Santhal Vidroh Ka Neta Kaun Tha? पूरी जानकारी

Santhal Vidroh Ka Neta Kaun Tha: आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे संथाल विद्रोह के नेता कौन थे, संथाल विद्रोह का क्या कारण था, संथाल विद्रोह कहां हुआ था के बारे में और संथाल विद्रोह के नेता के बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे।

Santhal Vidroh Ka Neta Kaun Tha

संथाल विद्रोह कब हुआ? 

संथाल समुदाय के लोगों का जीवन कृषि पर आश्रित था। वह 19वीं शताब्दी में बंगाल और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों के पहाड़ी इलाकों में रहते थे।

संथालो ने अंग्रेजी शासन के अत्याचार और अधिक कर की निति से परेशान होकर सन 1855 में विद्रोह किया था। इस विद्रोह को अंग्रेजी शासन ने क्रूरता के साथ दबा दिया। जिसमें हमारो संथालो को मौत के घाट उतार दिया गया था।

संथाल विद्रोह कहां हुआ था

संथाल विद्रोह वर्तमान झारखंड में संथाल लोगों द्वारा अंग्रेजों और जमींदारों के विरुद्ध किया गया। मुंगेर से राजमहल के बीच का क्षेत्र दामन- ए -कोह के नाम से जाना जाता था जो संथाल बहुल क्षेत्र था।

संथाल विद्रोह का कारण क्या था?

संथाल के हाथों अपनी जमीन छिन जाने के बाद उन्होंने अपनी जगह बदलने के बारे में सोचा और राजमहल की पहाड़ियों में चले गए।

उन्होंने पहाड़ी इलाकों की बंजर जमीन पर सफाई करना शुरू किया ताकि वे साफ जमीन पर खेती कर सकें। उन्होंने रात-दिन मेहनत करके पहाड़ी इलाके को खेती करने के योग्य बनाया।

लेकिन एक बार अंग्रेजी सरकार की नजर संथालो की जमीन पर पड़ी। अंग्रेजी शासन ने कर (Tax) वसूलने की नियत से वहां पर जमींदारों की स्थापना कर दी। इस प्रकार स्थालो के द्वारा स्थापित इलाको में अब जमींदारों, सामन्तो, साहुकारो और सरकारी कर्मचारियों की प्रमुखता बढ़ने लगी।

संथालो को अंग्रेजी सरकार को भारी कर (Tax) देना पड़ता था। जिससे उनकी आर्थिक हालत धीरे-धीरे कमजोर होने लगी।

अंगेजी शासन में संथालो की बात को सुनने वाला कोई नहीं था। कर न देने पर अंग्रेज उनकी जमीन हड़पने लगे। इस तरह संथाल समुदाय पर अत्याचार बढ़ने लगा तथा वे उनकी स्त्रियों की इज्जत पर भी हाथ डालने लगे।

जिससे संथाल समुदाय के बीच जमींदारों, सामंतो और अंग्रेजी शासन के प्रति गुस्सा बढ़ता गया।

संथाल विद्रोह का नेता कौन था (Santhal Vidroh Ka Neta Kaun Tha)

संथाल विद्रोह के नेता कान्हू, सिंधु, चाँद और भैरव थे, इन्हीं के मार्ग दर्शन (नेतृत्व) में संथाल विद्रोह हुआ था। यह विद्रोह 1855 में हुआ था। 1855 में अंग्रेजों ने संथाल इलाके को पृथक नॉन रेगुलेशन जिला घोषित किया था, तभी से इसका नाम संथाल परगना रखा गया।

संथाल विद्रोह से सम्बंधित जानकारी –

  • 15 नवम्बर 2000 को संथाल जिले की स्थापना हुई थी।
  • संथाल जनजाति के लोग संथाली भाषा बोलते है।
  • संथाल के लोगों का निवास स्थान छोटा नागपुर, कटक, हजारीबाग, पलामू आदि है।
  • संथाल गांव के मुखिया को मांझी कहा जाता है।
  • संथाल विद्रोह अंग्रेजो के लिए प्रथम जनसंग्राम था।
  • संथाल के लोग जंगलो को काटकर खेती करने योग्य जमीनें बनाया करते थे।
  • 30 जून को हूल दिवस मनाया जाता है।
  • सिंधु और कान्हू ने 1855-56 में संथाल विद्रोह का नेतृत्व किया था।

संथाल विद्रोह में क्या हुआ था? | Santhal Vidroh Ka Neta Kaun Tha

जुलाई, 1855 में विद्रोह की शुरुआत हुई। शुरूआती दौर में संथालो ने सरकार का विरोध नहीं किया लेकिन जब उन्होंने देखा की सरकार खुद अत्याचारियों के साथ खड़ी है। तो उन्होंने सरकारी कर्मचारी और दरोगा को मार दिया।

भागलपुर और राजमहल के बीच डाक और रेल सेवा बंद कर दी गई। संथालो ने अंग्रेजी सरकार को देश से जड़ से उखाड़ फेकने का निश्चय कर लिया था।

संथाल विद्रोह Short में

 जनजाति विद्रोह – आदिवासी -> ठक्कर बापा।

1855 – 1856 ई।

क्षेत्र – छोटानागपुर का पठार 

संथाल बाहुल्य क्षेत्र – “दामन ए कोह”

कारण – ब्रिटिश कंपनी द्वारा जनजातीय क्षेत्र पर कर लागू करना एवं जमींदारों द्वारा अत्यधिक पोषण।

उद्देश्य – दिकुओं ( महाजन, जमींदार, ठेकेदार) विदेशियों का राज खत्म करना।

नेता – कान्हू और सिंधु 

60000 हथियारबंद संथाल एकत्र हुए (जून में) जमींदार व महाजन पर आक्रमण किए। 

पुलिस थाने, जेल, कई महल में आग लगाए।

कान्हू और सिंधु की मृत्यु के बाद विद्रोह दबा दिया।

Santhal Vidroh Ka Neta Kaun Tha – Video Guide

FAQ

Q. संथाल विद्रोह का नेतृत्व करता (कर्ता) कौन थे?

Ans. संथाल विद्रोह के नेता कान्हू, सिंधु थे। इन्हीं के मार्ग दर्शन (नेतृत्व) में संथाल विद्रोह हुआ था। यह विद्रोह 1855 में हुआ था।

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