोश ना बनो। इस पल मै तुम्हारे लिए बहुत ही फायदेमंद हूँ।

तम्हे कड़कती धूप से बचा रहा हूँ और तुम मुझे बेकार कहे जा रहे हो ?

सीख : प्रकृति की बनाई हुई हर चीज़ का कोई ना कोई महत्त्व है इस लिए किसी भी चीज़ को बेकार ना समझें।

44. ऊंट और उसका बच्चा

एक दिन एक ऊंट और उसका बच्चा एक दुसरे से बातें कर रहे थे। बच्चे ने माँ से सवाल पूछा, माँ, हमारे पीठ पर ये कूबड़ क्यों है ?

माँ ने जवाब दिया, हमारे पीठ पर कूबड़ पानी को इकठ्ठा करके रखने के लिए हैं ताकि हम रेगिस्तान में बिना पानी के भी जिन्दा रह सके।

बच्चे ने फिर से एक सवाल किया, और हमारे पैर का पंजा गोल-गोल क्यों है माँ ? माँ ने बताया, हमारे पंजे हमें रेतीले जगह पर आसानी से चलने में मदद करते ।

बच्चे ने कहा, अच्छा ठीक है लेकिन हमारे आँखों की पलकें इतनी लम्बी क्यों हैं ? माँ ने जवाब दिया,

ये हमें रेत के धुल और बालू से बचा कर रखते हैं ताकि ये हमारे आँखों में जा ना सके।

कुछ देर तक सोचने के बाद बच्चे ने कहा, अच्छा तो हमारे पीठ पर कूबड़ है पानी को रखने के लिए, गोल पंजे हैं,

ताकि हम रेत पर आसानी से चल सकें और लम्बी पलकें तूफ़ान के समय रेगिस्तान के धुल और रेत से हमारी आँखों को बचा कर रखते हैं

तो फिर हम इस चिड़ियाघर में क्या कर रहे हैं ?

माँ के पास अपने बच्चे के इस सवाल का कोई जवाब ना था।

सीख : आपकी ताकत, और ज्ञान सब बेकार हैं अगर आप सही जगह पर नहीं हैं।

45. अच्छा दोस्त – Moral Hindi Short Story

एक बार दो दोस्त रेगिस्तान से गुजर रहे थे। यात्रा के दौरान दोनों दोस्त अचानक बहस करने लगे, जिसकी वजह से एक दोस्त ने दूसरे दोस्त को थप्पड़ मार दिया।

जिसे थप्पड़ मारा गया, उसे चोट लगी लेकिन बिना कुछ कहे उसने रेत में लिखा, आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा।

वह तब तक रेगिस्तान में टहलते रहे जब तक उन्हें नहाने के लिए एक सरोवर न मिला। नहाते समय जिस दोस्त को थप्पड़ मारा गया था,

वह अचानक पानी में डूबने लगा लेकिन उसके दोस्त ने उसे बचा लिया। उसके के बाद उसने एक पत्थर पर लिखा,

आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई।

जिस दोस्त ने थप्पड़ मारा था और अपने दोस्त को पानी में डूबने से बचाया उसने पूछा,

मैंने जब तुम्हे चोट पहुँचाई, तब रेत में लिखा और जब जान बचाई, तो पत्थर में क्यों ?

दूसरे दोस्त ने जवाब दिया, जब कोई हमें ठेस पहुँचाता है तब हमें उसे रेत में लिखना चाहिए जहाँ माफ़ी की हवाएँ उसे मिटा सकती है।

लेकिन, जब कोई हमारे लिए कुछ अच्छा करता है तब हमें उसे पत्थर में लिखना चाहिए, जहाँ कोई हवा उसे मिटा नहीं सकता।

46. लालची शेर

गर्मी का दिन था और एक शेर भूख से तड़प रहा था। वह अपनी गुफा से बाहर आया और खाने की तलाश में इधर-उधर भटकने लगा।

उसे एक छोटा खरगोश दिखा। शेर ने खरगोश को पकड़ लिया।  शेर ने सोचा, यह मेरा पेट नहीं भर सकता।

उसी रास्ते से एक हिरन जा रहा था। हिरन को देखकर उसका लालच बढ़ गया।

वह सोचने लगा, इस खरगोश को खाने की बजाए उस हिरन को खाना चाहिए।

ऐसा सोचकर शेर ने खरगोश को जाने दिया। देखते ही देखते हिरन जंगल में गायब हो गया।

अब तो वह खरगोश भी वहाँ से जा चूका था। शेर अफ़सोस करने के बजाय और कुछ न कर सका।

सीख : हाथ में एक चीज हो तो उसे छोड़कर दूसरे  के पीछे नहीं  भागना चाहिए।

47. लकड़हारा और सुनहरी कुल्हाड़ी – Hindi Short Story for Kids

एक समय की बात है जंगल के पास एक लकड़हारा रहता था। वो जंगल में लकड़ी इकठ्ठा करता था और उन्हें पास के बाज़ार में बेचता था कुछ पैसों के लिए

एक दिन की बात है वो एक पेड़ काट रहा था, तभी हुआ ये की गलती से उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई।

नदी बहुत ज्यादा गहरी थी उसने बहुत कोशिश किया अपने कुल्हाड़ी को खोजने की लेकिन उसे वो नहीं मिली।

अब उसे लगा की उसने कुल्हाड़ी खो दी है, दुखी होकर वो नदी के किनारे बैठकर रोने लगा।

उसके रोने की आवाज सुनकर नदी के भगवान उठे और लकड़हारे से पूछा कि क्या हुआ। लकड़हारा ने उन्हें अपनी कहानी बताई।

भगवान को उस लकड़हारे के ऊपर दया आई और वो उसकी मेहनत और सच्चाई देखकर उसकी मदद करने की कोशिश की।

वो नदी में गायब हो गए और एक सुनहरी कुल्हाड़ी वापस लाये लेकिन लकड़हारे ने कहा कि यह उसका नहीं है।

वो फिर से गायब हो गए और अब की बार वे चांदी की कुल्हाड़ी ले आये, लेकिन इस बार भी लकड़हारे ने कहा कि ये कुल्हाड़ी उसका नहीं है। अब नदी के भगवान पानी में फिर से गायब हो गए और अब की बार वो,

एक लोहे की कुल्हाड़ी के साथ वापस आ गए लकड़हारा मुस्कुराया और कहा कि यह उसकी कुल्हाड़ी है।

नदी के भगवान ने लकड़हारे की ईमानदारी से खुश होकर उसे सोने और चांदी की कुल्हाड़ियों.को उसे दे दिए।

48. हाथी और उसके दोस्त

बहुत समय पहले की बात है, एक हाथी एक जंगल में बसने आया जंगल उसके लिए नया था, और वह दोस्त बनाने के लिए देख रहा था।

वो सबसे पहले एक बंदर से पास गया और कहा, बंदर भैया ! क्या आप मेरे दोस्त बनना चाहेंगे ?

बंदर ने कहा, तुम मेरी तरह झूल नहीं सकते क्यूंकि तुम बहुत बड़े हो, इसलिए मैं तुम्हारा दोस्त नहीं बन सकता।

इसके बाद हाथी एक खरगोश के पास गया और वही पूछा खरगोश ने कहा, तुम मेरे बिल में फिट होने के लिए बहुत बड़े हो, इसलिए मैं तुम्हारा दोस्त नहीं बन सकता।

फिर हाथी तालाब में मेंढक के पास गया और वही पूछा। मेंढक ने उसे जवाब दिया, तुम मेरे जितना ऊंची कूदने के लिए बहुत भारी हो,

इसलिए मैं तुम्हारा दोस्त नहीं बन सकता। अब हाथी उदास था क्योंकि वह बहुत कोशिशों के बावजूद दोस्त नहीं बना सका।

फिर एक दिन, सभी जानवर जंगल में इधर उधर दौड़ रहे थे, ये देखकर हाथी ने दौड़ रहे एक भालू से पूछा कि इसके पीछे का कारण क्या है ?

भालू ने कहा, जंगल का शेर शिकार पर निकला है – हम खुद को उससे बचाने के लिए भाग रहे हैं।

ऐसे में हाथी शेर के पास गया और कहा कि कृपया इन निर्दोष लोगों को चोट न पहुंचाओ उन्हें अकेला छोड़ दें।

शेर ने उसका मजाक उड़ाया और हाथी को एक तरफ चले जाने को कहा। तभी हाथी को गुस्सा आ गया और उसने शेर को उसकी सारी ताकत लगाकर धक्का दे दिया, जिससे वह घायल हो गया और वहां से भाग गया।

अब बाकी सभी जानवर धीरे-धीरे बाहर आ गए और शेर की हार को लेकर खुश होने लगे।

वे हाथी के पास गए और उससे कहा, तुम्हारा आकार एकदम सही है हमारा दोस्त बनने के लिए।

49. अंगूर खट्टे है – Short Moral Story in Hindi

एक बार एक लोमड़ी बहुत भूखी थी। वह भोजन की तलाश में इधर – उधर भटकती रही लेकिन कही से भी उसे कुछ भी खाने को नहीं मिला।

आखिर में हारकर वह एक बाग़ में पहुँच गयी। वहां उसने अंगूर की एक बेल देखी। जिसपर अंगूर के गुच्छे लगे थे।

वह उन्हें देखकर बहुत खुश हुई। अंगूरों को खाना चाहती थी, पर अंगूर बहुत ऊँचे थे। वह अंगूरों को पाने के लिए ऊँची – ऊँची छलांगे लगाने लगी।

लेकिन वह उन तक पहुँच न सकी। वह ऐसा करते – करते बहुत थक चुकी थी।

आखिर वह बाग से बाहर जाते हुए कहने लगी कि अंगूर खट्टे है। अगर मैं इन्हें खाऊँगी तो बीमार हो जाउंगी।

सीख : हमें हर चीज में या हर हालात में हमेशा अच्छाई ढूंढनी चहिये। हम अगर कोई चीज हासिल न कर सके तो उसे बुरा नहीं कहना चाहिए।

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50. चार मित्र और शिकारी

जंगल में हिरन, कौआ, कछुआ और चूहे की गहरी दोस्ती थी। एकबार जंगल में शिकारी आया और उस शिकारी ने हिरन को अपने जाल में फंसा लिया।

अब बेचारा हिरन जाल में फंसा था उसे लगा कि आज मेरी मर जाऊंगा। इस डर से वह घबराने लगा।

तभी उसके दोस्त कौए ने ये सब देखा और उसने कछुआ और चूहे हो भी हिरन की मदद के लिए बुला लिया।

कौए ने जाल में फंसे हिरन पर इस तरह चोंच मारना शुरू कर दिया जैसे कौये किसी मरे जानवर की लाश को नोंचकर खाते हैं।

अब शिकारी को लगा कि कहीं यह हिरन मर तो नहीं गया।

तभी कछुआ उसके आगे से गुजरा। शिकारी ने सोचा हिरन तो मर गया इस कछुए को ही पकड़ लेता हूँ।

यही सोचकर वह कछुए के पीछे पीछे चल दिया।

इधर मौका पाते ही चूहे ने हिरन का सारा जाल काट डाला और उसे आजाद कर दिया।

शिकारी कछुए के पीछे- पीछे जा ही रहा था कि तभी कौआ उड़ता हुआ आया और कछुए को अपनी चौंच में दबाकर उड़ाकर ले गया।

इस तरह सभी दोस्तों ने मिलकर एक दूसरे की जान बचायी।

सीख : साथ में मिलकर काम करने से कठिन काम भी आसान हो जाते हैं।

51. लालची कुत्ता – Hindi Short Story for Kids

एक गाँव में एक कुत्ता था बड़ा ही लालची था। वह भोजन की खोज में इधर – उधर भटकता रहा लेकिन कही भी उसे भोजन नहीं मिला।

आखिर में उसे एक होटल के बाहर से मांस का एक टुकड़ा मिला। वह उसे अकेले में बैठकर खाना चाहता था।

इसलिए वह उसे लेकर भाग गया। वह एक नदी के किनारे पहुँच गया। अचानक उसने अपनी परछाई नदी में देखी।

उसने समझा की पानी में कोई दूसरा कुत्ता है जिसके मुँह में भी मांस का टुकड़ा है।

उसने सोचा क्यों न इसका टुकड़ा भी छीन लिया जाए तो खाने का मजा दोगुना हो जाएगा। वह उस पर जोर से भौंका।

भौंकने से उसका अपना मांस का टुकड़ा भी नदी में गिर गया।

अब वह अपना टुकड़ा भी खो बैठा। बहुत पछताया और मुँह लटकाता हुआ गाँव को वापस आ गया।

सीख : लालच बुरी बला है।

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52. साधु और चूहा

किसी गाँव में एक साधु एक मंदिर में रहता था और लोगों की सेवा करता था। भीख मांगकर जो कुछ भी उसे मिलता वह उसे उन लोगों को दान कर देता जो मंदिर साफ़ करने में उसका साथ देते थे।

उस मंदिर में एक चूहा भी रहता था। साधु ने चूहे को कई बार भगाने की कोशिश की लेकिन वह चकमा देकर छिप जाता।

साधु ने उस चूहे को पकड़ने की काफी कोशिश की लेकिन वह असफल रहता। साधु एकदिन परेशान होकर अपने एक दोस्त के पास गया।

उसके दोस्त ने उसे एक योजना बताई कि चूहे ने मंदिर में अपना कहीं बिल बना रखा होगा और वह वहां अपना सारा खाना जमा करता होगा। अगर उसके बिल तक पहुंचकर सारा खाना निकाल लिया जाये तो चूहा खुद ही कमजोर होकर मर जायेगा।

अब साधु और उसके दोस्त ने बिल खोजना शुरू कर दिया और उनको बिल मिल ही गया जिसमें चूहे ने खूब सारा खाना चुराकर कर रखा था।

बिल खोदकर सारा खाना बाहर निकाल दिया गया। अब चूहे को खाना नहीं मिला तो वह कमजोर हो गया और साधु ने अपनी छड़ी से कमजोर चूहे पर हमला किया।

चूहा डर कर भाग गया और फिर कभी मंदिर में नहीं आया|

सीख : अपने दुश्मन को हराना है तो पहले उसकी कमजोरी पर हमला करो।

53. समझदार बूढ़ा उल्लू – Moral Hindi Short Story

एक बूढ़ा उल्लू था हर दिन वह अपने आसपास घटने वाली घटनाओं को देखता था।

कल उसने देखा कि एक लड़का एक बूढ़े व्यक्ति को एक भारी टोकरी ले जाने में मदद कर रहा है।

आज उसने एक लड़की को उसकी माँ पर चिल्लाते हुए देखा। जितना अधिक उसने देखा उतना कम उसने बोला और समझा।

जैसा कि वह कम बोलता था, उससे ज्यादा सुनता था। उल्लू ने लोगों को बातें करते और कहानियां सुनाते हुए सुना।

उसने एक महिला को यह कहते हुए सुना कि एक हाथी एक बाड़ पर कूद गया।

उसने एक आदमी को यह कहते हुए भी सुना कि उसने कभी गलती नहीं की।

बूढ़े उल्लू ने लोगों के बारे में देखा और सुना था। कुछ बेहतर हो गए और कुछ बदतर हो गए।

लेकिन उल्लू लोगों की बाते सुन – सुन कर धीरे धीरे ज्यादा समझदार हो गया।

सीख : कम बात करना चाहिए लेकिन ज्यादा सुनना चाहिए। इससे आप ज्यादा समझदार बनेंगे।

54. शिकारी और उसका बच्चा

एक शिकारी शिकार पर जाने के लिए तैयार हो रहा था। जाने से पहले, वह अपने छोटे बच्चे को देखने गया।

उन्होंने अपने बच्चे के कंबल को देखा और सोचा कि आने वाली सर्दियों के लिए कंबल काफी मोटा नहीं हो सकता है।

अलविदा, मेरा छोटा बच्चा। पिता जी शिकार करने जा रहे हैं। पिता जी आपके लिए एक नया कंबल लाने के लिए कुछ खरगोश की खाल लाने जा रहे हैं, शिकारी ने अपने बच्चे से कहा।

वह शिकार के लिए चल दिए। शिकार के बाद, उन्होंने एक कंबल खरीदा, जिससे उसने अपने बच्चे को सर्दी से बचाया।

सीख : आपको अपने परिवार के लिए खाना और कपड़ा देने में सक्षम होना चाहिए।

55. मोची और गरीब लड़की – Hindi Short Story for Kids

एक छोटे शहर में, एक गरीब लड़की रहती थी। उसके दोस्त ने उसे अपने जन्मदिन की पार्टी में आने के लिए बुलाया।

वह बहुत खुश थी। लेकिन उसका दाहिना जूता फटा हुआ था।

उसे जल्दी से ठीक करने की जरूरत थी। इसलिए, वह एक मोची को देखने गई।

मोची – मोची, लड़की ने कहा – कृपया मेरा जूता ठीक कर दें। आप यह जूता कब वापस चाहते हैं ? मोची ने पूछा।

आधे-घंटे में मेरे जूते को ठीक कर दो। फिर मैं आपको आपके पैसे दूंगी, लड़की ने कहा।

मोची मुस्कुराया और जल्दी से जूता ठीक कर दिया। मोची ने आधे घंटे से पहले जूते की मरम्मत पूरी कर ली।

लड़की बहुत खुश थी। अब, वह अपने दोस्त की जन्मदिन की पार्टी में जा सकती थी।

सीख : आपको आभारी होना चाहिए कि ऐसे लोग हैं जो आपके लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं।

56. दिल की सुने या दिमाग की

एक बार शुभम ने रात सात बजे अपने पापा से कहा, कल सुबह पांच बजे मुझे उठा दीजिएगा, मैं टहलने जाऊंगा।

लेकिन इतना कहते ही उसके दूसरे मन ने दस्तक दी, क्यों कह दिया पांच बजे उठाने को ? मालूम नहीं कल कॉलेज में प्रैक्टिकल है ?

इतनी जल्दी उठोगे तो प्रैक्टिकल में सो नहीं जाओगे ?

तभी तीसरा मन आ गया, क्या बात करते हो, उठना ही चाहिए। सुबह सब कुछ एकबार दोहरा लोगे तो प्रैक्टिकल और अच्छा जाएगा।

पर जब रात नौ बजे उसने खाना खा लिया तो उसे सुस्ती चढ़ गई। सुस्ती चढ़ते ही चौथे मन ने, नहीं उठना सुबह-सुबह।

शुभम ने पापा को उठाने से मना कर दिया। रात को टी.वी. देखकर जब ग्यारह बजे वह सोने गया तब तक उसके खाने की सुस्ती काफी कम हो चुकी थी। बस पांचवें मन बोला, सुबह उठना ही है।

सुबह-सुबह परीक्षा की तैयारी नहीं करी तो कहीं रिजल्ट न गड़बड़ा जाए। बस तुरंत उसने पापा से फिर उठाने को कह  दिया।

पर सुबह में जैसे ही पापा ने पांच बजे उठाये कि उसका छठा मन गुस्सा कर बैठा, यह कोई वक्त है उठाने का ? क्या अभी उठकर प्रैक्टिकल में दिनभर सोता रहूं ?

पापा भी परेशान हो गए। खुद ही उठाने को कहता है और उठाने पर गुस्सा करता है। वह फिर सो गया लेकिन फिर मजा तो,

यह कि सुबह उठकर और नहा-धोकर जब वह नाश्ता करने बैठा तो उसे अपने न उठने पर बड़ा पछतावा हुआ। उसने अपने पापा से कहा, नींद

में भले ही मैं लाख मना करूं, पर आपको तो मुझे उठा ही देना चाहिए था। आपको तो पता है मेरा प्रैक्टिकल एग्जाम है।

अब पापा क्या कहें ? उन्होंने अपना माथा ठोक लिया।

57. जिंदगी की सिख दर्जी से – Short Moral Story in Hindi

एक दिन स्कूल में छुट्टी होने के कारण, एक दर्जी का बेटा रोहन अपने पापा की दुकान पर चला गया।

वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा।

उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सुई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं।

जब उसने इसी काम को दो-तीन बार देखा तो उससे रहा नहीं गया, तो उसने अपने पापा से पूछा, पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं, आप जब भी कपड़ा काटते हैं,

उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों?

रोहन के पापा ने हस्ते हुए जवाब दिया, बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और सुई जोड़ने का काम करती है,

और काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है लेकिन जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है।

यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं।

58. दो भाई के दो अलग रास्ते

एक छोटे से गांव में दो भाई रहते थे। एक का नाम मोहित था, वह शहर का सबसे बड़ा बिजनेसमैन था। तो दूसरे का नाम मंगल था,

वह शराबी था। मंगल गांव में अपने भाई के पैसो से रहता था, और पूरा दिन सिर्फ शराब ही पिता रहता था। वह किसी की बात नहीं सुनता था।

एक दिन गांव के कुछ लोगो ने इस समस्या के बारे में दोनों भाइयों से बात करने की सोची। वे पहले बड़े भाई के घर चले गए।

मंगल हमेशा की तरह शराब पि कर जमीन पर लेटा था। लोगों ने उसे कुर्सी पर बैठाया और ज्यादा शराब पिने की वजह पूछने लगे।

मंगल बोला, मेरे पिता शराबी थे, वे अक्सर मेरी माँ और हम दोनों भाइयों को पीटा करते थे।

भला तुम लोग मुझसे और क्या उम्मीद कर सकते हो। मैं भी वैसा ही हूँ।

फिर वे छोटे भाई के पास चले गए। वो अपने काम में व्यस्त था और थोड़ी देर बाद उनसे मिलने आया।

गांव के लोगों ने इस भाई से भी वही सवाल किया, आप इतने बड़े बिजनेसमैन हैं, सभी आपकी तारीफ करते हैं, आखिर आपकी प्रेरणा क्या है ?

मोहित ने बोला – मेरे पिता

लोगों ने पूछा , भला वो कैसे ?

मेरे पिता शराबी थे, नशे में वो हमें मारा – पीटा करते थे। मैं ये सब चुप -चाप देखा करता था।

और तभी मैंने सोच लिया था की मैं ऐसा बिलकुल नहीं बनना चाहता। मुझे तो एक सम्मानित और बड़ा आदमी बनना है और मैं वही बना

सीख : हमारी सोच ही है जो हमे एक अच्छा व्यक्ति बनाती है।

स्टोरी इन हिंदी फॉर चाइल्ड

59. अपराध किसका ? | Hindi Short Moral Story for Kids

एक बार राजा के मन में एक बात आई। वह जानना चाहते थे कि जो लोग किसी न किसी अपराध के कारण सज़ा भुगतते हैं, उनमें कोई पछतावा की भावना आती है या नहीं।

दूसरे दिन वह राजा अचानक अपने राज्य के जेल में पहुंच गया और सभी कैदियों से उनके किए गए अपराध के बारे में पूछने लगा।

एक कैदी ने कहा, मैंने कोई अपराध नहीं किया है। मैं निर्दोष हूं।

दूसरा बंदी बोला, मुझे मेरे पड़ोसिओं ने फंसाया है। मैं भी निर्दोष हूं।

इसी तरह सभी बंदी अपने आप को निर्दोष साबित करने लगे। फिर राजा ने अचानक देखा कि एक व्यक्ति सिर नीचे किए हुए आंसू बहा रहा था। राजा ने उसके पास जाकर पूछा कि तुम क्‍यों रो रहे हो ?

उस कैदी ने कहा, मैंने गरीबी से तंग आकर चोरी की थी। मुझे आपके न्याय पर कोई शक नहीं है। मैंने अपराध किया था, जिसका मुझे दंड मिला।

राजा ने सोचा उन सभी कैदियों में से एक यही ऐसा व्यक्ति है जो अपनी गलती का पछतावा कर रहा है। इस व्यक्ति को सजा से हटा दिया जाए तो यह अपने अंदर सुधार कर सकता है।

राजा ने उसे तुरंत जेल से रिहा करने को कहा और उसे दरबार में नौकरी पर रख दिया।

60. होशियार इंसान

एक बार एक हवाई जहाज में डॉक्टर, वकील, छोटा बच्चा और पंडित जी जा रहे थे। अचानक हवाई जहाज के इंजिन में कुछ खराबी हो गई। पायलट की तमाम

कोशिशों के बावजूद हवाई जहाज नीचे जाने लगा। पायलट ने पैराशूट लेकर मुसाफिरों से कहा कि वह कूद जाए और खुद को बचा लें।

दुर्भाग्य से तीन ही पैराशूट बचे थे और हवाई जहाज में चार लोग बाकि थे।

एक पैराशूट डॉक्टर ने ले लिया और कहा मैं डॉक्टर हूं, मैं जिंदगियां बचाता हूं इसलिए मुझे जीना चाहिए। यह कहकर वह कूद गया।

फिर वकील ने कहा, मैं वकील हूं और वकील दुनिया के सबसे होशियार इंसान होते है। वह भी कूद गया।

पंडित जी ने छोटे लड़के की ओर देखा और कहा, बेटा – मैने अपनी जिंदगी जी ली है। तुम अभी छोटे हो और तुम्हारी पूरी जिंदगी पड़ी हे। यह आखिरी पैराशूट लो।

छोटे लड॒के ने पैराशूट पंडित जी को वापिस किया और कहा, आप परेशान ना हो।

जो आदमी खुद को सबसे होशियार बता रहा था वह मेरा बैग लेकर नीचे कूद गया है। हमारे पास दोनों पैराशूट सुरक्षित है। हम आराम से नीचे कूद सकते है।

सीख : आपके काम से आपकी पहचान नहीं होती बल्कि एक अच्छा इंसान बनने से आपकी पहचान होती है।

61. लालची व्यापारी – Moral Hindi Short Story

एक भिखारी को बाज़ार में चमड़े का एक बटुआ पड़ा मिला उसने खोलकर देखा। बटुए में सोने की सौ सिक्के थे।

तभी भिखारी ने एक व्यापारी को चिल्लाते हुए सुना, मेरा चमड़े का बटुआ खो गया है !

जो कोई उसे खोजकर मुझे सौंप देगा, मैं उसे एक अच्छा सा ईनाम दूंगा !

भिखारी बहुत ईमानदार आदमी था। उसने बटुआ व्यापारी को सौंपकर कहा, ये रहा आपका बटुआ। क्या आप मुझे ईनाम देंगे ?

ईनाम ? व्यापारी ने अपने सिक्के गिनते हुए कहा, इस बटुए में तो दो सौ सिक्के थे ! तुमने आधी रकम चुरा ली और अब ईनाम मांगते हो ?

दफा हो जाओ वरना मैं सिपाहियों को बुला लूँगा।

इतनी ईमानदारी दिखाने के बाद भी भिखारी से सहन नहीं हुआ।  वह बोला, मैंने कुछ नहीं चुराया है ! मैं दरबार जाने के लिए तैयार हूँ।

दरबार के अदालत में दोनों की बात सुनी और कहा, मुझे तुम दोनों पर यकीन है। मैं इंसाफ करूँगा।

व्यापारी, तुम कहते हो कि तुम्हारे बटुए में दो सौ सिक्के थे।

लेकिन भिखारी को मिले बटुए में सिर्फ सौ सिक्के हैं। इसका मतलब यह है कि यह बटुआ तुम्हारा नहीं है।

चूंकि भिखारी को मिले बटुए का कोई दावेदार नहीं है इसलिए मैं ईनाम में भिखारी को पुरे सौ सिक्के देता हूँ।

लालची व्यापारी हाथ मलता रह गया। अब वह चाहकर भी अपने बटुए को अपना नहीं कह सकता था क्योंकि ऐसा करने पर उसे कड़ी सजा हो जाती। भिखारी को ईमानदारी का एक अच्छा ईनाम मिल गया।

62. अच्छी आदते

एक बूढ़ा रास्ते से बड़ी मुश्किल से चला जा रहा था। उस समय हवा बड़े जोरों से चल रही थी। अचानक उस बूढ़े का हैट हवा से उड़ गया। उसके पास ही तीन लड़के स्कूल जा रहे थे।

उनसे बूढ़े ने कहा, मेरा हैट उड़ गया है, उसे पकड़ो। नहीं तो मै बिना हैट का हो जाऊंगा।

वे लड़के उसकी बात पर ध्यान न देकर टोपी के उड़ने का मजा लेते हुए हंसने लगे। इतने में शीला नाम की लड़की, जो स्कूल में पढ़ती थी, उसी रास्ते पर आ पहुंची।

उसने तुरंत ही दौड़कर वह हैट पकड़ लिया और उस बूढ़े को दे दिया। उसके बाद वे सब लड़के स्कूल चले गए।

अध्यापक ने हैट वाली यह घटना स्कूल की खिड़की से देखी थी। इसलिए स्कूल सब विद्यार्थियों के सामने वह हैट वाली बात कही और शीला के अच्छे काम के लिए भेंट दी।

जो तीन लड़के गरीब की हैट उड़ते देखकर हंसे थे, वे यह देखकर बहुत दुखी हुए।

वेरी शॉर्ट स्टोरी इन हिंदी

63. कल किसने देखा है – Short Moral Story in Hindi

एक गाँव में एक अमीर व्यापारी रहता था। बूढ़ा होने के बाद भी वह बहुत मेहनत करता था।

एक दिन उन्हें न जाने क्या सूझा कि अपने एक नौकर को बुलाकर कहा, पता करो हमारे पास कितना पैसा है और कब तक के लिए काफी रहेगा ?

कुछ दिन बाद नौकर हिसाब लेकर आया और बोला, जिस हिसाब से आज खर्चा हो रहा है, उस तरह अगर आज से कोई कमाई न भी हो तो आपकी अगली दो पीढ़िया खा सकती हैं।

व्यापारी चौंक पड़े। उन्होंने पूछा, तब तीसरी और चौथी पीढ़ी का क्या होगा ? व्यापारी सोचने लगे और सोच में पड़ गए।

फिर बीमार रहने लगे। बहुत इलाज कराया मगर कुछ फर्क नहीं पड़ा।

एक दिन व्यापारी का एक दोस्त हालचाल पूछने आया। व्यापारी बोले, इतना कमाया फिर भी तीसरी और चौथी पीढ़ी तक के लिए कुछ नहीं है। उसका दोस्त बोला,

एक साधु थोड़ी दूर पर रहते है अगर उन्हें खाना खिलाएं तो आपका रोग ठीक हो जाएगा।

अगले दिन व्यापारी खाना लेकर साधु के पास पहुंचे। साधु ने उन्हें आदर के साथ बैठाया।

फिर अपनी पत्नी को आवाज दी, व्यापारी जी खाना लेकर आए हैं।

इस पर साधु की पत्नी बोली, आज खाना तो कोई दे गया है। साधु ने कहा, माफ़ करना व्यापारी जी आज का खाना तो कोई दे गया है।

इसलिए आपका भोजन नहीं ले सकता। हमारा नियम है कि सुबह जो खाना पहले दे जाए, हम उसे ही लेते हैं।

व्यापारी बोले, क्या कल के लिए ले आऊं ? इस पर साधू बोले, हम कल के लिए आज नहीं सोचते। कल आएगा, तो ईश्वर अपने आप भेज देगा।

व्यापारी घर की ओर चल पड़े। रास्‍ते भर वह सोचते रहे कि कैसा आदमी है यह इसे कल की बिल्कुल भी चिंता नहीं है और मैं अपनी तीसरी और चौथी पीढ़ी तक को लेकर रो रहा हूं।

उनकी आंखें खुल गईं। व्यापारी सारी चिंता छोड़कर सुख से रहने लगे।

64. कीमती चीज

गांव में एक भिखारी रहता था। वह बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा करता था। उसे ठीक से खाने या पिने नहीं मिलता था,

जिस वजह से उसका बूढ़ा शरीर सूख गया था। वह अपने आप को बहुत ही कमज़ोर महसूस करने लगा।

वह रास्ते के एक ओर गिड़गिड़ाते हुए भीख मांगा करता था। एक बच्चा उस रास्ते से रोज अपने स्कूल के लिए निकलता था।

भिखारी को देखकर उसे बड़ा बुरा लगता।

वह छोटा बच्चा सोचता,  आखिर यह आदमी क्यों भीख मांगता है ? भगवान उसे उठा क्यों नहीं लेते ?

एक दिन उससे रहा नहीं गया। वह भिखारी के पास गया और अपनी टिफिन में से कुछ रोटियां देते हुए बोला, बाबा,

तुम्हारी ऐसी हालत हो गई है फिर भी तुम जीना चाहते हो तुम भीख मांगते हो,

पर ईश्वर से यह प्रार्थना क्यों नहीं करते कि वह तुम्हें अपने पास बुला ले ?

भिखारी ने हस्ते हुए बोला, बेटा तुम जो कह रहे हो, वही बात मेरे मन में भी उठती है।

मैं भगवान से रोज प्रार्थना करता हूं, पर वह मेरी सुनता ही नहीं। शायद वह चाहता है कि मैं इस धरती पर रहूं,

जिससे दुनिया के लोग मुझे देखें और समझें कि एक दिन मैं भी उनकी ही तरह था, लेकिन वह दिन भी आ सकता है,

जबकि वे मेरी तरह हो सकते हैं। इसलिए बेटा किसी को घमंड नहीं करना चाहिए।

लड़का भिखारी की ओर देखता रह गया। उसने जो कहा था, उसमें कितनी बड़ी सच्चाई छुपी हुई थी।

65. गधे से प्रेरणा – Very Short Hindi Moral Stories

पवन अपने गधे को लेकर दूसरे गांव से लौट रहा था। गलती से वह गधा पैर खिसकने के कारण एक गहरे गड्डे में गिर गया।

उसे निकालने के लिए पवन ने पूरी कोशिश की लेकिन वह निकाल नहीं पाया।

बहुत कोशिशों के बाद, जब शाम हो गयी और अँधेरा होने लगा तो पवन को लगा की उसके गधे को उस गड्डे से निकालना अब नामुमकिन है। तो उसने उसे जिन्दा ही मिट्टी से ढक देने का सोचा और वह ऊपर से मिट्टी डालने लगा।

बहुत देर तक मिट्टी डालने के बाद पवन अपने घर चला गया।

पर ढेर सारी मिट्टी डालने के कारण वह गधा अपने ऊपर गिरे हुए मिट्टी की मदद से धीरे-धीरे उस पर अपना पैर रख-रख कर उस गड्डे के ऊपर चढ़ गया।

अगले दिन जब पवन सुबह उठा तो उसने देखा उसका गधा उसके घर के बाहर ही खड़ा था। गधे को अपने घर देखकर उसे यकीन ही नहीं हो रहा था।

कभी हार मत मानो। जिंदगी में चमत्कार होते ही रहेंगे।

66. जिंदगी का बोझ

एक जंगल में एक साधु रहा करता था। कई गांव के लोग अपनी समस्याएं लेकर आते और साधु उनका समाधान करते थे।

एक बार जब साधु बाजार गए थे तब उन्हें एक आदमी मिला। उसने पूछा, खुश रहने का राज क्या है ?

साधु बोले, तुम मेरे साथ जंगल में चलो, वहीं पर मैं तुम्हें खुश रहने का राज बताता हूं।

वह आदमी साधु के साथ जंगल जाने लगा।

रास्ते में साधु ने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उस आदमी को दे दिया और कहा, इसे पकड़ो और चलो मेरे साथ।

उस आदमी को समझ में नहीं आ रहा था, कि उनसे पत्थर उठाने के लिए क्‍यों कह रहे हैं। इसमें खुश रहने का क्या राज है ?

लेकिन उसने कोई सवाल जवाब नहीं करते हुए साधु की बात को माना और पत्थर उठा लिया।   

कुछ समय बाद उस व्यक्ति के हाथ में दर्द होने लगा, लेकिन वह चुप रहा और चलता रहा।

लेकिन जब चलते हुए बहुत समय बीत गया और उससे दर्द सहा नहीं गया, तो उसने कहा कि अब मैं इस पत्थर का वजन नहीं उठा सकता हूं। मेरे हाथों में बहुत तेज दर्द हो रहा है।

साधू ने कहा कि पत्थर को नीचे रख दो। पत्थर को नीचे रखने से उस आदमी को बड़ी राहत महसूस हुई।

तब साधु ने कहा, यही है खुश रहने का राज, जिस तरह इस पत्थर को हाथ में रखने पर थोड़ा सा दर्द होता है और घंटे तक हाथ में रखने पर ज्यादा दर्द होता है।

ठीक उसी तरह दुखों के बोझ को जितने ज्यादा समय तक हम अपने जिंदगी में रखेंगे उतने ही ज्यादा हम दुखी रहेंगे।

अगर तुम खुश रहना चाहते हो तो दुःख से भरे पत्थर को जल्दी से जल्दी अपनी जिंदगी से बहार निकल दो।

67. मधुमक्खी की दुआ – Hindi Short Story for Kids

एक बार एक मधुमक्खी ने बरतन में शहद इकटृा किया और ईश्वर को खुश करने के लिए उनके सामने प्रस्तुत किया।

ईश्वर उस भेंट से बहुत खुश हुए और मधुमक्खी से बोले कि वह जो चाहे मांगे, उसे पूरा किया जाएगा।

मधुमक्खी यह सुनकर बहुत खुश हुई और बोली, मुझे यह वरदान दें कि मैं जिसे भी डंक मारूं, वह दर्द से तड़प उठे।

ईश्वर यह सुनकर बहुत गुस्सा हुए, क्या इसके अलावा तुम्हारी दूसरी कोई इच्छा नहीं है।

ठीक है, लेकिन एक शर्त है कि तुम जिसे डंक मारोगी उसे तो बहुत दर्द होगा, लेकिन तुम भी तुरंत मर जाओगी।

सीख : जो दूसरों का बुरा चाहते हैं, उनका भी बुरा ही होता है।        

68. सपनों की दुनिया

पप्पू अपने गांव में मूर्खता के लिए जाना जाता था। एक दिन सुबह पप्पू अंडे खरीदने बाज़ार पहुँच गया।

बाज़ार से उसने अंडे खरीदे और उन अंडों को एक टोकरी नें भरकर अपने सिर पर रख लिया, फिर वह घर की ओर जाने लगा।

घर जाते-जाते उसे अलग-अलग खयाल आने लगे जैसे कि, अगर इन अंडों से बच्चे निकलें तो मेरे पास ढेर सारी मुर्गियाँ होंगी।

वह सब मुर्गियाँ ढेर सारे अंडे देंगी।

उन अंडों को बाज़ार में बैचकर मै अमीर बन जाऊंगा। और मै एक नौकर रखूँगा। उसके बाद में अपनें लिए एक महल बनवाऊंगा।

भोजन करने के लिए, आराम करने के लिए और बैठने के लिए उसमें अलग-अलग कमरे होंगे। घर सजा लेने के बाद मैं एक अमीर लड़की से शादी करूंगा।

अपनी पत्नी के लिए भी एक नौकर रखूँगा और उसके लिए अच्छे-अच्छे कपड़े, गहने ख़रीदूँगा।

शादी के बाद मेरे बच्चे होंगे, बच्चों को मैं खूब प्यार से बड़ा करूंगा। और फिर उनके बड़े हो जाने के बाद उनकी शादी करवा दूंगा।

फिर उनके बच्चे होंगे। फिर मैं अपने पोतों के साथ खुशी-खुशी खेलूँगा।

पप्पू अपने ख़यालों में चले जा रहा था, तभी उसके पैर को एक बड़ा सा पत्थर लगा और सिर पर रखी हुई अंडों की टोकरी से ज़मीन पर गिरी। गिरते ही सारे अंडे फूट गए।

अंडों के फूटने के साथ-साथ पप्पू के सपनें भी टूट कर चूर-चूर हो गए।

69. पोपटलाल का कुत्ता – Hindi Short Story for Kids

एक दिन पोपटलाल गाँव की गलियों में घूम रहा था, उसने देखा की एक घर के बाहर एक कुत्ते का बच्चा कटोरे में खाना खा रहा है।

वो कटोरा बहुत ही अनोखा था। उसने सोचा, इस कटोरे की कीमत बाज़ार में बहुत ज्यादा होगी।

लगता है इस घर के मालिक को इस कटोरे की कद्र नहीं जानते।

उसने पास ही बैठे उस घर के मालिक से कहा, भाई साहब ! मुझे आपके कुत्ते के पिल्ले अच्छे लगे, मैं दोनों के लिए 1000 रूपए दूंगा।

वह आदमी बोला, 1000 बहुत कम है, हाँ मुझे आप 7000 अभी देदो तो कुत्ते के दोनों पिल्ले आपके।

अनोखे कटोरे की लालच में पोपटलाल ने उसे 7000 रूपये दे भी दिए। पोपटलाल सोच रहा था कि कटोरे की कीमत तो कम से कम उससे पांच गुने ज्यादा होगी।

कुत्ते के पिल्लों को ले जाते हुए पोपटलाल ने अपना दाव खेला, भाई साहब ! अब जब पिल्ले मैंने खरीद ही लिया है,

तो आप इस कटोरे का क्या करेंगे ? ये भी मैं 50 रूपए में खरीद लेता हूँ।

घर का मालिक बोला, नहीं वो तो मैं नहीं बेचूंगा।

पोपटलाल तो चकरा गया और पूछने लगा, ऐसा क्यू ? क्या खास है इस कटोरे में ?

घर का मालिक बोला, वो तो मुझे नहीं मालूम, पर ये मेरे लिए बहुत लकी है।

पिछले महीने से मैंने जब से इस कटोरे में कुत्तों को खाना देना शुरू किया है, मैंने 15 कुत्ते बेच दिए।

70. मेहनत के सपने

एक गांव में एक भिकारी रहता था जो बेहद आलसी और गरीब था।

वह मेहनत वाला कोई काम नहीं करना चाहता था लेकिन वह अमीर बनने के सपने देखता था। उसे उसका रोज का खाना भी भीख में ही मिलता था।

एक दिन गांव में शादी थी। शादी के दिन दूल्हे ने उसे दूध का मटका दिया। भिकारी दूध को उबाला, उसमें से कूछ दूध पीया और बाकी दूध मटके में डाल दिया।

उसने दूध में थोड़ा सा दही मिलाकर दूध को दही जमाने के लिए रख दिया। फिर वह आराम करने के लिए लेट गया।

वह दूध के मटके को देखकर बेहद खुश होता रहा और सोते हुए भी उस दही के मटके के बारे में सपने देखने लगा।

उसने सोचा कि अगर वह अमीर बन गया तो उसके सारे दुख दूर हो जाएंगे।

फिर उसका ध्यान उस दूध के मटके की तरफ चला गया जिसमें उसने दही जमाने के लिए रखा था।

वह सपने देखता रहा, सुबह तक दूध का मटका दही में बदल जाएगा। मै दही में से मक्खन निकालूंगा और फिर मै मक्खन को गर्म करके उसका घी बनाऊंगा।

फिर मै बाजार जाकर उस घी को बेचूंगा और उसमें से पैसे कमाऊंगा।

मैं बहुत अमीर बन जाऊंगा। अपने सपने में उस भिकारी ने अपने पलंग के पास रखे डंडे को उठा लिया और उस डंडे को मटके पर मार दिया। दूध का मटका टूट गया और वह अपने सपने से जाग गया।

फिर उसे अहसास हुआ कि वह दिन में सपने देख रहा था।

सीख : आपके सपने मेहनत के बिना कभी पूरे नहीं होंगे।

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