Sandhi Kise Kahate Hain | Sandhi Viched in Hindi

Hindi Vyakaran की इस सीरीज में Sandhi Kise Kahate Hain , Sandhi Viched in Hindi को उदाहरण सहित बिलकुल ही आसान तरीके से सीखेंगे।

Sandhi Kise Kahate Hain

Sandhi Kise Kahate Hain

संधि का मतलब है मेल। दो शब्दों के मिलने से जब तीसरे शब्द रचना होती है, उसे ही संधि कहते हैं।

पदों को मूल रूप में अलग कर देना संधि विच्छेद कहलाता है।

जैसे –

  • हिम +आलय = हिमालय
  • अति + अधिक = अत्यधिक
  • आत्मा + उत्सर्ग = आत्मोत्सर्ग
  • महा + ऋषि = महर्षि

संधि संस्कृत का शब्द है और इसमें शब्द का रूप छोटा हो जाता है।

संधि के कितने भेद होते हैं | संधि कितने प्रकार की होती है

वर्ण के आधार पर संधि के 3 भेद होते हैं –

  1. स्वर संधि
  2. व्यंजन संधि
  3. विसर्ग संधि

1) स्वर Sandhi Kise Kahate Hain

दो स्वर से उत्पन्न रूप -परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं।

जैसे –

  • विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
  • मुनि + इंद्र = मुनीन्द्र
  • महा + ईश = महेश

Swar Sandhi Ke Bhed

स्वर संधि के 5 भेद होते हैं –

  1. दीर्घ संधि 
  2. गुण संधि 
  3. वृद्धि संधि
  4. यण संधि
  5. अयादी संधि

1) दीर्घ Sandhi Kise Kahate Hain

[ दीर्घ संधि का सूत्र – अक: सवर्णे दीर्घ: ]

नियमअगर पहले शब्द के आखिर में अ,इ,उ,ऋ हृस्व या दीर्घ और दूसरे शब्द के शुरुआत में उसी वर्ण का हृस्व या दीर्घ स्वर हो तो दोनों के स्थान पर दीर्घ आ, ई, ऊ, ॠ हो जाता है।

जैसे-

अ+अ =आ

कोण+अर्क =कोणार्क

अ +आ =आ

भोजन +आलय=भोजनालय

आ +अ =आ

विद्या +अर्थी =विद्यार्थी

आ +आ =आ

विद्या +आलय =विद्यालय
महा+आशय =महाशय

इ +इ =ई

गिरि +इन्द्र =गिरीन्द्र

इ +ई =ई

गिरि +ईश =गिरीश

ई +इ =ई

मही +इन्द्र =महीन्द्र

ई +ई =ई

पृथ्वी +ईश =पृथ्वीश

उ +उ =ऊ

भानु +उदय =भानूदय

ऊ +उ =ऊ

स्वयम्भू +उदय =स्वयम्भूदय

ऋ+ऋ=ऋ

पितृ +ऋण =पितृण

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दीर्घ संधि के उदाहरण –

  •  सत्य + अर्थी = सत्यार्थी
  •  सूर्य +अस्त = सूर्यास्त
  •  देह + अन्त = देहान्त
  •  वेद +अन्त = वेदान्त
  •  कल्प + अन्त = कल्पान्त
  •  उत्तम+ अंग = उत्तमांग
  •  दैत्य +अरि = दैत्यारि
  •  शरण +अर्थी = शरणार्थी
  •  राम + अयण = रामायण
  •  अन्न +अभाव = अन्नाभाव
  •  पुष्प + अवली = पुष्पावली
  •  शरण + अर्थी = शरणार्थी
  •  धन + अर्थी = धनार्थी
  •  चरण +अमृत = चरणामृत
  •  स्वर्ण + अवसर = स्वर्णावसर
  •  शब्द + अर्थ = शब्दार्थ
  •  अद्य + अवधि = अद्यावधि
  •  धर्म+ अर्थी = धरमार्थी
  •  महा + आलय = महालय
  •  हिम + आलय = हिमालय
  •  देव + आलय = देवालय
  •  भोजन + आलय = भोजनालय
  •  परम + आत्मा = परमात्मा
  •  परम + आवश्यक = परमावश्यक
  •  रत्न + आकर = रत्नाकर
  •  कुश + आसन = कुशासन
  •  धर्म + आत्मा = धर्मात्मा
  •  राम + आधार = रामाधार
  •  महा ‌+ आत्मा = महात्मा
  •  परम + आनंद = परमानंद
  •  कमल + आसन = कमलासन
  •  आज्ञा + अनुपालन = आज्ञानुपालन
  •  वार्ता + आलाप = वार्तालाप
  •  शिक्षा +अर्थी = शिक्षार्थी
  •  परीक्षा + अर्थी = परीक्षार्थी
  •  शिव + आलय = शिवालय
  •  गिरि + इंद्र = गिरीन्द्र
  •  अभि + इष्ट = अभीष्ट
  •  गिरि + ईश = गिरीश
  •  कवि + इंद्र = कवींद्र
  •  नदी + ईश = नदीश
  •  रजनी + ईश = रजनीश
  •  मही + ईश = महीश
  •  परि + ईक्षा = परीक्षा
  •  लक्ष्मी + इच्छा = लक्ष्मीच्छा
  •  भारती + ईश्वर = भारतीश्वर
  •  मुनि + ईश्वर = मुनीश्वर
  •  पृथ्वी + ईश = पृथ्वीश
  •  जानकी + ईश = जानकीश
  •  देवी + इच्छा = देवीच्छा
  •  भानु + उदय = भानूदय
  •  मंजु + ऊषा = मंजूषा
  •  लघु + ऊर्मि = लघूर्मि
  •  विधु + उदय = विधूदय
  •  साधु + उपदेश = साधूपदेश
  •  स्वयंभू + उदय = स्वयंभूदय
  •  भू + ऊष्मा = भूष्मा
  •  रघु + उत्तम = रघूत्तम
  •  लघु + ऊक्ति = लघूक्ति
  •  वधू + उल्लास = वधूल्लास
  •  भू + उत्तम = भूत्तम
  •  भू + उपरि = भूपरि
  •  मातृ + ऋणम = मातृणम
  •  मातृ + तृण = मातृण

2) गुण Sandhi Kise Kahate Hain

[ गुण संधि का सूत्र – आद्गुण: ]

नियम- अगर अ या आ के बाद इ या ई उ या ऊ और ऋ आये, तो दोनों मिलकर ए ओ और अर हो जाते है।

जैसे-

अ +इ =ए

देव +इन्द्र=देवन्द्र

अ +ई =ए

देव +ईश =देवेश

आ +इ =ए

महा +इन्द्र =महेन्द्र

अ +उ =ओ

चन्द्र +उदय =चन्द्रोदय

अ+ऊ =ओ

समुद्र +ऊर्मि =समुद्रोर्मि

आ +उ=ओ

महा +उत्स्व =महोत्स्व

आ +ऊ = ओ

गंगा+ऊर्मि =गंगोर्मि

अ +ऋ =अर्

देव + ऋषि =देवर्षि

आ+ऋ =अर्

महा+ऋषि =महर्षि

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Sandhi Kise Kahate Hain

गुण संधि का उदाहरण कौन है  ?

  •  सुर + इंद्र = सुरेंद्र
  •  नर + इंद्र = नरेंद्र
  •  शुभ + इच्छु = शुभेच्छु
  •  पूर्ण + इंद्र = पुर्णेंद्र
  •  प्र + इत = प्रेत
  •  महा + इंद्र = महेंद्र
  •  स्व +इच्छा = स्वेच्छा
  •  सुर + ईश = सुरेश
  •  रमा + ईश = रमेश
  •  देव + ईश = देवेश
  •  महा + ईश्वर = महेश्वर
  •  परम + ईश्वर = परमेश्वर
  •  दिन + ईश = दिनेश
  •  राका + ईश = राकेश
  •  महा + ईश = महेश
  •  खग + ईश = खगेश
  •  नर + ईश = नरेश
  •  सर्व + ईश्वर = सर्वेश्वर
  •  सूर्य + उदय = सूर्योदय
  •  चन्द्र + उदय = चंद्रोदय
  •  जल + ऊर्मि = जलोर्मि
  •  नर + उत्तम = नरोत्तम
  •  पर + उपकार = परोपकार
  •  वेद + उक्त = वेदोक्त
  •  महा + उपदेश = महोपदेश
  •  महा + ऊर्मि = महोर्मि
  •  महा + ऊर्जस्वी = महोर्जस्वी
  •  गंगा+ ऊर्मि = गंगोर्मि
  •  महा + ऊर्जा = महोर्जा

3) वृद्धि Sandhi Kise Kahate Hain

[ वृद्धि संधि का सूत्र – वृद्धिरेचि ]

नियमयदि अ या आ के बाद ए या ऐ आये, तो दोनों के स्थान में ऐ तथा ओ या औ आये, तो दोनों के स्थान में हो जाता है।

जैसे-

अ +ए =ऐ

एक +एक =एकैक

अ +ऐ =ऐ

नव +ऐश्र्वर्य =नवैश्र्वर्य

आ +ए=ऐ

महा +ऐश्र्वर्य=महैश्र्वर्य
सदा +एव =सदैव

अ +ओ =औ

परम +ओजस्वी=परमौजस्वी
वन+ओषधि =वनौषधि

अ +औ =औ

परम +औषध =परमौषध

आ +ओ =औ

महा +ओजस्वी =महौजस्वी

आ +औ =औ

महा +औषध =महौषध

  

वृद्धि Sandhi Kise Kahate Hain के 20 उदाहरण बताइए –

  • एक + एक = एकैक
  • दिन + एक = दिनैक
  • अद्य + एव = अद्यैव
  • देव +ऐश्वर्य = देवैश्वर्य
  • तत्र + एव = तत्रैव
  • नव + ऐश्वर्य = नवैश्वर्य
  • कृष्ण + एकत्व = कृष्णैकत्व
  • सदा + एव = सदैव
  • न + एवम = नैवम
  • सर्वदा +एव = सर्वदैव
  • तथा + एव = तथैव
  • महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
  • एकदा + एव = एकदैव
  • परम + ओज = परमौज
  • जल + ओध = जलौध
  • उष्ण + ओदन = उष्णौदन
  • जल + ओस = जलौस

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4) यण Sandhi Kise Kahate Hain

[ यण संधि का सूत्र- इको यणचि ]

नियम- यदि इ ई उ ऊ और ऋ के बाद कोई अलग स्वर आये, तो इ-ई का यू उ-ऊ का व् औरका र् हो जाता हैं।

जैसे-

इ +अ =य

यदि +अपि =यद्यपि

इ +आ = या

अति +आवश्यक=अत्यावश्यक

इ +उ =यु

अति +उत्तम =अत्युत्तम

इ + ऊ = यू

अति +उष्म =अत्यूष्म

उ +अ =व

अनु +आय =अन्वय

उ +आ =वा

मधु +आलय =मध्वालय

उ + ओ = वो

गुरु +ओदन= गुवौंदन

उ +औ =वौ

गुरु +औदार्य =गुवौंदार्य

ऋ+आ =त्रा

पितृ +आदेश=पित्रादेश

यण संधि का उदाहरण –

  •  अति + अल्प = अत्यल्प
  •  उपरि+ उक्त = उपर्युक्त
  •  प्रति + एक = प्रत्येक
  •  अति + उक्ति = अत्युक्ति
  •  अति + आनंद = अत्यानंद
  •  अधि + अयन = अध्ययन
  •  प्रति+ उपकार = प्रत्युपकार
  •  रीति + अनुसार = रीत्यनुसार
  •  अति + उर्ध्व = अत्यूर्ध्व
  •  दधि + ओदन = दध्योदन
  •  अति + आवश्यक = अत्यावश्यक
  •  प्रति + उत्तर = प्रत्युत्तर
  •  अति + औचित्य = अत्यौचित्य
  •  अति + उक्ति = अत्युक्ति
  •  अति + योज = अत्योज
  •  नदी + आमुख = नद्यामुख
  •  नदी + उद्गम = नद्युद्गम
  •  सखी + एक्य = सख्यैक्य
  •  देवी +आलय = देव्यालय
  •  देवी+ उक्ति = देव्युक्ति
  •  देवी + ओज = देव्योज
  •  सु + आगत = स्वागत
  •  सु + अल्प = स्वल्प
  •  मनु + अंतर = मन्वंतर
  •  मधु + आलय = मध्वालय
  •  अनु + आदेश = अन्वादेश
  •  अनु + ईक्षण = अन्वीक्षण
  •  वधू + आगमन = वध्वागमन
  •  वधू + ऐश्वर्य = वध्वैश्वर्य
  •  पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा

5) अयादि Sandhi Kise Kahate Hain

[ अयादि संधि का सूत्र– एचोsयवायाव: ]

नियम- अगर ए ऐ ओ, औ के बाद कोई अलग स्वर आए, तो –

(क) ए का अय्

(ख) ऐ का आय्

(ग) ओ का अव् और

(घ) औ का आव हो जाता है।

अयादि संधि के उदाहरण –

  •  ने + अन = नयन
  •  चे + अन = चयन
  •  शे + अन = शयन
  •  गै + अक = गायक
  •  नै + अक = नायक
  •  गै + अन = गायन
  •  सै + अक = सायक
  •  भो + अन = भवन
  •  गो + ईश = गवीश
  •  पो ‌+ अन = पवन
  •  रो + ईश = रवीश
  •  पो + इत्र = पवित्र
  •  गो + अन = गवन
  •  पौ + अक = पावक
  •  पौ + अन = पावन
  •  नौ + इक = नाविक

व्यंजन Sandhi Kise Kahate Hain उदाहरण सहित

2) व्यंजन संधि की परिभाषा

संधि बनाते समय व्यंजन के साथ स्वर या कोई व्यंजन के मिलने से जो बदलाव होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं।

 व्यंजन संधि के उदाहरण

  •  दिक् + अम्बर = दिगम्बर
  •  अभी + सेक = अभिषेक

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व्यंजन संधि के नियम

नियम 1

किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) का मेल किसी वर्ग के तीसरे या चौथे वर्ण से (य्, र्, ल्, व्, ह) या किसी स्वर से हो जाये तो क् को ग् , च् को ज् , ट् को ड् , त् को द् , और प् को ब् में बदल दिया जाता है।

 नोट अगर व्यंजन से स्वर मिलता है तो स्वर की मात्रा हलन्त वर्ण में लग जाएगी, लेकिन अगर व्यंजन का मेल होता है तो वे हलन्त ही रहेंगे।

 उदाहरण

 क् का ग् में परिवर्तन

  •  वाक् +ईश : वागीश
  •  दिक् + अम्बर : दिगम्बर
  •  दिक् + गज : दिग्गज
  •  षट् + आनन : षडानन
  •  षट् + यन्त्र : षड्यन्त्र

 त् का द् में परिवर्तन :

  •  सत् + आशय : सदाशय
  •  तत् + अनन्तर : तदनन्तर
  •  उत् + घाटन : उद्घाटन

 प् का ब् में परिवर्तन :

  •  अप् + ज : अब्ज
  •  अप् + द : अब्द

नियम 2

किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) का मिलन न या म वर्ण ( ङ,ञ ज, ण, न, म) के साथ हो तो क् का ङ्, च् का ज्, ट् का ण्, त् का न्, तथा प् का म् में परिवर्तन हो जाता है।

 उदाहरण –

 क् का ङ् में परिवर्तन :

  •  दिक् + मण्डल : दिङ्मण्डल
  •  वाक् + मय : वाङ्मय
  •  प्राक् + मुख : प्राङ्मुख

 ट् का ण् में परिवर्तन :

  •  षट् + मूर्ति : षण्मूर्ति
  •  षट् + मुख : षण्मुख

 त् का न् में परिवर्तन :

  •  उत् + मूलन : उन्मूलन
  •  उत् + नति : उन्नति

नियम 3

त् का मेल ग, घ, द, ध, ब, भ, य, र, व से या किसी स्वर से हो तो द् बन जाता है।

म के साथ क से म तक के किसी भी वर्ण के मेल पर म की जगह पर वर्ण का आखिर वर्ण बन जायेगा।

 उदाहरण –

 म् का (क ख ग घ ङ) के साथ मेल :

  •  सम् + कल्प : संकल्प
  •  सम् + ख्या : संख्या
  •  शम् + कर : शंकर
  •  सम् + गम : संगम

 म् का (च, छ, ज, झ, ञ) के साथ मेल :

  •  सम् + जीवन : संजीवन
  •  किम् + चित् : किंचित
  •  सम् + चय : संचय

 म् का (ट, ठ, ड, ढ, ण) के साथ मेल :

  •  दम् + ड : दंड
  •  खम् + ड : खंड

 म् का (त, थ, द, ध, न) के साथ मेल :

  •  सम् + देह : सन्देह
  •  किम् + नर : किन्नर
  •  सम् + तोष : सन्तोष

 म् का (प, फ, ब, भ, म) के साथ मेल :

  •  सम् + पूर्ण : सम्पूर्ण
  •  सम् + भव : सम्भव

त् का (ग , घ , ध , द , ब , भ ,य , र , व्) साथ मेल:

  •  जगत् + ईश : जगदीश
  •  भगवत् + भक्ति : भगवद्भक्ति
  •  तत् + रूप : तद्रूपत
  •  सत् + भावना = सद्भावना

नियम 4

त् से च् या छ् होने पर च, ज् या झ् होने पर ज्, ट् या ठ् होने पर ट्, ड् या ढ् होने पर ड् और ल होने पर ल् बन जाता है।

म् के साथ (य, र, ल, व, श, ष, स, ह) में से किसी भी वर्ण का मेल होने पर म् की जगह पर अनुस्वार ही लगता है।

 उदाहरण

  •  सम् + वत् : संवत्
  •  तत् + टीका : तट्टीका
  •  उत् + डयन : उड्डयन
  •  सम् + शय : संशय

नियम 5

त् का मेल श् से हो तो त् को च् और श् को छ् में बदल दिया जाता है। जब त् या द् के साथ च या छ का मेल होता है तो त् या द् की जगह पर च् बन जाता है।

उदाहरण

  • उत् + शिष्ट : उच्छिष्ट
  • शरत् + चन्द्र : शरच्चन्द्र
  • उत् + चारण : उच्चारण

नियम 6

त् का मेल ह् से हो तो त् को द् और ह् को ध् में बदल दिया जाता है। त् या द् के साथ ज या झ का मिलन होता है तब त् या द् की जगह ज् बन जाता है।

 उदाहरण

  •  उत् + हरण : उद्धरण
  •  तत् + हित : तद्धित
  •  सत् + जन : सज्जन
  •  जगत् + जीवन : जगज्जीवन
  •  वृहत् + झंकार : वृहज्झंकार
  •  उत् + हार : उद्धार

नियम 7

स्वर के बाद अगर छ् वर्ण आये तो छ् से पहले च् वर्ण बढ़ा दिया जाता है। त् या द् के साथ ट या ठ का मेल होने पर त् या द् की जगह पर ट् बन जाता है।

त् या द् के साथ ड या ढ का मेल होने पर त् या द् की जगह पर ड् बन जाता है।

 उदाहरण

  •  आ + छादन : आच्छादन
  •  संधि + छेद : संधिच्छेद
  •  तत् + टीका : तट्टीका
  • वृहत् + टीका : वृहट्टीका
  •  भवत् + डमरू : भवड्डमरू
  •  स्व + छंद : स्वच्छंद

नियम 8

म् के बाद क् से लेकर म् तक कोई व्यंजन हो तो म् अनुस्वार में बदल जाता है। त् या द् के साथ जब ल का मिलन होता है तब त् या द् की जगह पर ल् बन जाता है।

 उदाहरण

  •  तत् + लीन = तल्लीन
  •  किम् + चित = किंचित

नियम 9

म के बाद य, र, ल, व, श, ष, स, ह में कोई एक व्यंजन हो तो म् अनुस्वार में बदल जाता है।

उदाहरण

  • सम् + योग : संयोग
  • सम् + हार : संहार
  • सम् + वाद : संवाद
  • सम् + शय : संशय

नियम 10

ऋ, रू या थ्रू के बाद न और इनके बीच स्वर, क वर्ग, प वर्ग , अनुश्वार , य व या ह आये तो न् का ण हो जाता है।

उदाहरण

  • भुष + अन : भूषण
  • प्र + मान : प्रमाण

नियम 11

किसी शब्द का पहला वर्ण स हो तथा उसके पहले अ या आ के अलावा कोई दूसरा स्वर आये तो स की जगप ष हो जाता है।

 उदाहरण

  •  अनु + सरण : अनुसरण
  •  सु + सुप्ति : सुषुप्ति
  •  वि + सर्ग : विसर्ग
  •  नि : सिद्ध : निषिद्ध

नियम 12

यौगिक शब्दों के आखिर में अगर पहले शब्द का आखिरी वर्ण न हो, तो उसका लोप हो जाता है।

  •  हस्तिन + दंत : हस्तिन्दंत
  •  प्राणिन + मात्र : प्राणिमात्र
  •  राजन + आज्ञा : राजाज्ञा

नियम 13

ष के बाद त या थ हो तो त के बदले ट और थ के बदले ठ हो जाता है।

 उदाहरण

  •  शिष् + त : शिष्ट
  •  पृष् + थ : पृष्ठ

विसर्ग Sandhi Kise Kahate Hain कहते है

विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से जो विकार होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं।

विसर्ग संधि के उदाहरण

  •  अंतः + करण : अन्तकरण
  •  अंतः + गत : अंतर्गत
  •  अंतः + ध्यान : अंतर्ध्यान

विसर्ग संधि के नियम :

नियम 1

अगर शब्द में विसर्ग के बाद च या छ हो तो विसर्ग हो जाता है। ट या ठ हो तो ष और त् या थ हो तो स् हो जाता है।

 उदाहरण

  •  नि: + चल : निश्चल
  •  धनु: + टकार : धनुष्टकार

नियम 2

संधि के समय विसर्ग के बाद श, ष या स आये तो विसर्ग अपने मूल रूप में ही रहता है या उसकी जगह पर बाद का वर्ण हो जाता है।

उदाहरण

  •  नि: + संदेह : निस्संदेह
  •  दू: + शासन : दुशासन

नियम 3

संधि के समय विसर्ग के बाद क, ख या प, फ हों तो विसर्ग में कोई विकार नहीं होता।

 उदाहरण – 

  •  रज: + कण : रज:कण
  •  पय: + पान : पय:पान

नियम 4

अगर संधि के समय विसर्ग से पहले अ हो और बाद में व्यंजन या ह हो तो विसर्ग में बदल जाता है।

 उदाहरण

  •  मनः + भाव : मनोभाव
  •  यशः + दा : यशोदा

नियम 5

अगर संधि के समय विसर्ग से पहले अ या आ को छोड़कर कोई दूसरा स्वर हो और बाद में कोई घोष वर्ण हो तो विसर्ग की जगह हो जाता है।

 उदाहरण

  •  निः + गुण : निर्गुण
  •  दु: + उपयोग : दुरूपयोग

नियम 6

अगर संधि के समय विसर्ग के बाद त, श या स हो तो विसर्ग के बदले श या स् हो जाता है।

उदाहरण

  •  निः + संतान : निस्संतान
  •  निः + तेज़ : निस्तेज

नियम 7

अगर संधि करते समय विसर्ग से पहले अ या आ हो और उसके बाद कोई अलग स्वर हो, तो पास-पास आये हुए स्वरों की संधि नहीं होती।

उदाहरण

  •  अतः + एव : अतएव

नियम 8

अंत्य के बदले भी विसर्ग होता है। यदि के आगे अघोष वर्ण आए तो विसर्ग का कोई विकार नहीं होता और यदि उनके आगे घोष वर्ण आ जाता है तो र जैसा है वैसा रहता है।

 उदाहरण

  •  पुनर् + उक्ति : पुनरुक्ति
  •  अंतर् + करण : अंतःकरण

Swar Sandhi Ke Udaharan

(अ, आ)

  • अभ्युदय अभि +उदय इ + उ= यु (यण)
  • अत्याचार अति+आचार इ + आ= या (यण)
  • अन्वेषण अनु +एषण उ + ए= वे (यण)
  • अभ्यागत अभि +आगत इ + आ= या (यण)
  • अभीष्ट अभि + इष्ट इ + इ= ई (दीर्घ)
  • अत्यन्त अति + अन्त इ + अ= य (यण)
  • अधीश्र्वर अधि + ईश्र्वर इ + ई= ई (दीर्घ)
  • आद्यन्त आदि+अन्त इ + अ= य (यण)
  • अत्युत्तम अति+उत्तम इ +उ= यु (यण)
  • अतीव अति + इव इ + इ= ई (दीर्घ)
  • अन्यान्य अन्य + अन्य अ + अ= आ (दीर्घ)
  • असुरालय असुर + आलय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • आनन्दोत्सव आनंद + उत्सव अ + उ= ओ (गुण)
  • आशातीत आशा + अतीत आ + अ= आ (दीर्घ)
  • अन्वीक्षण अनु + ईक्षण उ + ई= वी (यण)
  • अन्नाभाव अन्न + अभाव अ + अ= आ (दीर्घ)
  • अक्षौहिणी अक्ष + ऊहिणी अ + ऊ= औ (यण)
  • अल्पायु अल्प + आयु अ + अ= आ (दीर्घ)
  • अनावृष्टि अन + आवृष्टि अ + इ= य (दीर्घ)
  • अत्यावश्यक अति + आवश्यक इ + अ= य (यण)
  • अत्युष्म अति +उष्म इ + अ= य (यण)
  • अनुपमेय अन् + उपमेय अ + इ= य (दीर्घ)
  • अन्योक्ति अन्य + उक्ति अ + इ= य (दीर्घ)
  • अधीश्वर अधि + ईश्वर इ + ई= ई (दीर्घ)

(इ, उ, ए)

  • इत्यादि इति + आदि इ + आ= या (यण)
  • ईश्वरेच्छा ईश्वर + इच्छा अ + इ= ए (गुण)
  • उपेक्षा उप + ईक्षा अ + ई= ए (गुण)
  • उर्मिलेश उर्मिला + ईश आ + ई= ए (गुण)
  • ऊहापोह ऊह + अपोह ऊ + अ= आ (दीर्घ)
  • उत्तरायण उत्तर + अयन अ + अ= आ (दीर्घ)
  • उपर्युक्त उपरि + उक्त इ + उ= यु (यण)
  • उमेश उमा + ईश आ + ई= ए (गुण)
  • एकैक एक + एक अ + ए= ऐ (वृद्धि)
  • एकांकी एक + अंकी अ + अ= आ (दीर्घ)
  • एकानन एक + आनन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • एकेश्वर एक + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)
  • ऐतयारण्यक ऐतरेय + आरण्यक अ + आ= आ (दीर्घ)

( क, ख )

  • कमलेश कमल + ईश अ + ई= ए (गुण)
  • कपीश कपि + ईश इ + ई= ई (दीर्घ)
  • करुणामृत करुण + अमृत अ + अ= आ (दीर्घ)
  • कामान्ध काम + अन्ध अ + अ= आ (दीर्घ)
  • कामारि काम + अरि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • कृपाचार्य कृपा + आचार्य आ + आ= आ (दीर्घ)
  • कृपाकांक्षी कृपा + आकांक्षी आ + आ= आ (दीर्घ)
  • कृष्णानन्द कृष्ण + आनंद अ + आ= आ (दीर्घ)
  • केशवारि केशव + अरि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • कोमलांगी कोमल + अंगी अ + अ= आ (दीर्घ)
  • कंसारि कंस + अरि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • कवीन्द्र कवि + इन्द्र इ + इ= ई (दीर्घ)
  • कवीश कवि + ईश इ + ई= ई (दीर्घ)
  • कल्पान्त कल्प + अन्त अ + अ= आ (दीर्घ)
  • कुशासन कुश + आसन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • कुलटा कुल + अटा निपात से संधि
  • कर्णोद्धार कर्ण + उद्धार अ + उ= ओ (गुण)
  • कौरवारि कौरव + अरि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • केशान्त केश + अन्त अ + अ= आ (दीर्घ)
  • खगेश्वर खग + ईश्वर अ + ई ए (गुण)
  • खगेश खग + ईश अ + अ= ए (गुण)
  • खगेन्द्र खग + इन्द्र अ + इ= ए (गुण)

( ग, घ )

  • गंगोदक गंगा + उदक आ + उ= ओ (गुण)
  • गजेन्द्र गज + इन्द्र अ + इ= ए (गुण)
  • गत्यवरोध गति + अवरोध इ + अ= य (यण)
  • गायक गै + अक ऐ + अ= आय (अयादि)
  • गायिका गै + इका ऐ + इ= आयि (अयादि)
  • ग्रामोद्धार ग्राम + उद्धार अ + उ= ओ (गुण)
  • गिरीश गिरि + ईश इ + ई= ई (दीर्घ)
  • गजानन गज + आनन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • गणेश गण + ईश अ + ई= ए (गुण)
  • गिरीन्द्र गिरि + इन्द्र इ + इ= ई (दीर्घ)
  • ग्रामोद्योग ग्राम + उद्योग अ + उ= ओ (गुण)
  • गुरूपदेश गुरु + उपदेश उ + उ= ऊ (दीर्घ)
  • गायन गै + अन ऐ + अ= आय (अयादि)
  • गत्यात्मकता गति + आत्मकता इ + आ= या (यण)
  • गंगौघ गंगा + ओघ आ + ओ= औ (वृद्धि)
  • गंगोर्मि गंगा + ऊर्मि आ + ऊ= ओ (गुण)
  • गीतांजलि गीत + अंजलि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • गंगैश्वर्य गंगा + ऐश्वर्य आ + ऐ= ऐ (वृद्धि)
  • गवाक्ष गो + अक्ष ओ + अ= व
  • गीत्युपदेश गीति + उपदेश इ + उ=यु (यण)
  • गेयात्मकता गेय + आत्मकता अ + आ= आ (दीर्घ)
  • गोत्राध्याय गोत्र + अध्याय अ + अ= आ (दीर्घ)
  • गौर्यादेश गौरी + आदेश ई + आ= या (यण)
  • गंगेश गंगा + ईश आ + ई= ए (गुण)
  • गुरवे गुरो + ए
  • गृहौत्सुक्य गृह + औत्सुक्य अ + औ= औ (वृद्धि)
  • गव्यम गो + यम् ओ + य= व
  • घनानंद घन + आनंद अ + आ= आ (दीर्घ)
  • घनान्धकार घन + अन्धकार अ + अ= आ (दीर्घ)

( च, छ )

  • चतुरानन चतुर + आनन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • चन्द्राकार चन्द्र + आकार अ + आ= आ (दीर्घ)
  • चतुरानन चतुर + आनन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • चन्द्राकार चन्द्र + आकार अ + आ= आ (दीर्घ)
  • चन्द्रोदय चन्द्र + उदय अ + उ= ओ (गुण)
  • चरणायुध चरण + आयुध अ + आ= आ (दीर्घ)
  • चरणामृत चरण + अमृत अ + अ= आ (दीर्घ)
  • चरणारविंद चरण + अरविंद अ + अ= आ (दीर्घ)
  • चमूत्साह चमू + उत्साह ऊ + उ= ऊ (दीर्घ)
  • चयन चे + अन ए + अ= अय (अयादि)
  • चरित्रांकन चरित्र + अंकन अ + अ= आ (दीर्घ)
  • चिरायु चिर + आयु अ + आ= आ (दीर्घ)
  • चिन्तोन्मुक्त चिन्ता + उन्मुक्त आ + उ= ओ (गुण)
  • छात्रावस्था छात्र + अवस्था अ + अ= आ (दीर्घ)
  • छात्रावास छात्र + आवास अ + आ= आ (दीर्घ)

( ज, झ ) 

  • जलौघ जल + ओघ अ + ओ= औ (वृद्धि)
  • जलाशय जल + आशय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • जन्मान्तर जन्म + अन्तर अ + अ= आ (दीर्घ)
  • जनाश्रय जन + आश्रय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • जनकांगजा जनक + अंगजा अ + अ= आ (दीर्घ)
  • जलोर्मि जल + उर्मि अ + ऊ= ओ (गुण)
  • जन्मोत्सव जन्म + उत्सव अ + उ= ओ (गुण)
  • जानकोश जानकी + ईश ई + ई= ई (दीर्घ)
  • जितेन्द्रिय जित + इन्द्रिय अ + इ= ए (गुण)
  • जीर्णांचल जीर्ण + अंचल अ + अ= आ (दीर्घ)
  • जिह्वाग्र जिह्वा + अग्र आ + अ= आ (दीर्घ)
  • झंझानिल झंझा + अनिल आ + अ= आ (दीर्घ)
  • झण्डोत्तोलन झंडा + उत्तोलन आ + उ= ओ (गुण)
  • टिकैत टिक + ऐत अ + ऐ=ऐ (वृद्धि)
  • डिम्बोद्घोष डिम्ब + उद्घोष अ + उ= ओ (गुण)

( त, थ )

  • तथागत तथा + आगत आ + आ= आ (दीर्घ)
  • तथापि तथा + अपि आ + अ= आ (दीर्घ)
  • तथैव तथा + एव आ + ए= ऐ (वृद्धि)
  • तिमिराच्छादित तिमिर + आच्छादित अ + आ= आ (दीर्घ)
  • तारकेश्वर तारक + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)
  • तारकेश तारक + ईश अ + ई= ए (गुण)
  • तपेश्वर तप + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)
  • तमसाच्छन्न तमस + आच्छन्न अ + आ= आ (दीर्घ)
  • तिमिरारि तिमिर + अरि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • तुरीयावस्था तुरीय + अवस्था अ + अ= आ (दीर्घ)
  • तुषारावृत्त तुषार + आवृत्त अ + आ= आ (दीर्घ)
  • त्रिगुणातीत त्रिगुण + अतीत अ + अ= आ (दीर्घ)
  • थानेश्वर थाना + ईश्वर आ + ई= ए (गुण)

( द )

  • दर्शनार्थ दर्शन + अर्थ अ + अ= आ (दीर्घ)
  • दावाग्नि दाव + अग्नि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • दावानल दाव + अनल अ + अ= आ (दीर्घ)
  • देवर्षि देव + ऋषि अ + ऋ= अर् (गुण)
  • देवेश देव + ईश अ + ई= ए (गुण)
  • देवेन्द्र देव + इन्द्र अ + इ= ए (गुण)
  • देवागमन देव + आगमन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • देव्यागम देवी + आगम ई + आ= या (यण)
  • दूतावास दूत + आवास अ + आ= आ (दीर्घ)
  • देशाटन देश + अटन अ + अ= आ (दीर्घ)
  • दीपावली दीप + अवली अ + अ= आ (दीर्घ)
  • द्रोणाचार्य द्रोण + आचार्य अ + आ= आ (दीर्घ)
  • दंडकारण्य दंडक + अरण्य अ + अ= आ (दीर्घ)
  • दक्षिणायन दक्षिण + अयन अ + अ= आ (दीर्घ)
  • दध्योदन दधि + ओदन इ + ओ= यो (यण)
  • दर्शनेच्छा दर्शन + इच्छा अ + इ= ए (गुण)
  • दशानन दश + आनन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • दयानंद दया+ आनंद आ + आ= आ (दीर्घ)
  • दानवारि दानव + अरि अ + अ=आ (दीर्घ)
  • दासानुदास दास + अनुदास अ + अ=आ (दीर्घ)
  • दिनांक दिन + अंक अ + अ=आ (दीर्घ)
  • दिनांत दिन + अन्त अ + अ=आ (दीर्घ)
  • दिव्यास्त्र दिव्य + अस्त्र अ + अ=आ (दीर्घ)
  • दीक्षान्त दीक्षा + अन्त आ + अ= आ (दीर्घ)
  • दीपोत्सव दीप + उत्सव अ + उ= ओ (गुण)
  • दूरागत दूर + आगत अ + आ= आ (दीर्घ)
  • देवालय देव + आलय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • देवांगना देव + अंगना अ + अ= आ (दीर्घ)
  • देवोत्थान देव + उत्थान अ + उ= ओ (गुण)
  • देशांतर देश + अन्तर अ + अ=आ (दीर्घ)
  • दैत्यारि दैत्य + अरि अ + अ=आ (दीर्घ)
  • द्वाराकाधीश द्वारका + अधीश आ + अ= आ (दीर्घ)
  • दर्शनाचार्य दर्शन + आचार्य अ + आ= (दीर्घ)
  • दुग्धाहार दुग्ध + आहार अ + आ= आ (दीर्घ)
  • देवांशु देव + अंशु अ + अ= आ (दीर्घ)

( ध )

  • धर्माधिकारी धर्म + अधिकारी अ + अ=आ (दीर्घ)
  • धर्मांध धर्म + अन्ध अ + अ=आ (दीर्घ)
  • धर्मात्मा धर्म + आत्मा अ + आ= आ (दीर्घ)
  • धर्मोपदेश धर्म + उपदेश अ + उ= ओ (गुण)
  • धर्मार्थ धर्म + अर्थ अ + अ= आ (दीर्घ)
  • धनेश धन + ईश अ + इ=ए (गुण)
  • धनाधीश धन + अधीश अ + अ= आ (दीर्घ)
  • धनादेश धन + आदेश अ + आ= आ (दीर्घ)
  • घनानंद घन + आनंद अ + आ= आ (दीर्घ)
  • धर्माधर्म धर्म + अधर्म अ + अ=आ (दीर्घ)
  • धर्माचार्य धर्म + आचार्य अ + आ= आ (दीर्घ)
  • धर्मावतार धर्म + अवतार अ + अ= आ (दीर्घ)
  • धारोष्ण धारा + ऊष्ण आ + ऊ= ओ (गुण)
  • धीरोदात्त धीर + उदात्त अ + उ= ओ (गुण)
  • धीरोद्धत धीर + उद्धत अ + उ= ओ (गुण)
  • धूमाच्छन्न धूम + आच्छन्न अ + आ= आ (दीर्घ)
  • ध्वजोत्तोलन ध्वजा + उत्तोलन आ + उ= ओ (गुण)
  • ध्वन्यर्थ ध्वनि + अर्थ इ + अ= य (यण)
  • ध्वन्यात्मक ध्वनि + आत्मक इ + आ= या (यण)
  • धावक धौ + अक औ + अ= आव (अयादि)

( न )

  • नागेन्द्र नाग + इन्द्र अ + इ= ए (गुण)
  • नागेश नाग + ईश अ + ई= ए (गुण)
  • नरेश नर + ईश अ + ई= ए (गुण)
  • नरेन्द्र नर + इन्द्र अ + इ= ए (गुण)
  • नदीश नदी + ईश ई + ई= ई (दीर्घ)
  • नयन ने + अन ए + अ= अय (अयादि)
  • नायक नै + अक ऐ + अ= आय (अयादि)
  • नायिका नै + इका ऐ + इ= आयि (अयादि)
  • नवोदय नव + उदय अ + उ= ओ (गुण)
  • नारायण नर + अयन अ + अ= आ (दीर्घ)
  • नारीश्वर नारी + ईश्वर ई + ई= ई (दीर्घ)
  • निरानंद निरा + आनंद आ + आ= आ (दीर्घ)
  • नीचाशय नीच + आशय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • नीलांबर नील + अम्बर अ + अ= आ (दीर्घ)
  • नीलांजल नील + अंजल अ + अ= आ (दीर्घ)
  • नीलोत्पल नील + उत्पल अ + उ= ओ (गुण)
  • न्यून नि + ऊन इ + ऊ= यू (यण)
  • नयनाम्बु नयन + अम्बु अ + अ= आ (दीर्घ)
  • नयनाभिराम नयन + अभिराम अ + अ= आ (दीर्घ)
  • नवोढ़ा नव + ऊढ़ा अ + ऊ= ओ (गुण)
  • नाविक नौ + इक औ + इ आवि (अयादि)
  • न्यायालय न्याय + आलय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • न्यायाधीश न्याय + अधीश अ + आ= आ (दीर्घ)
  • नक्षत्रेश नक्षत्र + ईश अ + ई= ए (गुण)
  • नृत्यालय नृत्य + आलय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • निम्नांकित निम्न + अंकित अ + अ= आ (दीर्घ)
  • निम्नानुसार निम्न + अनुसार अ + आ= आ (दीर्घ)

( प ) | Sandhi Kise Kahate Hain

  • पंचानन पंच + आनन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • पंचामृत पंच + अमृत अ + अ= आ (दीर्घ)
  • पंचाग्नि पंच + अग्नि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • पत्राचार पत्र + आचार अ + आ= आ (दीर्घ)
  • पदोन्नति पद + उन्नति अ + उ= ओ (गुण)
  • परमार्थ परम + अर्थ अ + अ= आ (दीर्घ)
  • परमौषध परम + औषध अ + औ= औ (वृद्धि)
  • परमौषधि परम + ओषधि अ + ओ= औ (वृद्धि)
  • परीक्षा परि + ईक्षा इ + ई= ई (दीर्घ)
  • परोपकार पर+ उपकार अ + उ= ओ (गुण)
  • परीक्षार्थी परीक्षा + अर्थी आ + अ= आ (दीर्घ)
  • पवन पो + अन ओ + अ=अव (अयादि)
  • पावन पौ + अन औ + अ= आव (अयादि)
  • पावक पौ + अक औ + अ= आव (अयादि)
  • पवित्र पो + इत्र ओ + इ= अवि (अयादि)
  • पदाक्रांत पद + आक्रांत अ + आ= आ (दीर्घ)
  • पदाधिकारी पद + अधिकारी अ + अ= आ (दीर्घ)
  • पदावलि पद + अवलि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • पद्माकर पद्म + आकर अ + अ= आ (दीर्घ)
  • परार्थ पर + अर्थ अ + अ= आ (दीर्घ)
  • परमेश्वर परम + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)
  • पराधीन पर + अधीन अ + अ= आ (दीर्घ)
  • परमात्मा परम + आत्मा अ + आ= आ (दीर्घ)
  • पर्वतेश्वर पर्वत + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)
  • पश्चिमोत्तर पश्चिम + उत्तर अ + उ= ओ (गुण)
  • पाठान्तर पाठ + अन्तर अ + अ= आ (दीर्घ)
  • पित्रादेश पितृ + आदेश ऋ + आ= रा (यण)
  • पीताम्बर पीत + अम्बर अ + अ= आ (दीर्घ)
  • पुंडरीकाक्ष पुंडरीक + अक्ष अ + अ= आ (दीर्घ)
  • पुण्यात्मा पुण्य + आत्मा अ + आ= आ (दीर्घ)
  • पुस्तकालय पुस्तक + आलय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • पुरुषोत्तम पुरुष + उत्तम अ + उ= ओ (गुण)
  • पूर्वानुराग पूर्व + अनुराग अ + अ= आ (दीर्घ)
  • पूर्वोदय पूर्व + उदय अ + उ= ओ (गुण)
  • प्रांगण प्र + आंगण अ + आ= आ (दीर्घ)
  • प्रत्यय प्रति + अय इ + अ= य (यण)
  • प्रत्युत्तर प्रति + उत्तर इ + उ= यु (यण)
  • प्रत्येक प्रति + एक इ + ए= ये (यण)
  • प्रत्युपकार प्रति + उपकार इ + उ= यु (यण)
  • प्रत्यक्ष प्रति + अक्ष इ + अ= य (यण)
  • प्रोत्साहन प्र + उत्साहन अ + उ= ओ (गुण)
  • पुष्पोद्यान पुष्प + उद्यान अ + उ= ओ (गुण)
  • पृथ्वीश पृथ्वी + ईश ई + ई= ई (दीर्घ)
  • प्राणाधार प्राण + आधार अ + आ= आ (दीर्घ)
  • प्राणेश्वर प्राण + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)
  • पश्वादि पशु + आदि उ + अ= वा (यण)
  • पश्वधम पशु + अधम उ + अ= व (यण)
  • परमौदार्य परम + औदार्य अ + औ= औ (वृद्धि)
  • प्राचार्य प्र + आचार्य अ + आ= आ (दीर्घ)
  • प्राध्यापक प्र + अध्यापक अ + आ= आ (दीर्घ)
  • प्रधानाचार्य प्रधान + आचार्य अ + आ= आ (दीर्घ)

( फ )

  • फणीन्द्र फणी + इन्द्र ई + इ= ई (दीर्घ)
  • फलेच्छा फल + इच्छा अ + इ= ए (गुण)
  • फलाहार फ़ल + आहार अ + आ= आ (दीर्घ)
  • फलादेश फल + आदेश अ + आ= आ (दीर्घ)
  • फलाकांक्षा फल + आकांक्षा अ + आ= आ (दीर्घ)
  • फलोदय फल + उदय अ + उ= ओ (गुण)
  • फेनोज्ज्वल फेन + उज्ज्वल अ + उ= ओ (गुण)
  • फलाफल फल + अफल अ + अ= आ (दीर्घ)
  • फलागम फल + आगम अ + आ= आ (दीर्घ)

( ब )

  • बद्धानुराग बद्ध + अनुराग अ + अ= आ (दीर्घ)
  • बहुलांश बहुल + अंश अ + अ= आ (दीर्घ)
  • बालेन्द्र बाल + इन्द्र अ + इ= ए (गुण)
  • ब्रजेश ब्रज + ईश अ + ई= ए (गुण)
  • बह्मर्षि ब्रह्म + ऋषि अ + ऋ=अर (गुण)
  • ब्रह्मचर्याश्रम ब्रह्मचर्य + आश्रम अ + आ= आ (दीर्घ)
  • ब्रह्मास्त्र ब्रह्म + अस्त्र अ + आ= आ (दीर्घ)
  • बिम्बौष्ठ बिम्ब + ओष्ठ अ + ओ= औ (वृद्धि)

( भ )

  • भवन भो + अन ओ + अ= अव (अयादि)
  • भानूदय भानु + उदय उ + उ= ऊ (दीर्घ)
  • भोजनालय भोजन +आलय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • भाग्योदय भाग्य + उदय अ + उ= ओ (गुण)
  • भद्रासन भद्र + आसन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • भयातुर भय + आतुर अ + आ= आ (दीर्घ)
  • भवेश भव + ईश अ + इ= ए (गुण)
  • भावावेश भाव + आवेश अ + आ= आ (दीर्घ)
  • भावान्तर भाव + अन्तर अ + अ= आ (दीर्घ)
  • भाषान्तर भाषा + अन्तर आ + अ= आ (दीर्घ)
  • भावुक भौ + उक औ + उ= आवु (अयादि)
  • भूर्ध्व भू + ऊर्ध्व ऊ + ऊ= ऊ (दीर्घ)
  • भुजगेन्द्र भुजग + इन्द्र अ + इ= ए (गुण)
  • भुवनेश्वर भुवन + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)
  • भूतेश भूत + ईश अ + ई= ए (गुण)
  • भूतेश्वर भूत + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)

( म )

  • मतानुसार मत + अनुसार अ + आ= आ (दीर्घ)
  • मदिरालय मदिरा + आलय आ + आ= आ (दीर्घ)
  • मंदाग्नि मंद + अग्नि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • मदांध मद + अंध अ + अ= आ (दीर्घ)
  • मदोन्मत्त मद + उन्मत्त अ + उ= ओ (गुण)
  • मध्यांतर मध्य + अन्तर अ + अ= आ (दीर्घ)
  • मतैक्य मत + ऐक्य अ + ऐ= ऐ (वृद्धि)
  • महोत्सव महा + उत्सव आ + उ= ओ (गुण)
  • महर्षि महा + ऋषि आ + ऋ= अर् (गुण)
  • महाशय महा + आशय आ + आ= आ (दीर्घ)
  • महात्मा महा + आत्मा आ + आ= आ (दीर्घ)
  • मरणासन्न मरण + आसन्न अ + आ= आ (दीर्घ)
  • मरणोपरान्त मरण + उपरान्त अ + उ= ओ (गुण)
  • मल्लिकार्जुन मल्लिक + अर्जुन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • मलयानिल मलय + अनिल अ + अ=आ (दीर्घ)
  • महेन्द्र महा + इन्द्र आ + इ= ए (गुण)
  • महेश महा + ईश आ + ई= ए (गुण)
  • महीश्वर मही + ईश्वर ई + ई= ई (दीर्घ)
  • मध्वाचार्य मधु + आचार्य उ + आ= वा (यण)
  • मातृण मातृ + ऋण ऋ + ऋ= ऋ (दीर्घ)
  • महैश्वर्य महा + ऐश्वर्य आ + ऐ=ऐ (वृद्धि)
  • मुनीश मुनि + ईश इ = ई = ई (दीर्घ)
  • मुनीन्द्र मुनि + इन्द्र इ + इ= ई (दीर्घ)
  • मुखाकृति मुख + आकृति अ + आ= आ (दीर्घ)
  • मुखाग्नि मुख + अग्नि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • महोदय महा + उदय आ + उ= ओ (गुण)
  • महोपदेश महा + उपदेश आ + उ= ओ (गुण)
  • महौज महा + ओज आ + ओ= औ (वृद्धि)
  • महौषध महा + औषध आ + औ= औ (वृद्धि)
  • मेघाच्छन्न मेघ + आच्छन्न अ + आ= आ (दीर्घ)
  • मन्वंतर मनु + अन्तर उ + अ= व (यण)
  • मध्वासव मधु + आसव उ + आ= वा (यण)
  • मध्यावकाश मध्य + अवकाश अ + अ= आ (दीर्घ)
  • मार्तण्ड मार्त + अण्ड अ + अ= आ (दीर्घ)
  • मृगेन्द्र मृग + इन्द्र अ + इ= ए (गुण)
  • मृगांक मृग + अंक अ + अ= आ (दीर्घ)
  • मात्रानंद मातृ + आनंद ऋ + आ= रा (यण)

( य )

  • यथेष्ट यथा + इष्ट आ + इ= ए (गुण)
  • यथोचित यथा +उचित आ + उ= ओ (गुण)
  • यद्यपि यदि + अपि इ + अ= य (यण)
  • यज्ञाग्नि यज्ञ + अग्नि अ + आ= आ (दीर्घ)
  • यज्ञोपवीत यज्ञा + उपवीत अ + उ= ओ (गुण)
  • योगेन्द्र योग + इन्द्र अ + इ= ए (गुण)

( र )

  • रक्ताभ रक्त + आभ अ + आ= आ (दीर्घ)
  • रमेश रमा+ईश आ + ई= ए (गुण)
  • रमेन्द्र रमा + इन्द्र आ + इ= ए (गुण)
  • रसास्वादन रस + आस्वादन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • रजनीश रजनी + ईश ई + ई= ई (दीर्घ)
  • रवींद्र रवि + इंद्र इ + इ= ई (दीर्घ)
  • रवीश रवि + ईश इ + ई= ई (दीर्घ)
  • रत्नाकर रत्न + आकर अ + आ= आ (दीर्घ)
  • रसात्मक रस + आत्मक अ + आ= आ (दीर्घ)
  • रसानुभूति रस + अनुभूति अ + अ= आ (दीर्घ)
  • रसाभास रस + आभास अ + आ= आ (दीर्घ)
  • राकेश राका + ईश आ + ई= ए (गुण)
  • राजर्षि राजा + ऋषि आ + ऋ= अर (गुण)
  • रामायण राम + अयन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • राजेन्द्र राजा + इन्द्र आ + इ= ए (गुण)
  • रामावतार राम + अवतार अ + अ= आ (दीर्घ)
  • रामाधार राम + आधार अ + आ= आ (दीर्घ)
  • राजाज्ञा राजा + आज्ञा आ + आ= आ (दीर्घ)
  • राघवेन्द्र राघव + इन्द्र अ + इ= ए (गुण)
  • राज्याभिषेक राज्य + अभिषेक अ + अ= आ (दीर्घ)
  • रामेश्वर राम + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)
  • रावणेश्वर रावण + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)
  • रत्नावली रत्न + अवली अ + आ= आ (दीर्घ)
  • रूद्राक्ष रूद्र + अक्ष अ + अ= आ (दीर्घ)
  • रेखांकित रेखा + अंकित अ + अ= आ (दीर्घ)
  • रेखांश रेखा + अंश अ + अ= आ (दीर्घ)
  • रोमावलि रोम + अवलि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • रावण रौ + अन औ + अ= आव (अयादि)
  • रामानन्द राम + आनंद अ + आ= आ (दीर्घ)

( ल )

  • लघूर्मि लघु + ऊर्मि उ + ऊ= ऊ (दीर्घ)
  • लम्बोदर लम्ब + उदर आ + उ= ओ (गुण)
  • लोकोत्तर लोक + उत्तर
  • लंकेश्वर लंका + ईश्वर आ + ई= ए (गुण)
  • लघ्वाहार लघु + आहार उ + आ= वा (यण)
  • लाटानुप्रास लाट + अनुप्रास अ + आ= आ (दीर्घ)
  • लिंगानुशासन लिंग + अनुशासन अ + अ= आ (दीर्घ)
  • लोकोक्ति लोक + उक्ति अ + उ= ओ (गुण)
  • लोकेश लोक + ईश अ + ई= ए (गुण)
  • लोकायतन लोक + आयतन अ + आ= आ (दीर्घ)
  • लीलागार लीला + आगार आ + आ= आ (दीर्घ)
  • लोपामुद्रा लोप + आमुद्रा अ + आ= आ (दीर्घ)
  • लोहिताश्व लोहित + अश्व अ + अ= आ (दीर्घ)
  • लेखाधिकारी लेखा + अधिकारी आ + अ= आ (दीर्घ)
  • लुप्तोपमा लुप्त + उपमा अ + उ= ओ (गुण)
  • लोकाधिपति लोक + अधिपति अ + अ= आ (दीर्घ)
  • लोकोत्तर लोक + उत्तर अ + उ= ओ (गुण)
  • लोटा लृ + ओटा लृ + ओ= लो (यण)

( व )

  • वंशांकुर वंश + अंकुर अ + अ= आ (दीर्घ)
  • वंशानुक्रम वंश + अनुक्रम अ + अ= आ (दीर्घ)
  • वघूत्सव वघू + उत्सव ऊ + उ= ऊ (दीर्घ)
  • वज्रांग वज्र + अंग अ + अ= आ (दीर्घ)
  • वज्राघात वज्र + आघात अ + आ= आ(दीर्घ)
  • वज्रायुध वज्र + आयुध अ + आ= आ (दीर्घ)
  • वनोत्सव वन + उत्सव अ + उ= ओ (गुण)
  • व्यर्थ वि + अर्थ इ + अ= य (यण)
  • वसंतोत्सव वसंत + उत्सव अ + उ= ओ (गुण)
  • वसुधैव वसुधा + एव आ + ए= ऐ (वृद्धि)
  • वार्तालाप वार्ता + आलाप आ + आ= आ (दीर्घ)
  • वामेश्वर वाम + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)
  • व्यापक वि + आपक इ + आ= या (यण)
  • व्याप्त वि + आप्त इ + आ= या (यण)
  • व्याकुल वि + आकुल इ + आ= या (यण)
  • व्यायाम वि + आयाम इ + आ= या (यण)
  • व्याधि वि + आधि इ + आ= या (यण)
  • व्याघात वि + आघात इ + आ= या (यण)
  • व्युत्पत्ति वि + उत्पत्ति इ + उ= यु (यण)
  • व्यूह वि + ऊह इ + ऊ= यू (यण)
  • विद्योपार्जन विद्या + उपार्जन आ + उ= ओ (गुण)
  • विधूदय विधु + उदय उ + उ= ऊ (दीर्घ)
  • विकासोन्मुख विकास + उन्मुख अ + उ= ओ (गुण)
  • विजयेच्छा विजय + इच्छा अ + इ= ए (गुण)
  • विचारोचित विचार + उचित अ + उ= ओ (गुण)
  • विकलांग विकल + अंग अ + अ= आ (दीर्घ)
  • वीरांगना वीर + अंगना अ + अ= आ (दीर्घ)
  • वेदान्त वेद + अन्त अ + अ= आ (दीर्घ)
  • वेदाध्ययन वेद + अध्ययन अ + अ= आ (दीर्घ)
  • वनौषधि वन + ओषधि अ + ओ= औ (वृद्धि)
  • वध्वागमन वधू + आगमन ऊ + आ= वा (यण)
  • वध्वैश्वर्य वधू + ऐश्वर्य ऊ + ऐ= वै (यण)
  • वस्त्रालय वस्त्र + आलय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • वर्णनातीत वर्णन + अतीत अ + अ= आ (दीर्घ)
  • वर्णाश्रम वर्ण + आश्रम अ + आ= आ (दीर्घ)
  • वर्गाकार वर्ग + आकार अ + आ= आ (दीर्घ)

Sandhi Kise Kahate Hain

( श )

  • शताब्दी शत + अब्दी अ + अ= आ (दीर्घ)
  • शकारि शक + अरि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • शब्दालंकार शब्द + अलंकार अ + अ= आ (दीर्घ)
  • शयन शे + अन ए + अ= अय (अयादि)
  • शरणागत शरण + आगत अ + आ= आ (दीर्घ)
  • शरणार्थी शरण + अर्थी अ + अ= आ (दीर्घ)
  • शायक शै + अक ऐ + अ= आप (अयादि)
  • शावक शौ + अक औ + अ= आव (अयादि)
  • शास्त्रानुसार शास्त्र + अनुसार अ + अ= आ (दीर्घ)
  • शास्त्रार्थ शास्त्र + अर्थ अ + अ= आ (दीर्घ)
  • शिष्टाचार शिष्ट + आचार अ + आ= आ (दीर्घ)
  • शिवालय शिव + आलय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • शिलासन शिला + आसन आ + आ= आ (दीर्घ)
  • शिक्षालय शिक्षा + आलय आ + आ= आ (दीर्घ)
  • शिक्षार्थी शिक्षा + अर्थी आ + अ= आ (दीर्घ)
  • शिवेन्द्र शिव + इन्द्र अ + इ= ए (गुण)
  • शिवाम्बु शिव + अम्बु अ + अ= आ (दीर्घ)
  • शुद्धोदन शुद्ध + ओदन अ + ओ= ओ
  • शुभारंभ शुभ + आरंभ अ + आ= आ (दीर्घ)
  • शुभ्रांशु शुभ + अंशु अ + आ= आ (दीर्घ)
  • शुभेच्छा शुभ + इच्छा अ + इ= ए (गुण)
  • श्वेताम्बर श्वेत + अम्बर अ + अ= आ (दीर्घ)
  • श्रवण श्रो + अन ओ + अ= अव (अयादि)
  • श्रावण श्रौ + अन औ + अ= आव (अयादि)
  • श्लोकाबद्ध श्लोक + आबद्ध अ + आ= आ (दीर्घ)
  • षोड्शोपचार षोड्श + उपचार अ + उ= ओ (गुण)
  • सत्याग्रह सत्य+आग्रह अ + आ= आ (दीर्घ)
  • सभाध्यक्ष सभा + अध्यक्ष अ + अ= आ (दीर्घ)
  • सावधान स + अवधान अ + अ= आ (दीर्घ)
  • स्वल्प सु + अल्प उ + अ= व (यण)

( ह )

  • हरीश हरि + ईश इ + ई= ई (दीर्घ)
  • हर्षोल्लास हर्ष + उल्लास अ + उ= ओ (गुण)
  • हताश हत + आश अ + आ= आ (दीर्घ)
  • हरिणाक्षी हरिण + अक्षी अ + अ= आ (दीर्घ)
  • हताहत हत + आहत अ + आ= आ (दीर्घ)
  • हितोपदेश हित + उपदेश अ + उ= ओ (गुण)
  • हिमालय हिम + आलय अ + आ= आ (दीर्घ)
  • हितैषी हित + ऐषी अ + ऐ= ऐ (वृद्धि)
  • हीनावस्था हीन + अवस्था अ + अ= आ (दीर्घ)
  • हास्यास्पद हास्य + आस्पद अ + आ= आ (दीर्घ)
  • क्षुधातुर क्षुधा + आतुर आ + आ= आ (दीर्घ)
  • त्रिपुरारि त्रिपुर + अरि अ + अ= आ (दीर्घ)
  • त्रिभुजाकार त्रिभुज + आकार अ + आ= आ (दीर्घ)
  • ज्ञानेश ज्ञान + ईश अ + ई= ए (गुण)
  • ज्ञानेश्वर ज्ञान + ईश्वर अ + ई= ए (गुण)
  • ज्ञानांजन ज्ञान + अंजन अ + अ= आ (दीर्घ)
  • ज्ञानेन्द्रिय ज्ञान + इन्द्रिय अ + इ= ए (गुण)
  • क्षुद्रात्मा क्षुद्र + आत्मा अ + आ= आ (दीर्घ)
  • क्षुधार्त्त क्षुधा + आर्त्त आ + आ= आ (दीर्घ)

विसर्ग संधि के उदाहरण

( अ )

  • अब्ज= अप् + ज अम्मय= अप् + मय
  • आकृष्ट= आकृष् + त अहंकार= अहम् + कार
  • अजन्त= अच् + अन्त आच्छादन= आ + छादन
  • अबिन्धन= अप्+ इन्धन अभिषेक अभि + सेक
  • अज्लुप्त= अच् + लुप्त अब्माधुर्य= अप् + माधुर्य
  • अब्भरण= अप् + हरण अज्झीन= अच् + हीन
  • अबादान= अप् + आदान अज्झरण= अच् + हरण
  • अनुच्छेद= अनु + छेद अब्नदी= अप् + नदी

( उ )

  • उद्गम= उत् + गम उद्द्घाटन= उत् + घाटन
  • उड्डयन= उत् + डयन उद्याम= उत् + याम
  • उद्धत= उत् + ह्रत उन्नयन= उत् + नयन
  • उद्भव= उत् + भव उन्मूलन= उत् + मूलन
  • उल्लंघन= उत् + लंघन उद्धार= उत् + हार
  • उदन्त= उत्+ अन्त उच्छृंखल= उत् + श्रृंखल
  • उद्विग्न= उत् + विग्न उद्योग= उत्+ योग
  • उदंक= उत् + अंक उद्वर्तन= उत् + वर्तन
  • उत्सव= उत् + सव उद्द्गार= उत् + गार
  • उद्द्घोष= उत् + घोष उज्ज्वल= उत् + ज्वल
  • उद्द्ण्ड= उत् + दंड उद्धत= उत् + हत
  • उन्नति= उत् + नति उन्नायक= उत् + नायक
  • उन्मत्त= उत् + मत्त उन्मुख= उत् + मुख
  • उल्लास= उत् + लास उदग्र= उत् + अग्र
  • उदय= उत् + अय उच्छिष्ट= उत् + शिष्ट
  • उन्मूलित= उत् + मूलित उन्मीलित= उत् + मीलित
  • उन्माद= उत् + माद उद्द्भास= उत् + भास
  • उल्लेख= उत् + लेख हार उद्वेग= उत् + वेग
  • उच्छ्वास= उत् + श्वास ऋग्वेद= ऋक + वेद

( क )

  • कृदन्त= कृत् + अन्त कृष्ण= कृष् + न
  • किंचित्= किम् + चित् किन्नर= किम्+ नर
  • कष्ट= कष्+ त क्लिष्ट= क्लिश् + त
  • काष्ठा= काष् + था कान्ति= काम् + ति
  • कुंठित= कुन् + ठित कज्जल= कच् + जल

( च, ज )

  • चिदानंद= चित् + आनंद चिन्मय= चित् + मय
  • जगदानन्द= जगत् + आनंद जगदीश= जगत् + ईश
  • जगन्माता= जगत् + माता जगदाधार= जगत् + आधार
  • जगन्नाथ= जगत् + नाथ जगद्गुरु= जगत् + गुरु

( त )

  • तल्लीन= तत् + लीन तदाकार= तत् + आकार
  • तृष्णा= तृष् + ना तल्लय= तत्+ लय
  • तन्मित्र= तत् + मित्र तदात्म= तत् + आत्म
  • तट्टीका= तत् + टीका तद्धित= तत् + हित
  • तद्रूप= तत् + रूप तन्नाम= तत् + मात्र
  • तच्छिव= तत् + शिव

( द )

  • दुर्जन= दुः + जन दुस्तर= दुः + तर
  • दुर्नीति= दुः + नीति दुश्शासन= दुः + शासन
  • दुराशा= दुः + आशा दुष्कर= दुः + कर
  • दुर्गति= दुः + गति दुर्दिन= दुः + दिन
  • दुर्वह= दुः + वह दुराचार= दुः + आचार
  • दुरवस्था= दुः + अवस्था दुस्साहस= दुः + साहस
  • दुर्व्यवहार= दुः + व्यवहार दुरात्मा= दुः + आत्मा
  • दुर्बुद्धि= दुः + बुद्धि दुःस्वप्न= दुः + स्वप्न
  • दुःख= दुः + ख दुष्प्रकृति= दुः + प्रकृति
  • दुर्ग= दुः + ग

( न )

  • निरुपाय= निः + उपाय नीरव= निः + रव
  • निरक्षर= नि: + अक्षर नमस्कार= नमः + कार
  • निश्चल= निः + चल निस्सन्देह= निः + सन्देह
  • निस्सार= निः + सार निरीक्षण= निः + ईक्षण
  • निष्पाप= निः + पाप निस्सहाय= निः + सहाय
  • निर्गंध= निः + गंध निष्फल= निः+ फल
  • निर्जला= निः+ जला नीरोग= निः+ रोग
  • निराशा= निः+ आशा निर्मल= निः + मल
  • निश्छल= निः + छल निस्सृत= निः + सृत
  • निराधार= निः + आधार निरीह= निः + ईह
  • निष्काम= निः + काम निरर्थक= निः + अर्थक
  • निर्विवाद= निः + विवाद निर्झर= निः + झर
  • निश्चय= निः + चय निर्भर= निः + भर
  • निर्विकार= निः + विकार नीरस= निः + रस
  • निरुद्देश्य= निः + उद्देश्य निर्जीव= निः + जीव

( प )

  • पृष्ठ= पृष् + थ प्रतिष्ठित= प्रति + स्थित
  • परिच्छेद= परि + छेद पंचम= पम् + चम
  • पद्धति= पद् + हति परन्तु= परम् + तु
  • प्रातःकाल= प्रातः + काल परिष्कार= परि: + कार
  • पुनर्जन्म= पुनः + जन्म पुरस्कार= पुरः + कार
  • पयोधि= पयः + धि पुनरपि= पुनः + अपि

( म )

  • मनोनुकूल= मनः + अनुकूल मनोरम= मनः + रम
  • मनस्ताप= मनः + ताप मनोयोग= मनः + योग
  • मनोभाव= मनः + भाव मनोज= मनः + ज
  • मनोरथ= मनः + रथ मनस्कामना= मनः + कामना (मनोकामना)
  • मनोविज्ञान= मनः + विज्ञान मनोरंजन= मनः + रंजन
  • मनोगत= मनः + गत

Sandhi Kise Kahate Hain

( स )

  • शंका= शम् + का शिवच्छाया= शिव + छाया
  • शांति= शाम् + ति षडानन= षट् + आनन
  • षण्मास= षट् + मास षड्दर्शन= षट् + दर्शन
  • षष्ठ= षष् + थ सदिच्छा= सत् + इच्छा
  • सज्जन= सत् + जन सच्छास्त्र= सत् + शास्त्र
  • संकल्प= सम् + कल्प संगीत= सम् + गीत
  • संधि= सम् + धि संभव= सम् + भव
  • संवाद= सम् + वाद सम्बन्ध= सम् + बन्ध
  • संन्यासी= सम् + न्यासी संस्कृत= सम् + कृत
  • संतोष= सम् + तोष सन्निहित= सम् + निहित
  • सम्राट= सम् + राट् सदाचार= सत् + आचार
  • संबल= सम् + बल सद्गति= सत्+ गति
  • संवत्= सम् + वत् सद्भावना= सत् + भावना
  • सन्मार्ग= सत् + मार्ग सच्चिदानंद= सत्+ चित् + आनंद
  • संगम= सम् + गम संगठन= सम् + गठन
  • संचय= सम् + चय संयम= सम् + यम
  • संहार= सम् + हार संयोग= सम् + योग
  • संदेह= सम् + देह संलग्न= सम् + लग्न
  • संस्कृति= सम् + कृति समुच्चय= सम् + उत् + चय
  • संगठन= सम् + गठन सदानंद= सत् + आनंद
  • सच्चरित्र= सत् + चरित्र सद्काल= सत् + काल
  • संसार= सम् + चार संलिप्त= सम् + लिप्त
  • स्वच्छंद= स्व + छंद समुदाय= सम् + उत् + आय
  • संदीप= सम् + दीप शरदुत्सव= शरद् + उत्सव
  • सम्पूर्ण= सम् + पूर्ण समन्वय= सम् + अनु + अय
  • संहार= सम् + हार सद्वाणी= सत् + वाणी
  • सन्धान= सम् + धान संताप= सम् + ताप
  • संगत= सम्+ गत संथाल= सम् + थाल
  • संलाप= सम् + लाप संजय= सम् + जय
  • संस्कर्त्ता= सम् + कर्त्ता संदेश= सम् + देश
  • शंकर= शम् + कर वाग्युद्ध= वाक् + युद्ध
  • वाङ्मय= वाक् + मय तदर्थ= तत् + अर्थ
  • यशोदा= यशः + दा यशोगान= यशः + गान
  • यशोधरा= यशः + धरा बहिर्मुख= बहिः + मुख
  • सरोज= सरः + ज सरोवर= सरः + वर

Conclusion

इस Post में हमने आपको Sandhi Kise Kahate Hain  के बारे में बताया है उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह Post पसंद आया होगा और आपको इस Post को पढ़ने के बाद Sandhi Kise Kahate Hain, Sandhi Viched in Hindi के बारे में Google पर Search करने की जरुरत नहीं पड़ेगी ।

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